Gujarat News: सूरत रेलवे स्टेशन पर भगदड़ जैसी स्थिति! गर्मी में तड़पे मजदूर, भीड़ संभालने के लिए पुलिस ने भांजी लाठियां

गुजरात के सूरत में उधना रेलवे स्टेशन पर घर जाने वाले प्रवासी मजदूरों की भारी भीड़ के कारण अराजकता फैल गई। करीब 7,000 यात्रियों के लिए मात्र दो ट्रेनें होने से स्थिति बेकाबू हो गई, जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। भीषण गर्मी और पानी की किल्लत के चलते कई यात्री बेहोश हो गए और स्टेशन पर भारी तनाव देखा गया।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अप्रैल 19, 2026

Gujarat News: गर्मियों की छुट्टियां शुरू होते ही गुजरात के औद्योगिक शहर सूरत में प्रवासियों का धैर्य जवाब दे गया। उधना रेलवे स्टेशन पर शनिवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब हजारों की संख्या में मजदूर अपने पैतृक गांवों की ओर प्रस्थान करने के लिए जमा हो गए। स्थिति इतनी भयावह थी कि स्टेशन के बाहर करीब 3 किलोमीटर तक लंबी कतारें देखी गईं। भीड़ को नियंत्रित करने में नाकाम सुरक्षा बलों को अंततः बल प्रयोग करना पड़ा, जिससे स्टेशन परिसर में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।

सीमित ट्रेन सेवाएं और प्रवासी मजदूरों का भारी पलायन

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उधना स्टेशन पर उस समय 7,000 से अधिक रेल यात्री जमा थे, जबकि उनके लिए केवल दो विशेष ट्रेनें ही उपलब्ध थी। फैक्ट्रियों में छुट्टी और भीषण गर्मी के कारण हर कोई जल्द से जल्द घर पहुंचने की फिराक में था। उपलब्ध ट्रेनों की तुलना में यात्रियों की भारी तादाद ने रेलवे की प्रबंधन व्यवस्था और यात्री सुरक्षा की पोल खोल दी। जब कुछ लोगों ने घंटों इंतजार के बाद धैर्य खोकर कतारें तोड़ीं, तो माहौल और भी तनावपूर्ण हो गया। स्थिति को बिगड़ता देख आरपीएफ (RPF) और स्थानीय पुलिस के जवानों को हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा ताकि भीड़ को पीछे धकेला जा सके।

भीषण लू का प्रकोप और पेयजल संकट के बीच अफरा-तफरी

आपको बता दे कि, स्टेशन पर केवल अव्यवस्था ही नहीं, बल्कि कुदरत की मार भी यात्रियों पर भारी पड़ी। कड़कड़ाती धूप और भीषण गर्मी के कारण यात्रियों का स्वास्थ्य बिगड़ने लगा। लंबी कतारों में घंटों खड़े रहने के कारण कम से कम दो यात्री बेहोश होकर गिर पड़े। इसी बीच स्टेशन परिसर में पीने के पानी की भारी किल्लत देखी गई। जब प्रशासन की ओर से पानी की बोतलें वितरित की गईं, तो प्यास से बेहाल लोगों के बीच छीना-झपटी और हाथापाई शुरू हो गई। छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति किसी दुःस्वप्न से कम नहीं थी, क्योंकि पानी जैसी बुनियादी सुविधा के लिए भी लोगों को संघर्ष करना पड़ रहा था।

रेलवे प्रशासन की सफाई

इस पूरी घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए रेलवे अधिकारियों ने स्वीकार किया कि प्रवासियों की भीड़ का अनुमान उम्मीद से कहीं अधिक था। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों, विशेषकर छोटे बच्चों वाले परिवारों से अपील की है कि वे बिना कंफर्म टिकट या जानकारी के बेवजह स्टेशन पर इंतजार न करें। अधिकारियों ने यात्री परिवहन क्षमता और रेल परिचालन को लेकर आश्वासन दिया कि जैसे ही अतिरिक्त विशेष ट्रेनों की घोषणा होगी, उसकी सूचना तुरंत सार्वजनिक की जाएगी। फिलहाल, स्टेशन पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है और कतारों को सुव्यवस्थित करने के प्रयास जारी हैं।

औद्योगिक बंदी और गर्मियों के मौसम में बढ़ती चुनौतियां

सूरत जैसे औद्योगिक हब में फैक्ट्रियों के बंद होने के बाद अक्सर इस तरह का सामूहिक पलायन और रेल यात्रा का दबाव देखने को मिलता है। हर साल गर्मियों में उत्तर प्रदेश और बिहार जाने वाले श्रमिकों की संख्या बढ़ जाती है, लेकिन इस बार व्यवस्थाएं नाकाफी साबित हुईं। 3 किलोमीटर लंबी लाइनें इस बात का सबूत हैं कि प्रवासी श्रमिकों के लिए परिवहन व्यवस्था को लेकर अभी बहुत कुछ किया जाना शेष है। फिलहाल, उधना स्टेशन पर तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और लोग अगली ट्रेन के इंतजार में पटरियों और फुटपाथों पर शरण लिए हुए हैं।