Suvendu Adhikari : पश्चिम बंगाल की राजनीतिक दिशा में एक ऐतिहासिक मोड़ आ चुका है। राज्य में सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बने अभी मात्र 12 दिन हुए हैं, लेकिन इस बेहद कम समय में ही शासन के तौर-तरीकों में आमूल-चूल बदलाव देखने को मिला है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कार्यभार संभालते ही पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ममता बनर्जी सरकार की कई प्रमुख नीतियों और योजनाओं को पूरी तरह से पलट दिया है। नई सरकार ने प्रशासनिक सुधार, महिला कल्याण, राष्ट्रीय सुरक्षा और भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार करने के उद्देश्य से 11 बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसले लिए हैं।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार
सुवेंदु सरकार ने राज्य की सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी पहचान को सुदृढ़ करने के लिए शिक्षा विभाग में बड़ा कदम उठाया है। सरकार के नए आदेश के अनुसार, अब पश्चिम बंगाल के सभी मदरसों में कक्षाएं शुरू होने से पहले होने वाली सुबह की प्रार्थना सभा में ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य कर दिया गया है। राज्य के मदरसा शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्देश दिया है। इससे पहले, बीती 13 मई को राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में भी वंदे मातरम् गाना अनिवार्य किया गया था।
महिला कल्याण के क्षेत्र में क्रांति
ममता बनर्जी सरकार की सबसे लोकप्रिय ‘लक्ष्मी भंडार योजना’ को बंद करके सुवेंदु सरकार ने अब ‘अन्नपूर्णा योजना’ की शुरुआत की है। इस नई व्यवस्था के तहत राज्य की 25 से 60 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं को हर महीने ₹3000 की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। यह सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों (जो कि पहचान पत्र से लिंक होंगे) में ट्रांसफर की जाएगी। इसके लिए 1 जून से आधिकारिक पोर्टल पर आवेदन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। हालांकि, इस योजना से सरकारी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और आयकर दाताओं को बाहर रखा गया है। इसके साथ ही, महिलाओं के लिए शहरी और ग्रामीण दोनों रूटों पर राज्य परिवहन की बसों में मुफ्त सफर की सौगात भी दी गई है।
स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा
स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ा फैसला लेते हुए पहली ही कैबिनेट बैठक में बंगाल के भीतर ‘आयुष्मान भारत योजना’ को हरी झंडी दे दी गई। इसके तहत पात्र परिवारों को सालाना ₹5 लाख तक का मुफ्त इलाज मिल सकेगा। वहीं राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सुवेंदु सरकार ने संवेदनशील ‘चिकन नेक कॉरिडोर’ (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) के 7 राष्ट्रीय राजमार्गों को केंद्र सरकार की एजेंसियों को सौंप दिया है ताकि भारतीय सेना और सुरक्षा बलों की आवाजाही बिना किसी बाधा के तेजी से हो सके। इसके अलावा, भारत-बांग्लादेश सीमा पर करीब 286 किलोमीटर लंबे हिस्से में फेंसिंग (बाड़ लगाने) का काम पूरा करने के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) को भूमि सौंपते हुए 45 दिनों का कड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
प्रशासनिक सुधार और भ्रष्टाचार पर वार
युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर देने के लिए राज्य सरकार ने सरकारी नौकरियों के लिए अधिकतम आयु सीमा में 5 वर्ष की छूट दी है। अब ग्रुप A के लिए 41 वर्ष, ग्रुप B के लिए 44 वर्ष और ग्रुप C-D के लिए सीमा 45 वर्ष होगी। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं के मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और PMLA के तहत मुकदमा चलाने की औपचारिक मंजूरी दे दी गई है, जिसकी जांच वर्तमान में CBI और ED कर रही है।
तुष्टिकरण का अंत
कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए सरकार ने 66 समुदायों (जैसे कुर्मी, तेली, यादव और कुछ मुस्लिम समूह) के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण के ढांचे को संशोधित कर 7% आरक्षण बहाल किया है। इसके साथ ही, साल 2011 से अब तक जारी हुए करीब 1.69 करोड़ जाति प्रमाण पत्रों (SC, ST, OBC) की दोबारा जांच (वेरिफिकेशन) के आदेश दिए गए हैं ताकि फर्जी दस्तावेजों को रद्द किया जा सके। सबसे अंत में, सरकार ने पूर्ववर्ती सरकार द्वारा चलाई जा रही सभी धर्म-आधारित और विशेष अनुदान योजनाओं को पूरी तरह बंद कर दिया है, ताकि प्रदेश का धर्म-निरपेक्ष और समान विकास सुनिश्चित किया जा सके।










