अमेरिका ने ईरान युद्ध के लिए तय की डेडलाइन, सेना भेजने की आवश्यकता नहीं: बयान

तेहरान  मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच अमेरिका ने पहली बार साफ संकेत दिया है कि ईरान के खिलाफ उसका सैन्य अभियान ज्यादा लंबा नहीं चलेगा. मार्को रुबियो ने कहा है कि यह ऑपरेशन "महीनों नहीं, बल्कि हफ्तों" में खत्म हो सकता है और इसके लिए जमीनी सेना उतारने की जरूरत नहीं पड़ेगी।  फ्रांस में G7 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद रुबियो ने कहा कि अमेरिका अपने तय लक्ष्यों को समय से पहले या उसके आसपास हासिल कर सकता है. हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि कुछ अमेरिकी सैनिकों को क्षेत्र में तैनात किया जा रहा

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Published On :

मार्च 28, 2026

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तेहरान 
मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच अमेरिका ने पहली बार साफ संकेत दिया है कि ईरान के खिलाफ उसका सैन्य अभियान ज्यादा लंबा नहीं चलेगा. मार्को रुबियो ने कहा है कि यह ऑपरेशन "महीनों नहीं, बल्कि हफ्तों" में खत्म हो सकता है और इसके लिए जमीनी सेना उतारने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 

फ्रांस में G7 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद रुबियो ने कहा कि अमेरिका अपने तय लक्ष्यों को समय से पहले या उसके आसपास हासिल कर सकता है. हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि कुछ अमेरिकी सैनिकों को क्षेत्र में तैनात किया जा रहा है ताकि जरूरत पड़ने पर विकल्प खुले रहें। 

इस बयान के बावजूद जंग के हालात कुछ और ही कहानी बता रहे हैं. ईरान लगातार अमेरिकी और सहयोगी ठिकानों पर हमले कर रहा है. हाल ही में सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमले में 12 अमेरिकी सैनिक घायल हुए, जिनमें दो की हालत गंभीर है. इस हमले में कई सैन्य विमान भी नष्ट हो गए। 

मरीन-एयरबोर्न सैनिकों को मिडिल ईस्ट भेज रहा US
अमेरिकी विदेश मंत्री ने भले ही जमीनी युद्ध से इनकार किया हो, लेकिन पेंटागन ने हजारों मरीन और एयरबोर्न सैनिकों को मिडिल ईस्ट भेजना शुरू कर दिया है. पहला बैच इसी मार्च महीने के अंत तक एक बड़े एम्फीबियस जहाज के जरिए पहुंचने वाला है. इससे यह आशंका भी बढ़ गई है कि अगर हालात बिगड़े तो जंग जमीनी स्तर तक फैल सकती है। 

इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस जंग को जल्द खत्म करने के संकेत दे रहे हैं. उन्होंने ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए 10 दिन की नई डेडलाइन दी है, वरना ऊर्जा ढांचे पर हमले की चेतावनी दी है. ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान के जरिए ईरान को 15 सूत्रीय प्रस्ताव भी भेजा है, जिसमें यूरेनियम संवर्धन रोकने और मिसाइल कार्यक्रम सीमित करने जैसी शर्तें शामिल हैं। 

अमेरिका-ईरान की जंग में कहां, कितनी मौतें?
हालांकि तेहरान ने अब तक इन बातचीतों से इनकार किया है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि हमलों के बीच बातचीत की बात "अस्वीकार्य" है और ईरान इसका "भारी जवाब" देगा. जंग का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है. ईरान में अब तक 1900 से ज्यादा लोगों की मौत और 20 हजार से अधिक लोग घायल हो चुके हैं. वहीं अमेरिका के 300 से ज्यादा सैनिक घायल और 13 की मौत हो चुकी है। 

ईरान की मिसाइल क्षमता भी यूएस नहीं कर पाया नष्ट!
ब्रिटिश न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने अमेरिकी खुफिया सूत्रों के हवाले से बताया है कि अब तक ईरान की करीब एक-तिहाई मिसाइल क्षमता ही नष्ट हो पाई है, यानी उसके पास अभी भी जवाबी हमलों की बड़ी ताकत मौजूद है. यही वजह है कि जंग जल्दी खत्म होने के दावों के बावजूद हालात अनिश्चित बने हुए हैं. मसलन, अमेरिका जहां इस जंग को सीमित समय में खत्म करने की बात कर रहा है, वहीं जमीन पर जारी हमले और बढ़ती सैन्य गतिविधियां यह संकेत दे रही हैं कि संघर्ष अभी और लंबा खिंच सकता है। 

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