कांग्रेस में जिलाध्यक्ष की कुर्सी के लिए टेस्ट जरूरी, हरियाणा में नई चयन प्रक्रिया

चंडीगढ़. हरियाणा कांग्रेस में संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर पार्टी हाईकमान ने अब सिफारिश और गुटबाजी के प्रभाव को सीमित करने की तैयारी कर ली है। जिलाध्यक्ष की नियुक्ति के लिए नेताओं को अब केवल राजनीतिक पकड़ और वरिष्ठ नेताओं की पैरवी के भरोसे नहीं रहना होगा, बल्कि तय प्रक्रिया के तहत अपनी योग्यता और संगठनात्मक अनुभव का ब्योरा भी देना होगा। नई व्यवस्था का पहला प्रयोग हिसार जिलाध्यक्ष के चयन में किया जाएगा। इसके बाद पार्टी इसे अन्य जिलों में भी लागू करने की तैयारी में है। इसके तहत जिलाध्यक्ष पद के दावेदारों से तीन पन्नों का प्रोफार्मा भरवाया जाएगा,

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Published On :

अगस्त 24, 2026

चंडीगढ़.

हरियाणा कांग्रेस में संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर पार्टी हाईकमान ने अब सिफारिश और गुटबाजी के प्रभाव को सीमित करने की तैयारी कर ली है। जिलाध्यक्ष की नियुक्ति के लिए नेताओं को अब केवल राजनीतिक पकड़ और वरिष्ठ नेताओं की पैरवी के भरोसे नहीं रहना होगा, बल्कि तय प्रक्रिया के तहत अपनी योग्यता और संगठनात्मक अनुभव का ब्योरा भी देना होगा।

नई व्यवस्था का पहला प्रयोग हिसार जिलाध्यक्ष के चयन में किया जाएगा। इसके बाद पार्टी इसे अन्य जिलों में भी लागू करने की तैयारी में है। इसके तहत जिलाध्यक्ष पद के दावेदारों से तीन पन्नों का प्रोफार्मा भरवाया जाएगा, जिसमें 20 से अधिक सवाल होंगे। इसमें दावेदार से पूछा जाएगा कि वह कांग्रेस से कब जुड़ा, क्या कभी पार्टी छोड़कर किसी अन्य दल में गया, अब तक संगठन या पार्टी में किन-किन पदों पर जिम्मेदारी निभाई और उसका राजनीतिक एवं संगठनात्मक अनुभव क्या रहा।

प्रोफार्मा में दावेदार की जाति और उपजाति, इंटरनेट मीडिया पर सक्रियता एवं दक्षता समेत अन्य संगठनात्मक जानकारियां भी मांगी जाएंगी। इसका मकसद केवल नामों का पैनल तैयार करना नहीं, बल्कि दावेदारों की राजनीतिक पृष्ठभूमि और संगठन में उनकी सक्रियता का तुलनात्मक आकलन करना माना जा रहा है। बता दें कि हिसार के जिलाध्यक्ष बजरंग दास गर्ग हटाने से पहले स्वयं ही यह पद छोड़ चुके हैं, जबकि फरीदाबाद के जिला प्रधान बलजीत कौशिक को केंद्रीय पर्यवेक्षक ने पद से हटाने की घोषणा की है।

छह नामों का पैनल जाएगा हाईकमान के पास
नई प्रक्रिया के तहत केंद्रीय पर्यवेक्षक दावेदारों की जानकारी जुटाने के बाद छह नामों का पैनल तैयार करेंगे। यह पैनल कांग्रेस हाईकमान को भेजा जाएगा और अंतिम फैसला केंद्रीय स्तर पर होगा। यानी स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली नेताओं की सिफारिश के बजाय तय प्रक्रिया और हाईकमान के आकलन को प्राथमिकता मिलने की संभावना है। हिसार में यह जिम्मेदारी केंद्रीय पर्यवेक्षक अजय कुमार लल्लू को दी गई है। पंचकूला और फरीदाबाद में भी शहरी और ग्रामीण संगठन के लिए जिलाध्यक्षों का चयन किया जाना है। हांसी में भी जिलाध्यक्ष का फैसला होना बाकी है। इसके अलावा पांच ऐसे जिलाध्यक्षों को बदले जाने की तैयारी है, जिनका संगठनात्मक प्रदर्शन अपेक्षित नहीं माना गया है। प्रदेश प्रभारी संजय सतीशचंद्र दत्त इन जिलाध्यक्षों की रिपोर्ट केंद्रीय चयन समिति को अपनी संस्तुति के साथ भेज चुके हैं। प्रदेश में जिला कांग्रेस अध्यक्षों के चयन और संगठन की समीक्षा के लिए कांग्रेस ने चार केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं।

  • डा. एन रघुवीरा रेड्डी — आंध्र प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष
  • यशोमति ठाकुर — महाराष्ट्र की पूर्व मंत्री
  • उमंग सिंघार — मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष
  • अजय कुमार लल्लू — उत्तर प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष