पुलिस ने लूट को झपटमारी में बदलकर सजा कम करने की कोशिश की, हाई कोर्ट ने DSP और जांच अधिकारी को किया तलब

चंडीगढ़   पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एक मामले में सजा कम करने के उद्देश्य से पुलिस ने लूटमार की घटना को झपटमारी में बदल दिया। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया लूटमार का मामला होने के बावजूद इसे झपटमारी में परिवर्तित करना न्याय प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ है। यह मामला जालंधर में दर्ज एक एफआईआर से संबंधित है, जिसमें शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि तीन अज्ञात हमलावरों ने बेसबाल बैट और ‘दातर’ जैसे हथियारों से हमला कर उसे और उसके साथी को घायल किया और मोबाइल फोन, नकदी तथा मोटरसाइकिल छीनकर

Wrriten By :

Editor

Published On :

अप्रैल 24, 2026

Advertisements
728x90 Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital.jpg

चंडीगढ़ 

 पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एक मामले में सजा कम करने के उद्देश्य से पुलिस ने लूटमार की घटना को झपटमारी में बदल दिया।

अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया लूटमार का मामला होने के बावजूद इसे झपटमारी में परिवर्तित करना न्याय प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ है। यह मामला जालंधर में दर्ज एक एफआईआर से संबंधित है, जिसमें शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि तीन अज्ञात हमलावरों ने बेसबाल बैट और ‘दातर’ जैसे हथियारों से हमला कर उसे और उसके साथी को घायल किया और मोबाइल फोन, नकदी तथा मोटरसाइकिल छीनकर फरार हो गए।

इन तथ्यों के बावजूद पुलिस ने लूटमार की गंभीर धाराओं के बजाय झपटमारी से संबंधित प्रविधानों में मामला दर्ज किया। सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्य प्रताप सिंह ने टिप्पणी की कि एफआईआर में वर्णित घटनाक्रम स्पष्ट रूप से लूटमार की श्रेणी में आता है।

अदालत ने जांच अधिकारी और संबंधित डीएसपी को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि लूटमार के मामले को झपटमारी में क्यों बदला गया। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आपराधिक मामलों में लापरवाही या जानबूझकर की गई त्रुटियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।

हमलावरों ने हथियारों से हमला कर जालंधर में की थी लूट
आरोपित को दी जमानत कोर्ट ने कहा कि इस तरह की त्रुटियां तकनीकी नहीं होतीं, बल्कि इससे पूरे मामले की गंभीरता, सजा की प्रकृति और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है। आरोपित को नियमित जमानत भी प्रदान की, यह कहते हुए कि आरोपित सात महीने से हिरासत में है और जांच पूरी हो चुकी है। सह-आरोपितों को पहले ही मिल चुकी है।

 

Leave a Comment

2