लोकधुनों, रंगों और स्वाद में रचा-बसा ‘उत्तर प्रदेश दिवस-2026’ का जनोत्सव

राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर दिखी उत्तर प्रदेश के उत्सव की सतरंगी छटा लोकधुनों, रंगों और स्वाद में रचा-बसा 'उत्तर प्रदेश दिवस-2026' का जनोत्सव लखनऊ  सुबह की हल्की धूप के बीच  राष्ट्र प्रेरणा स्थल का पूरा परिसर ही उत्तर प्रदेश के रंग में रंगा नजर आया। ढोलक की थाप, शहनाई की मधुर स्वर लहरियां और लोकगीतों की मिठास के बीच उत्तर प्रदेश दिवस-2026 का जनोत्सव केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राज्य की आत्मा को महसूस कराने वाला उत्सव बनकर सामने आया। परिसर में कदम रखते ही चारों ओर सजी लोकचित्रों की प्रदर्शनी और रंग बिरंगे परिधानों में सजे कलाकार ध्यान

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Published On :

जनवरी 25, 2026

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राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर दिखी उत्तर प्रदेश के उत्सव की सतरंगी छटा

लोकधुनों, रंगों और स्वाद में रचा-बसा 'उत्तर प्रदेश दिवस-2026' का जनोत्सव

लखनऊ
 सुबह की हल्की धूप के बीच  राष्ट्र प्रेरणा स्थल का पूरा परिसर ही उत्तर प्रदेश के रंग में रंगा नजर आया। ढोलक की थाप, शहनाई की मधुर स्वर लहरियां और लोकगीतों की मिठास के बीच उत्तर प्रदेश दिवस-2026 का जनोत्सव केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राज्य की आत्मा को महसूस कराने वाला उत्सव बनकर सामने आया। परिसर में कदम रखते ही चारों ओर सजी लोकचित्रों की प्रदर्शनी और रंग बिरंगे परिधानों में सजे कलाकार ध्यान खींचते रहे। हर दृश्य उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता की कहानी कह रहा था। कहीं ब्रज की होली की झलक दिखी, तो कहीं पूर्वांचल की लोकनृत्य शैली ने दर्शकों को थिरकने पर मजबूर कर दिया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर चेहरे पर उत्साह और अपने प्रदेश को लेकर गर्व साफ झलक रहा था।

एक जनपद एक व्यंजन योजना के स्टॉल पर सर्वाधिक भीड़
कार्यक्रम स्थल पर सबसे अधिक भीड़ एक जनपद एक व्यंजन योजना के स्टॉल पर दिखाई दी। आगरा के पेठे की मिठास, मथुरा के पेड़ों की खुशबू, बनारस की ठंडाई और पान की पारंपरिक महक, चंदौली के काले चावल से बने व्यंजन, इन सभी ने यूपी की सांस्कृतिक पहचान को एक ही थाली में सजा दिया। लोग न केवल इन व्यंजनों का स्वाद ले रहे थे, बल्कि अपने अपने जनपद से जुड़ी स्मृतियों और पहचान को भी साझा कर रहे थे।

प्रस्तुतियों ने पूरे माहौल को बनाए रखा जीवंत
लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने पूरे माहौल को जीवंत बनाए रखा। कठपुतली नृत्य में लोककथाएं जैसे सजीव हो उठीं। रामायण के पात्रों के स्वांग ने श्रद्धा और मनोरंजन को एक साथ जोड़ दिया। हर प्रस्तुति के बाद तालियों की गूंज यह बताती रही कि यह उत्सव केवल देखने का नहीं, महसूस करने का अनुभव है। वहीं दूसरी ओर, विभिन्न विभागों की प्रदर्शनियों के माध्यम से उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा भी साफ नजर आई। यह परंपरा और प्रगति का ऐसा संगम था, जहां एक ओर विरासत को संजोया जा रहा था, तो दूसरी ओर भविष्य की दिशा भी स्पष्ट दिखाई दे रही थी।

केवल राजधानी तक सीमित नहीं आयोजन
तीन दिनों तक चलने वाला यह आयोजन राजधानी तक सीमित नहीं है। प्रदेश के हर जिले में इसी भाव और उत्साह के साथ यूपी दिवस मनाया जा रहा है। यूपी दिवस-2026 ने यह साफ संदेश दिया है कि उत्तर प्रदेश केवल आंकड़ों और योजनाओं को धरातल पर उतारने वाला राज्य ही नहीं, बल्कि संस्कृति, संवेदना और सामूहिक गर्व से जुड़ा हुआ जनप्रदेश है, जहां उत्सव भी नीति बन जाता है और परंपरा भी विकास का हिस्सा बनकर आगे बढ़ती है।

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