महाकाल मंदिर का लड्डू अब बनेगा हाईटेक मशीन से, 40 करोड़ का टेंडर जारी, गड़बड़ी पर लगेगा 50 लाख तक जुर्माना

उज्जैन  विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में मिलने वाला लड्डू प्रसाद अब पूरी तरह हाईटेक होने जा रहा है। सिंहस्थ 2028 को देखते हुए मंदिर समिति ने अत्याधुनिक मशीनों से लड्डू तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। खास बात यह है कि महाकाल मंदिर देश का पहला ऐसा मंदिर है जिसके लड्डू प्रसाद को FSSAI की 5 स्टार रेटिंग मिल चुकी है। उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु लड्डू प्रसाद ग्रहण करते हैं। सामान्य दिनों में करीब 50 क्विंटल और विशेष पर्वों पर 100 क्विंटल तक लड्डू प्रसाद की खपत होती है। बढ़ती मांग और

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Published On :

मई 1, 2026

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उज्जैन
 विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में मिलने वाला लड्डू प्रसाद अब पूरी तरह हाईटेक होने जा रहा है। सिंहस्थ 2028 को देखते हुए मंदिर समिति ने अत्याधुनिक मशीनों से लड्डू तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। खास बात यह है कि महाकाल मंदिर देश का पहला ऐसा मंदिर है जिसके लड्डू प्रसाद को FSSAI की 5 स्टार रेटिंग मिल चुकी है।

उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु लड्डू प्रसाद ग्रहण करते हैं। सामान्य दिनों में करीब 50 क्विंटल और विशेष पर्वों पर 100 क्विंटल तक लड्डू प्रसाद की खपत होती है। बढ़ती मांग और आगामी सिंहस्थ महापर्व 2028 को ध्यान में रखते हुए मंदिर समिति अब आधुनिक तकनीक के जरिए प्रसाद निर्माण को नई दिशा देने जा रही है। मंदिर समिति ने करीब 40 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया है। जिसके तहत फुली ऑटोमेटिक मशीनों के माध्यम से लड्डू प्रसाद तैयार किया जाएगा। नई यूनिट त्रिवेणी संग्रहालय के पास बने अन्नक्षेत्र परिसर में स्थापित की गई है। जिसका निर्माण लगभग 20 करोड़ रुपए की लागत से किया गया है।

मंदिर समिति के अनुसार मशीनों के उपयोग से लड्डुओं की एक जैसी सिकाई होगी। गुणवत्ता में एकरूपता आएगी और उत्पादन क्षमता भी कई गुना बढ़ेगी। इससे सिंहस्थ के दौरान आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को बेहतर और स्वच्छ प्रसाद उपलब्ध कराया जा सकेगा।

उप प्रशासक सिम्मी यादव ने बताया कि टेंडर में गुणवत्ता को लेकर सख्त नियम तय किए गए हैं। आवेदन वही फर्म कर सकेगी जिसके पास कम से कम 3 साल का खाद्य निर्माण अनुभव हो। साथ ही FSSAI और ISO 22000 प्रमाणन अनिवार्य होगा।

लड्डुओं की शेल्फ लाइफ कम से कम 15 दिन रखना भी जरूरी किया गया है। वहीं गुणवत्ता में लापरवाही पाए जाने पर 25 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा। घटिया सामग्री उपयोग करने पर 5 लाख और वजन कम पाए जाने पर 2 लाख रुपए तक की पेनल्टी का प्रावधान रखा गया है।

मंदिर समिति का कहना है कि प्रसाद की शुद्धता और स्वाद बनाए रखने के लिए शुद्ध घी, रागी, चना दाल, काजू-किशमिश सहित तय मानकों के अनुसार सामग्री का उपयोग किया जाएगा। धार्मिक आस्था और आधुनिक तकनीक के इस संगम को सिंहस्थ 2028 की तैयारियों में एक बड़े नवाचार के रूप में देखा जा रहा है।

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