अब उम्र नहीं देख रही थायराइड बीमारी, किशोर और युवा भी तेजी से हो रहे प्रभावित

 फतेहाबाद बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान और बढ़ते तनाव के बीच थाइराइड की बीमारी तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। पहले जहां इसे बढ़ती उम्र की समस्या माना जाता था, वहीं अब युवा और किशोर भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन तीन से चार नए मरीज थाइराइड संबंधी समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें महिलाओं के साथ युवा वर्ग की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। चिकित्सकों के अनुसार समय रहते जांच और उपचार न कराया जाए तो यह बीमारी शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकती है।थाइराइड गले के सामने

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Published On :

मई 24, 2026

 फतेहाबाद

बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान और बढ़ते तनाव के बीच थाइराइड की बीमारी तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। पहले जहां इसे बढ़ती उम्र की समस्या माना जाता था, वहीं अब युवा और किशोर भी इससे प्रभावित हो रहे हैं।

नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन तीन से चार नए मरीज थाइराइड संबंधी समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें महिलाओं के साथ युवा वर्ग की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। चिकित्सकों के अनुसार समय रहते जांच और उपचार न कराया जाए तो यह बीमारी शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकती है।थाइराइड गले के सामने मौजूद एक छोटी ग्रंथि होती है, जो शरीर में हार्मोन बनाने का काम करती है।

यही हार्मोन शरीर की ऊर्जा, वजन, हृदय गति, पाचन और मानसिक स्थिति को नियंत्रित करते हैं। जब यह ग्रंथि जरूरत से कम या अधिक हार्मोन बनाने लगती है तो शरीर में कई तरह की समस्याएं शुरू हो जाती हैं। हार्मोन कम बनने की स्थिति को हाइपोथाइराइड और अधिक बनने को हाइपरथाइराइड कहा जाता है। दोनों ही स्थितियां स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं।

थकान, वजन बढ़ना और चिड़चिड़ापन हैं प्रमुख संकेत
लगातार थकान रहना, अचानक वजन बढ़ना या घटना, बाल झड़ना, हाथ कांपना, नींद कम आना, चिड़चिड़ापन, दिल की धड़कन तेज होना और गले में सूजन इसके सामान्य लक्षण हो सकते हैं। महिलाओं में मासिक धर्म संबंधी गड़बड़ी और गर्भधारण में परेशानी भी थाइराइड के कारण हो सकती है। वहीं बच्चों और युवाओं में यह बीमारी पढ़ाई, मानसिक एकाग्रता और शारीरिक विकास पर असर डाल सकती है।

इलाज में लापरवाही पड़ सकती है भारी
चिकित्सकों का कहना है कि कई लोग शुरुआत में इसे सामान्य कमजोरी या तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन लंबे समय तक उपचार न मिलने पर यह बीमारी हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मोटापा, मानसिक तनाव और कमजोरी जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार नियमित जांच और चिकित्सकीय सलाह से इस बीमारी को नियंत्रित रखा जा सकता है। मरीजों को बिना डाक्टर की सलाह दवा बंद नहीं करनी चाहिए।

थाइराइड से बचाव के लिए अपनाएं ये सावधानियां
    संतुलित और पौष्टिक भोजन लें।
    आयोडीन युक्त नमक का प्रयोग करें।
    नियमित व्यायाम और योग करें।
    तनाव से दूर रहने का प्रयास करें।
    पर्याप्त नींद लें और दिनचर्या नियमित रखें।
    वजन और स्वास्थ्य की समय-समय पर जांच करवाएं।
    लगातार थकान या अन्य लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।

    जागरूकता और समय पर उपचार से थाइराइड को नियंत्रित किया जा सकता है। लापरवाही बरतने पर यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित कर सकती है। पहले केवल 50 साल के बाद यह बीमारी देखने को मिलती थी, लेकिन अब तो युवा इसकी चपेट में आ रहे है। -डॉ. मनीष टूटेजा, छाती रोग विशेषज्ञ नागरिक अस्पताल।