सॉइल टू सिल्क की संपूर्ण प्रक्रिया का होगा जीवंत प्रदर्शन, शुद्ध रेशमी वस्त्रों के लिए बनेगा भरोसेमंद केंद्र

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के पारंपरिक और ग्रामीण उद्योगों को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। इसके तहत, रेशम उद्योग के सुदृढ़ीकरण, शुद्ध रेशमी वस्त्रों की पहचान तथा आमजन को रेशम उत्पादन की पूरी प्रक्रिया से अवगत कराने के उद्देश्य से प्रदेश में ‘सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स’ की स्थापना की गई है। स्थानीय कारीगरों को उपलब्ध होगा सीधा बाजार सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स में ‘सॉइल टू सिल्क’ की समस्त विधाओं, नर्सरी विकास, शहतूत वृक्षारोपण, रेशम कीट पालन, कोया उत्पादन, धागाकरण से लेकर साड़ी एवं परिधान निर्माण तक का चरणबद्ध और

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Published On :

फ़रवरी 2, 2026

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लखनऊ.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के पारंपरिक और ग्रामीण उद्योगों को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। इसके तहत, रेशम उद्योग के सुदृढ़ीकरण, शुद्ध रेशमी वस्त्रों की पहचान तथा आमजन को रेशम उत्पादन की पूरी प्रक्रिया से अवगत कराने के उद्देश्य से प्रदेश में ‘सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स’ की स्थापना की गई है।

स्थानीय कारीगरों को उपलब्ध होगा सीधा बाजार

सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स में ‘सॉइल टू सिल्क’ की समस्त विधाओं, नर्सरी विकास, शहतूत वृक्षारोपण, रेशम कीट पालन, कोया उत्पादन, धागाकरण से लेकर साड़ी एवं परिधान निर्माण तक का चरणबद्ध और व्यावहारिक प्रदर्शन किया जाएगा। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को यह समझाना है कि शुद्ध रेशम क्या होता है, उसकी गुणवत्ता कैसे पहचानी जाए और बाजार में उपलब्ध नकली या मिश्रित रेशम से कैसे भेद किया जा सकता है। यह केन्द्र न केवल प्रशिक्षण और जागरूकता का माध्यम होगा, बल्कि एक्जीबिशन, मार्केटिंग कम सेल सेंटर के रूप में भी कार्य करेगा, जहां शुद्ध रेशमी वस्त्रों और परिधानों का सीधा विक्रय किया जाएगा। इससे स्थानीय बुनकरों, कारीगरों, किसानों और स्वयं सहायता समूहों को सीधा बाजार उपलब्ध होगा।

हजारों परिवारों की आजीविका होगी सुदृढ़

योगी सरकार की यह पहल आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम है, जिससे रेशम उद्योग से जुड़े हजारों परिवारों की आजीविका सुदृढ़ होगी और प्रदेश की पारंपरिक कला एवं विरासत को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। इस महत्वाकांक्षी केन्द्र का उद्घाटन सोमवार को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान द्वारा किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि रेशम निदेशालय परिसर में स्थापित यह सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जहां रेशम उत्पादन की पूरी श्रृंखला का प्रत्यक्ष एवं जीवंत प्रदर्शन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यहां रेशम कीट से धागा बनने की प्रक्रिया, धागाकरण एवं वस्त्र निर्माण की संपूर्ण विधि को एक ही स्थान पर देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि पूर्व में यह स्थल अनुपयोगी अवस्था में था, जिसे विभागीय प्रयासों से आधुनिक, भव्य एवं उपयोगी स्वरूप प्रदान किया गया है। अब यह केन्द्र प्रदेश मुख्यालय पर देश-विदेश से आने वाले आगंतुकों के लिए रेशम उद्योग की पहचान का प्रमुख केन्द्र बनेगा। यहां एरी, शहतूती एवं टसर रेशम की उत्पादन प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से समझा जा सकेगा।

प्रदेश में लगभग 300 से 350 मीट्रिक टन रेशम उत्पादन

मंत्री सचान ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार वर्ष 2022 से प्रदेश में रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 300 से 350 मीट्रिक टन रेशम उत्पादन हो रहा है, जिसे निरंतर बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। किसानों को प्रशिक्षण देकर रेशम उत्पादन से जोड़ा जा रहा है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय के अवसर प्राप्त हों। भारत सरकार एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से रेशम उत्पादकों को अनुदान, प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव, उद्यान एवं रेशम, उत्तर प्रदेश शासन, विशेष सचिव/निदेशक (रेशम), केन्द्रीय रेशम बोर्ड (भारत सरकार) के अधिकारी एवं वैज्ञानिकों सहित विभागीय एवं तकनीकी अधिकारी उपस्थित रहे।

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