कांग्रेस में भीतरघात की चर्चा तेज, तीसरी राज्यसभा सीट जीतने की रणनीति में जुटी BJP

भोपाल  मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव की तस्वीर दो सीटों पर लगभग साफ हो चुकी है, लेकिन तीसरी सीट को लेकर सियासी हलचल लगातार बढ़ते जा रही है। भाजपा ने जहां अपने दो उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं, वहीं पार्टी ने चार नामांकन फॉर्म लेकर राजनीतिक गलियारों में नई अटकलों को जन्म दे दिया है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि भाजपा तीसरी सीट पर भी कोई बड़ा दांव चल सकती है। जानकारी के अनुसार, प्रदेश नेतृत्व को भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के फैसले का इंतजार है। इसके बाद पार्टी तय करेंगी कि तीसरी सीट पर पार्टी सीधे उम्मीदवार

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Published On :

जून 7, 2026

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भोपाल 

मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव की तस्वीर दो सीटों पर लगभग साफ हो चुकी है, लेकिन तीसरी सीट को लेकर सियासी हलचल लगातार बढ़ते जा रही है। भाजपा ने जहां अपने दो उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं, वहीं पार्टी ने चार नामांकन फॉर्म लेकर राजनीतिक गलियारों में नई अटकलों को जन्म दे दिया है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि भाजपा तीसरी सीट पर भी कोई बड़ा दांव चल सकती है। जानकारी के अनुसार, प्रदेश नेतृत्व को भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के फैसले का इंतजार है। इसके बाद पार्टी तय करेंगी कि तीसरी सीट पर पार्टी सीधे उम्मीदवार उतारेगी या फिर किसी निर्दलीय प्रत्याशी को समर्थन देकर चुनावी मुकाबले को रोचक बनाएगी। इन अटकलों के बीच कांग्रेस ने भी विधायकों को एकजुट करने बैठक बुलाई है।  

मीनाक्षी नटराजन की एंट्री के बाद बदला समीकरण
कांग्रेस द्वारा मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने के बाद भाजपा के लिए तीसरी सीट पर रणनीति बनाने की संभावनाएं और बढ़ गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस ने कमलनाथ या दिग्विजय सिंह जैसे बड़े नेताओं को मैदान में उतारा होता तो भाजपा शायद अतिरिक्त जोखिम लेने से बचती। मीनाक्षी नटराजन के नाम की घोषणा के बाद अब भाजपा के भीतर तीसरी सीट पर चुनावी गणित साधने की कवायद तेज हो गई है। पार्टी के रणनीतिकार कांग्रेस के भीतर संभावित असंतोष और क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं का भी आकलन कर रहे हैं। 

आदिवासी चेहरे पर भी विचार
सूत्र बताते हैं कि भाजपा तीसरी सीट के लिए किसी आदिवासी चेहरे को आगे बढ़ाने के विकल्प पर भी गंभीरता से विचार कर रही है। प्रदेश में आदिवासी राजनीति का बढ़ता महत्व और आगामी चुनावों को देखते हुए यह फैसला राजनीतिक रूप से बड़ा संदेश देने वाला हो सकता है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि भाजपा किसी निर्दलीय उम्मीदवार को मैदान में उतारकर पर्दे के पीछे से समर्थन दे सकती है और चुनावी समीकरणों को अपने पक्ष में मोड़ने का प्रयास करेगी। 

क्या कहता है चुनावी गणित?
विधानसभा में वर्तमान में 228 सदस्य मतदान के पात्र हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 57 वोटों की आवश्यकता है। भाजपा के पास 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 63  विधायक हैं। दो सीटों पर अपने उम्मीदवारों को निर्वाचित कराने के बाद भाजपा के पास लगभग 50 वोट बचेंगे। ऐसे में तीसरी सीट जीतने के लिए उसे अतिरिक्त सात वोटों की जरूरत होगी। यही वजह है कि कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग की आशंका और भाजपा की संभावित रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हैं।

8 जून तक बना रह सकता है सस्पेंस
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि भाजपा फिलहाल सभी विकल्पों पर विचार कर रही है और अंतिम फैसला नामांकन की अंतिम तिथि के आसपास लिया जा सकता है। ऐसे में 8 जून तक तीसरी राज्यसभा सीट को लेकर सस्पेंस बने रहने की पूरी संभावना है। फिलहाल इतना तय है कि दो सीटों का चुनाव भले ही औपचारिक नजर आ रहा हो, लेकिन तीसरी सीट को लेकर पर्दे के पीछे राजनीतिक बिसात पूरी तरह बिछ चुकी है। 

मंत्री के बयान से गर्माई सियासत
प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुंचे लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने पार्टी के घोषित उम्मीदवारों पर भरोसा जताते हुए कहा कि भाजपा ने ऐसे प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है, जिन्होंने जमीन पर रहकर संगठन के लिए लंबे समय तक काम किया है। राज्यसभा की संभावित तीसरी सीट पर भाजपा उम्मीदवार उतारने की अटकलों के बीच जब उनसे सवाल किया गया तो उन्होंने रहस्यमयी अंदाज में जवाब दिया। राकेश सिंह ने कहा, "आपसे किसने कहा कि हम प्रत्याशी उतार रहे हैं, और यह भी किसने कहा कि हम प्रत्याशी नहीं उतार रहे हैं। समय का इंतजार कीजिए।" वहीं कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान पर टिप्पणी करते हुए राकेश सिंह ने कहा कि कांग्रेस की कलह उनका आंतरिक मामला है, लेकिन उनकी स्थिति किसी से छिपी नहीं है।

 

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