Telangana Ministers Salary Cut : मंत्रियों की सैलरी में 50% की भारी कटौती, तेलंगाना सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?

तेलंगाना की रेवंत रेड्डी सरकार ने वित्तीय संकट के बीच एक चौंकाने वाला कदम उठाया है। राज्य के मंत्रियों और विधायकों ने स्वेच्छा से अपनी सैलरी का 50% हिस्सा छोड़ने का फैसला किया है। इस पैसे का इस्तेमाल पिछले 10 वर्षों से लंबित सेवानिवृत्त कर्मचारियों के करोड़ों रुपये के बकाया पेंशन और फंड को चुकाने के लिए किया जाएगा। क्या यह कदम अन्य राज्यों के लिए भी मिसाल बनेगा?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 24, 2026

Telangana Ministers Salary Cut : तेलंगाना की राजनीति में एक ऐसा फैसला लिया गया है जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई दे रही है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने राज्य के मंत्रियों और विधायकों (MLAs) के वेतन में 50% की कटौती करने का साहसिक निर्णय लिया है। कैबिनेट की बैठक में लिए गए इस फैसले का मुख्य उद्देश्य राजकोषीय संसाधनों को उन बुजुर्गों के लिए जुटाना है, जिन्होंने दशकों तक राज्य की सेवा की है। हालांकि सरकार ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि वेतन में यह कटौती कितने महीनों तक जारी रहेगी, लेकिन इस कदम को सोशल मीडिया पर “त्याग और सुशासन” की मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।

10 साल का लंबा इंतजार खत्म: रिटायर्ड कर्मचारियों को मिलेगा उनका हक

तेलंगाना राज्य के गठन के बाद से ही हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारी अपनी पेंशन और अन्य बकाया राशि के लिए संघर्ष कर रहे थे। पिछले 10 वर्षों से यह फाइलें धूल फांक रही थीं और बुजुर्गों को अपने ही हक के पैसे के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे थे। आंकड़ों के मुताबिक, राज्य पर सेवानिवृत्त कर्मचारियों का लगभग 6,200 करोड़ रुपये का पेंशन बकाया है। रेवंत रेड्डी सरकार ने अब यह संकल्प लिया है कि वह अपने जनप्रतिनिधियों के वेतन में कटौती कर इस भारी भरकम राशि का भुगतान करेगी। इस फैसले से राज्य के हजारों बुजुर्गों और उनके परिवारों को बड़ी आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।

100 दिनों का लक्ष्य: युद्ध स्तर पर होगा बकाया राशि का भुगतान

सरकार ने केवल घोषणा ही नहीं की है, बल्कि इसके कार्यान्वयन के लिए एक सख्त समय सीमा भी निर्धारित की है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि अगले 100 दिनों के भीतर सभी लंबित पेंशन बकायों का भुगतान कर दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि वृद्धावस्था में जी रहे पूर्व कर्मचारियों को अब और इंतजार न करना पड़े। इस मिशन को पूरा करने के लिए प्रशासन को “मिशन मोड” में काम करने के निर्देश दिए गए हैं। यह पहल न केवल आर्थिक है, बल्कि नैतिक रूप से भी राज्य सरकार की छवि को मजबूत करने वाली मानी जा रही है।

विशेष कमेटी का गठन: रेवेन्यू रिसोर्सेस मोबेलाइजेशन कमेटी संभालेगी कमान

पेंशन भुगतान की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के लिए तेलंगाना सरकार ने एक उच्च स्तरीय विशेष कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी का नाम ‘रेवेन्यू रिसोर्सेस मोबेलाइजेशन कमेटी’ रखा गया है। इसकी अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क कर रहे हैं और इसमें कई वरिष्ठ मंत्रियों को शामिल किया गया है। इस कमेटी की मुख्य जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि संसाधनों का सही ढंग से आवंटन हो और तय समय के भीतर पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंच जाए, ताकि बिचौलियों या देरी की गुंजाइश न रहे।

राजनीतिक वार-पलटवार: पिछली सरकार की विफलताओं पर साधा निशाना

इस बड़े फैसले के साथ ही तेलंगाना में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है। मौजूदा कांग्रेस सरकार ने पूर्ववर्ती बीआरएस (BRS) सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पिछले 10 वर्षों में बुजुर्गों के हितों की अनदेखी की गई। सरकार का कहना है कि पिछली सरकार की गलत नीतियों के कारण हजारों कर्मचारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया था। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि अब बुजुर्गों को सचिवालय की सीढ़ियां नहीं चढ़नी होंगी। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि वह अपनी सुख-सुविधाओं में कटौती करके भी जनता के प्रति अपनी जवाबदेही को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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