West Bengal Loudspeaker Ban: पश्चिम बंगाल के नौवें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करने के बाद सुवेंदु अधिकारी अपनी कार्यशैली से स्पष्ट कर चुके हैं कि वे राज्य में शासन का एक नया मानक स्थापित करने के लिए तैयार हैं। सोमवार को राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के साथ अपनी पहली औपचारिक बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर अपनी भावी रणनीति और प्राथमिकताओं को सार्वजनिक किया।
धार्मिक स्थलों पर ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण
मुख्यमंत्री ने पुलिस प्रशासन को सख्त हिदायत दी है कि राज्य में शांति और सार्वजनिक अनुशासन बनाए रखने के लिए धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के उपयोग को नियंत्रित किया जाए। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, किसी भी धार्मिक स्थल से निकलने वाली आवाज परिसर की सीमा से बाहर नहीं जानी चाहिए। इसके अलावा, सड़कों पर होने वाली ऐसी किसी भी प्रार्थना सभा या मजहबी आयोजन पर रोक लगा दी गई है जो सामान्य यातायात और जनता के लिए व्यवधान पैदा करती हो। नागरिक समाज के विभिन्न धार्मिक गुरुओं ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे आधुनिक सभ्य समाज के लिए एक आवश्यक कदम बताया है।
अवैध गतिविधियों पर कड़ा प्रहार
प्रशासनिक गलियारों में सुवेंदु अधिकारी के इन फैसलों की तुलना उत्तर प्रदेश के ‘योगी मॉडल’ से की जा रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि बंगाल में अब अवैध कोयला खनन, रेत उत्खनन और पशु तस्करी जैसे संगठित अपराधों के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने पुलिस बल को निर्देश दिया है कि वे इन सिंडिकेट्स के खिलाफ कड़े से कड़े कानून का उपयोग करें। साथ ही, राज्य में अवैध हथियारों की बरामदगी और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वालों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं के तहत तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
चुनावी हिंसा के विरुद्ध न्यायिक सक्रियता
राजनीतिक हिंसा के पीड़ितों के लिए न्याय सुनिश्चित करना मुख्यमंत्री की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है। अधिकारी ने 2021 और 2024 के विधानसभा व लोकसभा चुनावों के बाद हुई हिंसा, जबरन वसूली और गुंडागर्दी के मामलों को फिर से खोलने का आदेश दिया है। लगभग 1,300 से अधिक ऐसे मामले, जिन्हें पहले केवल ‘जीडी एंट्री’ के रूप में दर्ज कर छोड़ दिया गया था, अब उनकी गहन एफआईआर (FIR) जांच होगी। सरकार का उद्देश्य उन सभी दोषियों को सलाखों के पीछे पहुंचाना है जो राजनीतिक संरक्षण के कारण अब तक बचे हुए थे।
गौ-तस्करी रोकने हेतु कड़े नियामक निर्देश
मुख्यमंत्री ने सरकारी स्तर पर भी व्यापक बदलावों के संकेत दिए हैं। उन्होंने विभागीय सचिवों को आदेश दिया है कि पिछली सरकार के नारों, होर्डिंग्स और विज्ञापनों को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए। इसके अतिरिक्त, पशु तस्करी और अवैध बूचड़खानों पर लगाम लगाने के लिए नए नियम लागू किए गए हैं। अब 14 वर्ष से अधिक आयु के मवेशियों के परिवहन के लिए पशु चिकित्सा अधिकारी की अनुमति अनिवार्य होगी। मुख्यमंत्री ने संदेश दिया है कि नई सरकार में कानून का राज होगा और नियम सभी पर समान रूप से लागू होंगे।










