Suryakumar Yadav: सूर्यकुमार यादव के लिए नीली जर्सी तक का सफर आसान नहीं था। अपने 20 के दशक में IPL में कोलकाता नाइट राइडर्स और मुंबई इंडियंस के लिए लगातार रन बनाने और घरेलू क्रिकेट में मुंबई का मान बढ़ाने के बावजूद, उन्हें लंबे समय तक चयनकर्ताओं की बेरुखी झेलनी पड़ी। 2018 से 2020 के बीच जब वे हर सीजन 400-500 रन बना रहे थे, तब भी उन्हें नेशनल कैप के लिए इंतजार करना पड़ा। आखिरकार 30 साल की उम्र में पदार्पण करने वाले सूर्या ने अगले पांच वर्षों में वह सब देख लिया, जो खिलाड़ी एक दशक में देखते हैं।
डेब्यू का वह ऐतिहासिक शॉट
आपको बता दे कि, अहमदाबाद का यही मैदान था जहां मार्च 2021 में सूर्या को ईशान किशन के साथ अपना डेब्यू कैप मिला। पहले मैच में मौका न मिलने के बाद, तीसरे T20I में उन्होंने अपनी पहली ही गेंद पर जोफ्रा आर्चर को फाइन लेग के ऊपर से छक्का जड़कर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। विराट कोहली ने इसे ‘वीडियो गेम’ जैसी बल्लेबाजी करार दिया था। उस मैच में 31 गेंदों पर 57 रनों की पारी खेलकर सूर्या ने न केवल ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ का खिताब जीता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने आगमन का बिगुल भी फूँक दिया।
वनडे करियर का उतार-चढ़ाव
फरवरी 2022 में इसी मैदान पर सूर्या ने वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना पहला वनडे अर्धशतक (64 रन) जड़ा था। उस समय लगा कि वे खेल के इस प्रारूप में भी अपनी जगह पक्की कर लेंगे। हालांकि, आक्रामक खेलने के जोखिम भरे अंदाज और वनडे के लिहाज से जरूरी मानसिक धैर्य की कमी के कारण उनके प्रदर्शन में भारी गिरावट आने लगी। वे रनों के लिए संघर्ष करने लगे और विशेषज्ञों ने उनकी खेल की समझ पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
जब सूर्या का बल्ला और टीम इंडिया का सपना दोनों टूटे
अहमदाबाद के इसी स्टेडियम में 2023 के 50-ओवर विश्व कप फाइनल में सूर्या के करियर का सबसे निचला दौर आया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ धीमी पिच पर वे 28 गेंदों में महज 18 रन बना पाए। ‘डेथ ओवर्स’ में बड़े शॉट लगाने की उनकी बेबस कोशिशें और टेलएंडर्स को स्ट्राइक देने के फैसले ने उन्हें प्रशंसकों की आलोचना का केंद्र बना दिया। भारत वह फाइनल हार गया और सूर्या को वनडे टीम से अपनी जगह गँवानी पड़ी।
दक्षिण अफ्रीका से मिली हार के बाद टीम इंडिया का पलटवार
मौजूदा T20 विश्व कप के दौरान भी टीम को अहमदाबाद में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार ने टीम की स्पिन के खिलाफ कमजोरी को उजागर कर दिया। हालांकि, कप्तान सूर्या और प्रबंधन ने तुरंत रणनीति बदली। संजू सैमसन को ऊपरी क्रम में लाया गया और धीमी गेंदों के खिलाफ तकनीक सुधारी गई। फाइनल में भले ही सूर्या ‘गोल्डन डक’ का शिकार हुए, लेकिन उनकी कप्तानी में टीम इंडिया ने न्यूजीलैंड को हराकर खिताब अपने नाम किया। 35 वर्षीय सूर्या ने उसी मैदान पर ट्रॉफी उठाई जहाँ से उनका अंतरराष्ट्रीय सफर शुरू हुआ था।
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