Tamil Nadu floor test : अन्नाद्रमुक में बड़ी बगावत, बागी नेताओं पर ईपीएस ने की बड़ी कार्रवाई

तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। सीएम जोसेफ विजय के फ्लोर टेस्ट के दौरान अन्नाद्रमुक दो फाड़ हो गई। एसपी वेलुमणि और सीवी शनमुगम के नेतृत्व में 30 विधायकों ने बगावत कर सरकार का साथ दिया। गुस्से में आए ईपीएस ने कई दिग्गजों को पदों से हटा दिया है। क्या पार्टी बचेगी?

Tamil Nadu floor test

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 14, 2026

Tamil Nadu floor test : तमिलनाडु विधानसभा में आज हुए फ्लोर टेस्ट (विश्वास मत) ने राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। टीवीके (TVK) के पक्ष में मतदान करने के फैसले ने प्रमुख विपक्षी दल एआईएडीएमके (अन्नाद्रमुक) के भीतर छिपी गुटबाजी को सतह पर ला दिया है। सदन के भीतर हुई इस वोटिंग के दौरान पार्टी के कई दिग्गज चेहरों ने पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया, जिसे अनुशासनहीनता का चरम माना जा रहा है। इस घटनाक्रम ने न केवल सरकार की स्थिरता बल्कि विपक्ष की एकजुटता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बगावत आने वाले चुनावों में पार्टी के भविष्य को प्रभावित कर सकती है।

बागी दिग्गजों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई: छीने गए पार्टी पद

पार्टी के आदेश (व्हिप) का उल्लंघन करने पर अन्नाद्रमुक नेतृत्व ने कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी के महासचिव ई. पलानीसामी (ईपीएस) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बागी गुट के प्रमुख नेताओं—सी. वी. शनमुगम, एस. पी. वेलुमणि और सी. विजयबास्कर को उनके संगठनात्मक पदों से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। पार्टी की ओर से जारी बयान में स्पष्ट किया गया है कि पार्टी अनुशासन से ऊपर कोई नहीं है और विश्वासघात करने वालों के लिए संगठन में कोई स्थान नहीं है। इस फैसले को पार्टी के भीतर ईपीएस की पकड़ मजबूत करने और अन्य विधायकों को कड़ा संदेश देने के तौर पर देखा जा रहा है।

सी. वी. शनमुगम का पलटवार: पार्टी नेतृत्व पर लगाए गंभीर आरोप

पदों से हटाए जाने के बाद पूर्व मंत्री और दिग्गज नेता सी. वी. शनमुगम ने मौन तोड़ने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर एक बड़ा वर्ग उन नेताओं की वापसी चाहता है जिन्हें निष्कासित किया गया था, ताकि संगठन को मजबूती मिल सके। ईपीएस पर निशाना साधते हुए शनमुगम ने कहा, “मैंने कोई विश्वासघात नहीं किया है। हमारी पार्टी का जन्म ही डीएमके के विरोध के लिए हुआ था।” उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान नेतृत्व मुख्यमंत्री पद के लालच में अम्मा (जयललिता) के सिद्धांतों को भूल गया है। उन्होंने भावुक होते हुए याद दिलाया कि जयललिता को डीएमके के झूठे मुकदमों के कारण जेल जाना पड़ा था, जिसे वर्तमान नेतृत्व ने सत्ता के लिए भुला दिया है।

अन्नाद्रमुक में दो फाड़: 30 विधायकों ने सरकार का दिया साथ

विधानसभा के भीतर की स्थिति काफी तनावपूर्ण रही। वरिष्ठ नेता एस. पी. वेलुमणि और सी. वी. शनमुगम के नेतृत्व में अन्नाद्रमुक के लगभग 30 विधायकों के एक बड़े धड़े ने सरकार का समर्थन कर सबको चौंका दिया। यह धड़ा पार्टी नेतृत्व के वर्तमान फैसलों से असंतुष्ट नजर आ रहा है। दूसरी ओर, पलानीसामी के प्रति निष्ठा रखने वाले विधायकों ने सदन में सरकार के खिलाफ मतदान किया। इस विभाजन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अन्नाद्रमुक अब वैचारिक और संगठनात्मक रूप से दो हिस्सों में बंट चुकी है, जहां एक पक्ष सत्ता के करीब दिख रहा है और दूसरा कड़े विरोध की राजनीति पर अड़ा है।

दलबदल विरोधी कानून और भविष्य की कानूनी लड़ाई

पलानीसामी गुट ने बागी विधायकों को पहले ही चेतावनी दी थी कि व्हिप का उल्लंघन करने वालों पर दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि अब यह मामला विधानसभा अध्यक्ष के पाले में जा सकता है, जहां इन विधायकों की सदस्यता पर तलवार लटक रही है। वहीं, बागी गुट का तर्क है कि वे पार्टी के मूल सिद्धांतों को बचाने के लिए लड़ रहे हैं। तमिलनाडु की जनता अब यह देख रही है कि अम्मा की विरासत का असली हकदार कौन है। आने वाले दिनों में यह विवाद अदालतों और चुनाव आयोग के गलियारों तक पहुंचना तय माना जा रहा है।