Tarun Tejpal Case: 2013 रेप केस में बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, दुष्कर्म मामले में 10 साल की सजा

तरुण तेजपाल 2013 रेप केस में बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले ने सबका ध्यान खींचा है। दुष्कर्म मामले में सजा और कानूनी प्रक्रिया को लेकर कई सवाल सामने आए हैं। जानिए कोर्ट के निर्णय की पूरी जानकारी, मामले की पृष्ठभूमि और आगे की संभावित कार्रवाई।

Tarun Tejpal Case

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 6, 2026

Tarun Tejpal Case:  बॉम्बे हाई कोर्ट ने वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को वर्ष 2013 के चर्चित दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास (Rigorous Imprisonment) की सजा सुनाई है। यह मामला उनकी एक जूनियर सहयोगी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है। अदालत ने सजा सुनाते समय दोनों पक्षों की दलीलों पर विस्तार से विचार किया और उसके बाद अपना फैसला सुनाया। इस फैसले को लंबे समय से लंबित इस मामले में एक महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय माना जा रहा है।

बचाव पक्ष ने कम सजा की मांग की

सजा पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा ने अदालत को बताया कि तरुण तेजपाल के खिलाफ इस मामले के अलावा कोई अन्य आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। उन्होंने दलील दी कि यह उनका पहला अपराध है और कथित घटना वर्ष 2013 की है। इसके अलावा, वर्ष 2022 से उनकी अपील लंबित थी और इस दौरान वह जमानत पर रहे। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि तेजपाल ने कभी भी जमानत की शर्तों का उल्लंघन नहीं किया तथा उनका पासपोर्ट भी संबंधित अधिकारियों के पास जमा है। इन तथ्यों के आधार पर अदालत से न्यूनतम सजा देने का अनुरोध किया गया।

सरेंडर के लिए मांगा आठ सप्ताह का समय

सुनवाई के दौरान तरुण तेजपाल ने अदालत से सरेंडर करने के लिए आठ सप्ताह का समय देने की भी प्रार्थना की। उन्होंने अदालत के समक्ष यह भी कहा कि वह राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार हुए हैं। अदालत ने उनकी इस दलील को भी रिकॉर्ड पर लिया और अन्य पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पूरे मामले पर विचार किया।

सरकार ने अधिकतम सजा की वकालत की

सॉलिसिटर जनरल (SG) ने अदालत में पीड़िता की ओर से पक्ष रखते हुए कहा कि आरोपी पीड़िता के लिए एक अभिभावक जैसी स्थिति में था। ऐसे में उस पर अधिक जिम्मेदारी थी, लेकिन उसने अपने पद और विश्वास का दुरुपयोग किया। उन्होंने अदालत से अधिकतम सजा देने की मांग करते हुए कहा कि आरोपी को अपने कृत्य पर कोई पछतावा नहीं था। इतना ही नहीं, पीड़िता द्वारा स्पष्ट रूप से मना किए जाने के बावजूद उसने अपराध दोहराया, जिसे गंभीर परिस्थिति माना जाना चाहिए।

कोर्ट ने फैसले में क्या कहा

अपने आदेश में बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि यह घटना लगभग 13 वर्ष पुरानी है। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि इस घटना के बाद से आरोपी के खिलाफ किसी अन्य प्रकार के दुराचार या आपराधिक आरोप की कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि ऐसा प्रतीत होता है कि दोनों पक्ष अपने-अपने जीवन में आगे बढ़ चुके हैं। हालांकि, अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और कानून के आधार पर दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए निर्धारित सजा सुनाई।

इन धाराओं के तहत सुनाई गई सजा

अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376(2)(f) के तहत तरुण तेजपाल को 10 वर्ष के कठोर कारावास और 5 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। इसी प्रकार धारा 376(2)(k) के तहत भी 10 वर्ष के कठोर कारावास और 5 लाख रुपये के जुर्माने का आदेश दिया गया। इसके अलावा धारा 354 के तहत एक वर्ष का कठोर कारावास और 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया। वहीं धारा 354A के तहत भी एक वर्ष के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई गई। अदालत के इस फैसले के बाद लंबे समय से चर्चा में रहे इस मामले का एक महत्वपूर्ण कानूनी पड़ाव पूरा हो गया।

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