Suvendu Adhikari Government: धार्मिक स्थलों पर शोर किया तो सीधे जेल! मुख्यमंत्री का ‘फ्री हैंड’ और पुलिस का एक्शन, जानें नए नियम

पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार ने ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर नई गाइडलाइंस जारी की हैं। हाईकोर्ट के मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए पुलिस को खुली छूट दी गई है। अब धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में निर्धारित डेसिबल से अधिक आवाज होने पर कानूनी कार्रवाई और जब्ती की जाएगी।

Suvendu Adhikari Government

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

मई 13, 2026

Suvendu Adhikari Government: पश्चिम बंगाल की सत्ता में बड़े बदलाव के साथ ही प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई सरकार ने शपथ लेते ही जनहित में कड़े फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी में, राज्य सरकार ने ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution) के विरुद्ध निर्णायक युद्ध का ऐलान कर दिया है। बंगाल में अब सड़कों, सार्वजनिक स्थानों या किसी भी धार्मिक स्थल पर मनमर्जी से लाउडस्पीकर बजाना कानूनी मुसीबत को दावत देना होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि माननीय उच्च न्यायालय और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) के निर्देशों की अवहेलना करने वालों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

पुलिस प्रशासन को विशेष अधिकार

बताते चले कि, शुभेंदु सरकार ने गृह विभाग और पुलिस महानिदेशक को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि राज्य के सभी जिलों में ध्वनि नियंत्रण कानूनों (Noise Control Laws) को तत्काल प्रभाव से जमीन पर उतारा जाए। पुलिस बलों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे रिहायशी इलाकों और साइलेंस जोन में लाउडस्पीकर की आवाज की 24 घंटे निगरानी करें। सरकार ने साफ कर दिया है कि यदि कहीं भी निर्धारित डेसिबल सीमा का उल्लंघन पाया गया, तो पुलिस न केवल साउंड सिस्टम और लाउडस्पीकर जब्त करेगी, बल्कि संबंधित आयोजकों पर भारी जुर्माना और कानूनी मुकदमा भी दर्ज किया जाएगा।

बिना भेदभाव सभी पर लागू होंगे नियम

बताते चले कि, नई सरकार की ओर से जारी इस नई गाइडलाइन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी निष्पक्षता है। प्रशासन ने संदेश दिया है कि ध्वनि प्रदूषण गाइडलाइंस (Anti-Noise Guidelines) राज्य के हर नागरिक और संस्था पर समान रूप से लागू होंगी। चाहे मंदिर हो, मस्जिद हो, गुरुद्वारा हो या फिर कोई सामाजिक उत्सव—निर्धारित मानकों का पालन हर हाल में अनिवार्य है। सरकार का मानना है कि कानून की नजर में सभी बराबर हैं और सार्वजनिक शांति भंग करने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती। पुलिस को इन आदेशों के अनुपालन के लिए ‘फ्री हैंड’ दिया गया है ताकि कानून-व्यवस्था (Law and Order) को मजबूती मिले।

शांत वातावरण तैयार करने की बड़ी पहल

आपको बता दे कि, सरकार के इस फैसले के पीछे का मुख्य उद्देश्य छात्रों, बीमार व्यक्तियों और वरिष्ठ नागरिकों को शोर-शराबे से राहत दिलाना है। परीक्षाओं के समय ध्वनि विस्तारक यंत्रों (Sound Amplifiers) का शोर अक्सर छात्रों की एकाग्रता भंग करता है। शुभेंदु अधिकारी सरकार ने स्पष्ट किया है कि एक सभ्य समाज के निर्माण के लिए शांत वातावरण (Quiet Environment) का होना अत्यंत आवश्यक है। इस पहल के माध्यम से राज्य में कानून का इकबाल बुलंद करने की कोशिश की जा रही है, जिससे आम जनता को अनावश्यक शोर से स्थायी मुक्ति मिल सके।

तकनीकी निगरानी और जनता से अपील

आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल पुलिस मोहल्लों और सार्वजनिक स्थानों पर विशेष चेकिंग अभियान चलाएगी। इसके लिए पुलिस को साउंड लेवल मीटर (Sound Level Meters) जैसे आधुनिक यंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि मौके पर ही आवाज की तीव्रता मापी जा सके। राज्य सरकार ने जनता से भी अपील की है कि वे इन नियमों को अपनी सुरक्षा और शांति का हिस्सा समझें और प्रशासन का सहयोग करें। यह फैसला इस बात का सीधा संकेत है कि बंगाल में अब उच्च न्यायालय के आदेश (High Court Orders) और संवैधानिक नियमों का पालन ही सर्वोपरि होगा।

यह प्रशासनिक सुधार राज्य में ध्वनि प्रदूषण की वर्षों पुरानी समस्या को जड़ से खत्म करने की दिशा में शुभेंदु सरकार का एक साहसिक और ठोस कदम माना जा रहा है।