आयुर्वेद में मर्म चिकित्सा की महत्वपूर्ण भूमिका — किशन सूर्यवंशी

भोपाल. नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी जी ने मानस भवन में विश्व आयुर्वेद परिषद, मध्यप्रदेश द्वारा आयोजित “आयुर्वेद कौशलम्” अंतर्गत “मर्म चिकित्सा कार्यशाला” के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता की एवं कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर सूर्यवंशी जी ने आयुर्वेद के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विशेष रूप से मर्म चिकित्सा की उपयोगिता एवं उसके व्यापक प्रभाव पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद न केवल उपचार की प्राचीन पद्धति है, बल्कि यह स्वस्थ जीवनशैली का आधार भी है। मर्म चिकित्सा जैसी विधाएं आज के समय में लोगों को प्राकृतिक एवं प्रभावी

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Published On :

अप्रैल 19, 2026

भोपाल.
नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी जी ने मानस भवन में विश्व आयुर्वेद परिषद, मध्यप्रदेश द्वारा आयोजित “आयुर्वेद कौशलम्” अंतर्गत “मर्म चिकित्सा कार्यशाला” के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता की एवं कार्यक्रम को संबोधित किया।

इस अवसर पर सूर्यवंशी जी ने आयुर्वेद के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विशेष रूप से मर्म चिकित्सा की उपयोगिता एवं उसके व्यापक प्रभाव पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद न केवल उपचार की प्राचीन पद्धति है, बल्कि यह स्वस्थ जीवनशैली का आधार भी है। मर्म चिकित्सा जैसी विधाएं आज के समय में लोगों को प्राकृतिक एवं प्रभावी उपचार प्रदान कर रही हैं।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने उपस्थित वैद्यजनों एवं प्रतिभागियों के साथ संवाद कर उनके अनुभवों को जाना तथा इस प्रकार की कार्यशालाओं के माध्यम से आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार को और अधिक गति देने की आवश्यकता पर बल दिया।

इस अवसर पर डॉ सुनील कुमार जोशी जी (पूर्व कुलपति, उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय) , प्रोफेसर ए.एस यादव जी ( कुलगुरु मानसरोवर ग्लोबल ),  प्रोफेसर महेश व्यास जी (डीन, All India Institute of Ayurveda, नई दिल्ली), प्रोफेसर आरके गुप्ता जी(अध्यक्ष, विश्व आयुर्वेद परिषद, मध्यप्रदेश), डॉक्टर उमेश शुक्ला जी (पं. खंडीलाल शर्मा आयुर्वेद महाविद्यालय भोपाल), गोपालदास मेहता जी (विश्व आयुर्वेद परिषद) की गरिमामयी उपस्थिति रही।

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