Taskaree Review: नेटफ्लिक्स की नई सीरीज तस्करी दर्शकों को कस्टम और स्मगलिंग की खतरनाक दुनिया से रूबरू कराती है। अक्सर फ्लाइट में सफर करने वाले लोग कस्टम अधिकारियों की सख्त नजरों से घबराते हैं, भले ही उन्होंने कोई गलती न की हो। इस सीरीज में उसी डर और सच्चाई को बेहद दिलचस्प तरीके से दिखाया गया है। नीरज पांडे, जो अपने आप में एक ब्रांड हैं, ने इस विषय को नए अंदाज में पेश किया है। यह नेटफ्लिक्स की साल की पहली सीरीज है और शुरुआत ही धमाकेदार रही है।
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कहानी

सीरीज की कहानी तीन कस्टम अधिकारियों पर आधारित है जिन्हें पहले सस्पेंड कर दिया गया था। बाद में एक बड़े ऑपरेशन के लिए उन्हें फिर से विभाग में बुलाया जाता है। इसके बाद सामने आती है स्मगलिंग की दुनिया, जो दर्शकों को हैरान कर देती है। यह कहानी न केवल चौंकाती है बल्कि डर भी पैदा करती है, क्योंकि फ्लाइट का सफर हर किसी की जिंदगी का हिस्सा होता है। पूरी कहानी स्मगलर्स की चालाकियों और उनके नेटवर्क के इर्द-गिर्द घूमती है।
सीरीज की खासियत
सीरीज का एक डायलॉग – “अगर स्मगलर अपना दिमाग सही जगह लगाएं तो पूरी दुनिया की भुखमरी मिटा सकते हैं” – यह बताता है कि इस दुनिया में कितनी बुद्धिमत्ता और चालाकी छिपी है। यही दिमाग जब गलत दिशा में इस्तेमाल होता है तो दर्शकों को हैरानी और रोमांच दोनों का अनुभव होता है। पहले फ्रेम से ही सीरीज दर्शकों को बांध लेती है और तेजी से आगे बढ़ती है, बिल्कुल किसी ब्लॉकबस्टर फिल्म की तरह। हर किरदार को अहमियत दी गई है और हर अभिनेता को सही तरीके से इस्तेमाल किया गया है। एक सीन में जब चेकिंग के दौरान बंदर निकलता है तो दर्शक दंग रह जाते हैं कि आखिर क्या-क्या स्मगल किया जाता है।
सीरीज में कुल 7 एपिसोड हैं और हर एपिसोड लगभग 40–45 मिनट का है। यह सीरीज इतनी रोचक है कि दर्शक स्क्रीन से हट नहीं पाते। इस विषय पर इतनी गहराई से पहले कुछ नहीं बना, इसलिए यह सीरीज और भी खास लगती है।
अभिनय

इमरान हाशमी ने कस्टम ऑफिसर के किरदार में शानदार और संतुलित परफॉर्मेंस दी है। उन्होंने बिना हीरोपंती और डायलॉगबाजी के किरदार को वास्तविकता के साथ निभाया है। शरद केलकर बड़े चौधरी के किरदार में दमदार लगे और उतना ही किया जितना जरूरी था। नंदीश संधू ने साबित किया कि टीवी से निकलकर उन्होंने सही दिशा पकड़ी है। जोया अफरोज एयर होस्टेस के किरदार में बेहद आकर्षक लगीं और उनका काम शानदार रहा। अम्रुता खानवलिकर ने एक्शन दृश्यों में बेहतरीन प्रदर्शन किया। अनुराग सिन्हा ने भी प्रभावित किया, जबकि जमील खान छोटे रोल में भी असर छोड़ते हैं। बाकी कलाकारों ने भी अपने किरदारों को पूरी तरह निभाया और कहानी को मजबूती दी।
लेखन और निर्देशन
नीरज पांडे और विपुल के रावल ने सीरीज को लिखा है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। कहानी न केवल मनोरंजन करती है बल्कि दर्शकों की जानकारी भी बढ़ाती है। नीरज पांडे का निर्देशन बेहद सटीक है। उन्होंने हीरो को चमकाने के बजाय कहानी को केंद्र में रखा और उसे प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया।










