Indore Crime News: इंदौर में भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़े एक मामले में लोकायुक्त ने बड़ी कार्रवाई की है। लोकायुक्त ने इंदौर क्राइम ब्रांच के तत्कालीन इंस्पेक्टर समेत चार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोप है कि एक युवक को कानूनी कार्रवाई से बचाने और उसे रिहा कराने के बदले आरोपियों ने कथित तौर पर 1.20 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। शिकायत और उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों की जांच के बाद लोकायुक्त ने 24 अगस्त को मामला दर्ज किया।
क्राइम ब्रांच कार्यालय से जुड़ा मामला
यह पूरा मामला इंदौर के रीगल स्क्वायर स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय से जुड़ा बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता प्रीति हजारी ने 2 अप्रैल 2026 को लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बेटे प्रांजल हजारी को एक शिकायत से संबंधित पूछताछ के लिए क्राइम ब्रांच बुलाया गया था। इसी दौरान मामले को खत्म करने और कानूनी कार्रवाई से बचाने के नाम पर कथित तौर पर पैसों की मांग की गई।
1.20 लाख रुपये मांगने का आरोप
शिकायत के अनुसार, रिश्वत की कुल रकम 1.20 लाख रुपये बताई गई थी। आरोप है कि इसमें से 50,800 रुपये 20 मार्च को दीपक पटेल नाम के एक निजी व्यक्ति को UPI के जरिए भेजे गए। इसके बाद कथित तौर पर बाकी 70 हजार रुपये नकद दिए गए। शिकायतकर्ता ने लोकायुक्त को इस लेन-देन से जुड़े तकनीकी साक्ष्य भी उपलब्ध कराए थे, जिनकी जांच कार्रवाई के दौरान की गई।
चार लोगों के खिलाफ दर्ज हुई FIR
लोकायुक्त की FIR में चार लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें क्राइम ब्रांच के तत्कालीन इंस्पेक्टर सुजीत श्रीवास्तव, तत्कालीन कॉन्स्टेबल अभय सिंह, विकास सेंधव और निजी व्यक्ति दीपक पटेल के नाम शामिल हैं। आरोप है कि सभी ने किसी न किसी स्तर पर युवक को कार्रवाई से बचाने के लिए मांगी गई रकम से जुड़े लेन-देन में भूमिका निभाई।
तकनीकी साक्ष्यों की जांच के बाद कार्रवाई
शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त अधिकारियों ने आरोपों की पुष्टि के लिए उपलब्ध जानकारी और तकनीकी साक्ष्यों की जांच की। जांच में प्रथम दृष्टया शिकायत में लगाए गए आरोपों को सही पाए जाने के बाद FIR दर्ज करने की कार्रवाई की गई। अब मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। जांच के दौरान अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों के बयान भी दर्ज किए जा सकते हैं।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस
आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 2018 की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 61(2) भी लगाई गई है। FIR दर्ज होने के बाद जांच एजेंसी अब कथित रिश्वत मांगने, रकम के लेन-देन और आरोपियों के बीच संपर्क की कड़ियों को खंगालेगी।
डिजिटल और वित्तीय रिकॉर्ड की होगी जांच
लोकायुक्त की जांच में UPI ट्रांजैक्शन समेत अन्य डिजिटल रिकॉर्ड महत्वपूर्ण हो सकते हैं। जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि 50,800 रुपये के ऑनलाइन भुगतान का वास्तविक लाभार्थी कौन था और नकद रकम से जुड़े आरोपों की पुष्टि कैसे होती है। इसके साथ ही आरोपियों के मोबाइल रिकॉर्ड, बैंकिंग जानकारी और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की भी जांच की जा सकती है।
हर आरोपी की भूमिका तय करने की कोशिश
लोकायुक्त अधिकारी आशुतोष मिठास ने बताया कि मामला रीगल स्क्वायर स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय से संबंधित है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। FIR के बाद जांच का मुख्य फोकस प्रत्येक आरोपी की भूमिका निर्धारित करने पर रहेगा। इसके लिए शिकायतकर्ता और संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जाएंगे तथा उपलब्ध दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों का मिलान किया जाएगा।
छतरपुर की घटना का भी जिक्र
इस मामले के बीच छतरपुर जिले के महाराजपुर थाना परिसर की एक अलग घटना भी चर्चा में है। वहां कथित तौर पर न्याय नहीं मिलने से परेशान एक युवती ने थाने में ही जहरीला पदार्थ खा लिया था। घटना के तुरंत बाद वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने युवती को इलाज के लिए स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया था। हालांकि, यह घटना इंदौर लोकायुक्त मामले से अलग है।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
इंदौर में FIR दर्ज होने के बाद अब लोकायुक्त की जांच आगे बढ़ेगी। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि कथित तौर पर रिश्वत की मांग किसके निर्देश पर हुई और रकम के लेन-देन में किसकी क्या भूमिका थी। फिलहाल आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है और अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
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