हाइवे के बीच खड़ा था घर, किसान ने हटाने की बजाय पूरा खिसकाया

चंडीगढ़ पंजाब के एक किसान का अपनी कोठी से अनोखा प्यार सामने आया है। कोठी की जगह हाईवे पर आने से किसान ने उसे आगे खिसाने का फैसला लिया। आप भी ये पूरा मामला पढ़ चौंक जाएंगे। जी हां… बरनाला के किसान सुखप्रीत सिंह की 3 साल की मेहनत, जिंदगी भर की कमाई और सपनों का 2 मंजिला घर सब कुछ तैयार था, बस रंग-रोगन बाकी था। किसा ने 2017 से कोठी बनाना शुरू किया और 2020 में बनकर तैयार हुई। लेकिन तभी एक नोटिस ने किसान सुखप्रीत सिंह की दुनिया हिला दी। नोटिस में बताया गया कि उसकी आलीशान

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Published On :

जनवरी 23, 2026

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चंडीगढ़
पंजाब के एक किसान का अपनी कोठी से अनोखा प्यार सामने आया है। कोठी की जगह हाईवे पर आने से किसान ने उसे आगे खिसाने का फैसला लिया। आप भी ये पूरा मामला पढ़ चौंक जाएंगे। जी हां… बरनाला के किसान सुखप्रीत सिंह की 3 साल की मेहनत, जिंदगी भर की कमाई और सपनों का 2 मंजिला घर सब कुछ तैयार था, बस रंग-रोगन बाकी था। किसा ने 2017 से कोठी बनाना शुरू किया और 2020 में बनकर तैयार हुई। लेकिन तभी एक नोटिस ने किसान सुखप्रीत सिंह की दुनिया हिला दी। नोटिस में बताया गया कि उसकी आलीशान कोठी भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत बनने वाले लुधियाना-बठिंडा हाईवे के रास्ते में आ रही है और इसे हटाना होगा।
 
यह खबर सुनते ही किसान के पैरों तले से जमीन खिसक गई। पूरा परिवार टेंशन में आ गया कि, वर्षों की मेहनत से बनाए गए घर को टूटते देखने का ख्याल उन्हें बेचैन कर रहा था। रिश्तेदारों, जानकारों और अधिकारियों से सलाह ली गई, लेकिन सवाल वही था, क्या सपनों का आशियाना तोड़ दिया जाए? इस दौरान किसान के सामने 2 ही विकल्प थे या तो घर गिरा दिया जाए, या फिर नामुमकिन को मुमकिन बनाया जाए। आखिरकार किसान ने हिम्मत दिखाते हुए दूसरा रास्ता चुना।
 
किसान ने हरियाणा के ठेकेदार से सम्पर्क किया और उसकी मदद से करीब 60 लाख रुपये की लागत से बनी इस 2 मंजिला कोठी को अब मशीनों की मदद से 350 फुट आगे खिसकाया जा रहा है। बीते 2 महीनों से कोठी को शिफ्ट करने का काम चल रहा है और इसे पूरा होने में अभी करीब 3 महीने और लगेंगे। इस पूरी प्रक्रिया पर लगभग 10 लाख 60 हजार रुपये का खर्च आएगा, लेकिन किसान का कहना है कि मेहनत से बनाए गए सपनों के घर को बचाने के लिए यह कीमत उसे मंजूर है।

मिली जानकारी के अनुसार सुखप्रीत सिंह ने 60 लाख में कोठी तैयार करवाई थी। लेकिन प्रोजेक्ट में आई इस जमीन के लिए उसे सिर्फ 60 लाख रुपए मुआवजा मिल रहा था। किसान ने बताया कि उसकी जमीन और उस पर बनी कोठी की कीमत दोगुनी थी लेकिन उसे मुआवजा बहुत कम मिल रहा था, वह कि वह कहीं और कोठी नहीं बना सकता था। इसी कारण वह परेशान था। इस दौरान लोग भी उसे कहते थे कि, 25-30 लाख रुपए में कोई नई कोठी बन जाएगी, लेकिन उसकी कोठी की कीमत 60 लाख रुपए की कीमत से तैयार हुई थी। ऐसी कोठी बनना उसकी सबसे बड़ा सपना था। कई बार प्रशासन को कोठी हटाने से मना किया लेकिन आखिर में उक्त फैसला लिया गया।

किसान ने  बताया कि उसने कोठी को खिसकाने का फैसला इंस्टाग्राम पर रील देखकर लिया। उसने बताया कि एक दिन रात के समय इंस्टाग्राम पर रील देखी जिसमें कोठी को तोड़ने की बजाय खिसकाया जा सकता है। इसके बाद उसने कोठी को शिफ्ट करवाने का फैसला लिया। इस दौरान उन्होंने एक कमरा बनवाया जिसमें परिवार वालों को रखा। इस दौरान कई लोगों ने बाते भी की। कोठी को खिसकाने पर उसमें दरारें आ जाएंगी। किसान ने बताया जो हरियाणा के ठेकेदार उसकी कोठी को शिफ्ट करवा रहा है, वह यमुनागर से काम सीख कर आया है। ये काम बहुत ही मुश्किल है, जरा सी चूक होने पर कोठी को नुकसान हो सकता है। ठेकेदार ने कहा कि अगर कोठी में दरारें आए तो उसका पूरा मुआवजा दिया जाएगा। अप्रैल महीने तक पूरी कोठी शिफ्ट हो जाएगी, जिसके वह और उनका परिवार राहत की सांस लेंगे।

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