Taiwan China Conflict: ताइवान का चीन को कड़ा जवाब, झुकेंगे नहीं, रक्षा के लिए तैयार

आसमान में चीनी लड़ाकू विमान और समंदर में घेराबंदी! क्या ताइवान पर ड्रैगन का कब्जा अब बस कुछ समय की बात है? राष्ट्रपति लाई चिंग-ते के उस एक गुप्त आदेश ने चीन के वार रूम में खलबली मचा दी है, जिसमें उन्होंने ताइवान की सेना को 'अंतिम प्रहार' के लिए तैयार रहने को कहा है। आखिर क्या है ताइवान का वो 'पोर्क्युपाइन' डिफेंस?

Taiwan China Conflict

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 10, 2026

Taiwan China Conflict: ताइवान और चीन के बीच चल रहा गतिरोध अब एक नए और अधिक आक्रामक मोड़ पर पहुँच गया है। ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने स्पष्ट और कड़े शब्दों में बीजिंग को चेतावनी दी है कि वे अपने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी प्रकार का विदेशी दखल बर्दाश्त नहीं करेंगे। ‘फोकस ताइवान’ की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति लाई ने सेना के कमांडर-इन-चीफ के रूप में राष्ट्र को संबोधित करते हुए कसम खाई कि वे हर कीमत पर ताइवान की सुरक्षा और अपने नागरिकों के जान-माल की रक्षा करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि ताइवान चीन के किसी भी सैन्य या कूटनीतिक दबाव के आगे घुटने नहीं टेकेगा और चीनी प्रभाव को द्वीप तक पहुँचने से हर संभव तरीके से रोका जाएगा।

“हम चीन का हिस्सा नहीं”: ऐतिहासिक और राजनीतिक दावों का खंडन

राष्ट्रपति लाई ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण संबोधन में कहा कि चीन द्वारा सीमा पार से ताइवान के लोगों पर बनाया जा रहा निरंतर दबाव इस वास्तविकता को नहीं बदल सकता कि बीजिंग की सत्ता ताइवान पर लागू नहीं होती। उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (PRC) और रिपब्लिक ऑफ चाइना (ROC – ताइवान) दो अलग-अलग निकाय हैं और एक-दूसरे के अधीन नहीं हैं। इस दौरान उन्होंने जापानी सांसद हे सेकी की ताइवान यात्रा का भी उल्लेख किया, जिन्हें चीन ने प्रतिबंधित कर रखा है। राष्ट्रपति के अनुसार, ऐसी अंतरराष्ट्रीय यात्राएं और ताइवान का स्वतंत्र अस्तित्व यह साबित करता है कि ताइवान एक संप्रभु राष्ट्र है, न कि किसी अन्य देश का हिस्सा।

अमेरिकी थिंक टैंक की चेतावनी: युद्ध में मारे जा सकते हैं 1 लाख चीनी सैनिक

ताइवान की सैन्य तैयारियों के बीच एक अमेरिकी थिंक टैंक ‘जर्मन मार्शल फंड’ की रिपोर्ट ने वैश्विक स्तर पर चर्चा छेड़ दी है। इस रिपोर्ट, जिसका शीर्षक “If China Attacks Taiwan” है, में दावा किया गया है कि यदि बीजिंग ताइवान पर पूर्ण स्तर का सैन्य हमला करता है, तो उसे भारी कीमत चुकानी होगी। आकलन के अनुसार, इस संभावित युद्ध में करीब 1 लाख चीनी सैनिक मारे जा सकते हैं। यह रिपोर्ट चीन के लिए एक बड़ी चेतावनी के रूप में देखी जा रही है, क्योंकि इसमें न केवल सैन्य जनहानि बल्कि चीन के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रणनीतिक नुकसान का भी विस्तृत विवरण दिया गया है।

सैन्य अभ्यास से शांति संभव नहीं: बीजिंग की घुसपैठ पर प्रहार

चीन पिछले कई महीनों से ताइवान जलडमरूमध्य में लगातार युद्धक विमानों और जहाजों के जरिए घुसपैठ कर रहा है। राष्ट्रपति लाई ने उम्मीद जताई कि चीनी नेतृत्व यह समझेगा कि ताइवान को डराने के उद्देश्य से किए जा रहे ये सैन्य अभ्यास शांति स्थापित करने का मार्ग नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ताइवान को निशाना बनाकर किए जाने वाले इन आक्रामक कदमों से चीन कभी भी अपने विस्तारवादी लक्ष्यों को हासिल नहीं कर पाएगा। बल्कि, ये हरकतें ताइवानी जनता के बीच स्वायत्तता की भावना को और अधिक मजबूत कर रही हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन की छवि एक हमलावर देश की बन रही है।

युद्ध का भविष्य और ताइवान के द्वीपों की सुरक्षा

थिंक टैंक की रिपोर्ट में यह भी आशंका जताई गई है कि यद्यपि चीन को अंततः पीछे हटना पड़ सकता है, लेकिन वह शुरुआती संघर्ष में ताइवान के किनमेन और मत्सू द्वीपों पर कब्जा करने की कोशिश कर सकता है। रिपोर्ट में ‘बड़े युद्ध’ से लेकर ‘सीमित संघर्ष’ तक की विभिन्न स्थितियों का विश्लेषण किया गया है। राष्ट्रपति लाई का मानना है कि ताइवान की सेना आधुनिक हथियारों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के साथ किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है। आने वाले दिन इस क्षेत्र की स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाले हैं।

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