LK Advani Birthday 2026 : लालकृष्ण आडवाणी के जन्मदिन पर भावुक हुए पीएम मोदी, याद किया उनका ऐतिहासिक राजनीतिक सफर

लालकृष्ण आडवाणी के जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भावुक लेख लिखकर उनके राजनीतिक सफर और देश के प्रति योगदान को याद किया। मोदी ने बताया कि कैसे आडवाणी ने जनसंघ को मजबूत करने से लेकर बीजेपी के निर्माण तक अहम भूमिका निभाई। जानिए राम रथ यात्रा, आपातकाल और मोदी से उनके आत्मीय रिश्ते की कहानी।

LK Advani Birthday 2026

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

नवम्बर 8, 2026

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LK Advani Birthday 2026 :  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 8 नवंबर 2026 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के जन्मदिन पर उन्हें विशेष अंदाज में याद किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने एक विस्तृत लेख साझा करते हुए भारतीय राजनीति, भाजपा के संगठनात्मक विकास, राम मंदिर आंदोलन और लोकतंत्र की मजबूती में आडवाणी के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि आडवाणी ने पार्टी को मजबूत वैचारिक आधार दिया और कार्यकर्ताओं की कई पीढ़ियों को तैयार किया। उनके नेतृत्व में भाजपा ने राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत को अपनी राजनीतिक पहचान बनाया।

आडवाणी के जीवन के सौवें वर्ष में प्रवेश पर जताई खुशी

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना लेख साझा करते हुए लिखा कि 8 नवंबर को आडवाणी अपने जीवन के सौवें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने इस अवसर को खास बताते हुए कहा कि इसी दिन दीपावली का पावन पर्व भी मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने इसे प्रभु श्रीराम और दीपोत्सव से जुड़ा यादगार संयोग बताया। उन्होंने जनसंघ की स्थापना के 75 वर्ष, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती का भी उल्लेख किया।

आडवाणी को अपना राजनीतिक मार्गदर्शक मानते हैं पीएम मोदी

प्रधानमंत्री ने लेख में आडवाणी के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें हमेशा उनका स्नेह, मार्गदर्शन और साथ मिलता रहा है। सार्वजनिक जीवन के शुरुआती दिनों में आडवाणी से मुलाकात हुई थी और धीरे-धीरे यह रिश्ता बेहद आत्मीय बन गया। पीएम मोदी के मुताबिक, आडवाणी ने उन्हें राजनीति की बारीकियां समझाईं और कठिन परिस्थितियों में सही रास्ता दिखाया। आज भी उनसे मुलाकात नई ऊर्जा और प्रेरणा देती है। उन्होंने आडवाणी के अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना भी की।

विभाजन की पीड़ा से लेकर भाजपा के निर्माण तक का सफर

पीएम मोदी ने बताया कि आडवाणी का जन्म 8 नवंबर 1927 को हुआ था। वर्ष 1947 में भारत विभाजन के दौरान उन्हें सिंध में अपना घर और परिचित परिवेश छोड़ना पड़ा। हालांकि, इस कठिन अनुभव के बावजूद उन्होंने कभी निराशा या कड़वाहट को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। प्रधानमंत्री के अनुसार, विपरीत परिस्थितियों में भी नए सिरे से शुरुआत करने का उनका संकल्प जनसंघ और बाद में भाजपा के निर्माण में दिखाई दिया। भाजपा अध्यक्ष के रूप में उन्होंने संगठन को विस्तार दिया और नई पीढ़ी के नेताओं को तैयार किया।

वैचारिक स्पष्टता और संगठनात्मक क्षमता की तारीफ

प्रधानमंत्री ने आडवाणी के व्यक्तित्व की दो प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख किया। पहली उनकी वैचारिक स्पष्टता और बौद्धिक क्षमता थी, जिसकी झलक उनके भाषणों, लेखों और राजनीतिक विचारों में दिखाई देती थी। दूसरी विशेषता राजनीतिक मुद्दों पर उनका स्पष्ट और निर्भीक दृष्टिकोण था। मोदी ने कहा कि आडवाणी ने अपने विचारों के माध्यम से देश के राजनीतिक विमर्श को प्रभावित किया और पार्टी को मजबूत वैचारिक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

अटल बिहारी वाजपेयी और आडवाणी की जोड़ी को बताया मिसाल

पीएम मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और आडवाणी के लंबे राजनीतिक संबंधों को भारतीय राजनीति की अनूठी मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने दशकों तक कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। राजनीतिक परिस्थितियां बदलने और अलग-अलग चुनौतियां आने के बावजूद उनके बीच विश्वास और सम्मान कायम रहा। मोदी के अनुसार, अटल जी हमेशा आडवाणी के नेता और मार्गदर्शक रहे। दोनों का आपसी सहयोग आज भी राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणादायक है।

जनसंघ से संसद तक आडवाणी का राजनीतिक सफर

प्रधानमंत्री ने बताया कि दिल्ली आने के बाद आडवाणी ने जनसंघ को मजबूत बनाने के लिए खुद को समर्पित कर दिया था। वर्ष 1967 में वे दिल्ली महानगर परिषद के अध्यक्ष बने। इसके बाद 1970 के दशक में उनकी संसदीय यात्रा शुरू हुई। उन्होंने लोकसभा और राज्यसभा में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। विपक्ष में रहते हुए और सरकार में जिम्मेदारी संभालते हुए भी उन्होंने संसदीय परंपराओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखी। पीएम मोदी ने 1991 के लोकसभा चुनाव का भी उल्लेख किया, जब आडवाणी गांधीनगर से चुनाव मैदान में उतरे थे। उस दौरान मोदी ने उनके चुनाव अभियान और नामांकन प्रक्रिया में सहयोग किया था।

आपातकाल के खिलाफ लोकतंत्र की रक्षा में निभाई भूमिका

मोदी ने आपातकाल को आडवाणी के राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1975 में आपातकाल के दौरान आडवाणी लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के संघर्ष में आगे रहे। इस दौर के अनुभवों का उल्लेख उनकी पुस्तक ‘A Prisoner’s Scrap-Book’ में भी मिलता है। प्रधानमंत्री ने उनकी पुस्तक के अध्याय ‘A Tale of Two Emergencies’ का जिक्र करते हुए बताया कि इसमें भारत के आपातकाल और जर्मनी में हिटलर के शासनकाल की घटनाओं के बीच समानताओं का विश्लेषण किया गया है।

गृह मंत्री और उपप्रधानमंत्री के रूप में अहम योगदान

प्रधानमंत्री ने आडवाणी की प्रशासनिक क्षमता की भी सराहना की। वर्ष 1977 में जनता सरकार के दौरान उन्हें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली थी। बाद में गृह मंत्री और उपप्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आतंकवाद के खिलाफ उनके सख्त रुख और सुरक्षा बलों के कल्याण के लिए किए गए प्रयासों को भी मोदी ने याद किया।

सोमनाथ से अयोध्या तक रथयात्रा का किया उल्लेख

लालकृष्ण आडवाणी की सोमनाथ से अयोध्या तक निकाली गई रथयात्रा को पीएम मोदी ने उनके जीवन का ऐतिहासिक अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि इस यात्रा की योजना और तैयारियों से लेकर इसके संचालन तक उन्हें भी जुड़ने का अवसर मिला था। बिहार में आडवाणी की गिरफ्तारी और उस समय भाजपा के राजनीतिक फैसलों को याद करते हुए मोदी ने कहा कि पार्टी ने राम मंदिर के संकल्प पर अपना रुख स्पष्ट रखा। उन्होंने अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण को उस लंबे संघर्ष की ऐतिहासिक परिणति बताया।

सादगी, अध्ययन और भारतीय संस्कृति से जुड़ाव

पीएम मोदी ने आडवाणी की सादगी, ईमानदारी और पढ़ने की आदत का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि आडवाणी अखबारों को बेहद ध्यान से पढ़ते थे और सिनेमा, रंगमंच तथा इतिहास में भी उनकी गहरी रुचि रही है। उनकी पुस्तक ‘My Country My Life’ में उनके अनुभवों और विचारों की झलक मिलती है। प्रधानमंत्री ने सिंधी संस्कृति से उनके जुड़ाव और सिंधु दर्शन पूजा को लोकप्रिय बनाने में उनकी भूमिका को भी याद किया। इस दौरान उन्होंने कमला आडवाणी के योगदान का उल्लेख करते हुए उन्हें आडवाणी की सबसे बड़ी ताकत और संबल बताया।

भारत रत्न से सम्मानित हुए आडवाणी, पीएम ने की दीर्घायु की कामना

प्रधानमंत्री ने लेख के अंत में कहा कि कराची में पले-बढ़े आडवाणी ने अपने जीवन में एक असाधारण राजनीतिक यात्रा तय की है। देश के प्रति उनके योगदान को देखते हुए वर्ष 2024 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया। मोदी ने कहा कि आडवाणी का जीवन संघर्ष, समर्पण, वैचारिक प्रतिबद्धता और सार्वजनिक सेवा का उदाहरण है। उनके जीवन के सौवें वर्ष में प्रवेश करने पर प्रधानमंत्री ने ईश्वर से उनके उत्तम स्वास्थ्य और लंबी आयु की प्रार्थना की तथा उम्मीद जताई कि वे आगे भी देशवासियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे।

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