PM Modi Address to the Nation: मुद्दों से भटकाने वाला भाषण, सुप्रिया श्रीनेत ने उठाए महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने पीएम मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन को मुद्दों से भटकाने वाला करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि 29 मिनट के भाषण में 58 बार कांग्रेस का जिक्र कर प्रधानमंत्री ने असल सवालों जैसे—महिला सुरक्षा, 181 सीटों पर आरक्षण और जाति जनगणना से ध्यान हटाने की कोशिश की है। श्रीनेत ने भाजपा के महिला प्रतिनिधित्व पर भी सवाल उठाए।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अप्रैल 19, 2026

PM Modi Address to the Nation: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 18 अप्रैल को दिए गए विशेष संबोधन पर कांग्रेस ने तीखा पलटवार किया है। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने पीएम के भाषण को पूरी तरह से ‘दिशाहीन और भटकाऊ’ करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने अपने 29 मिनट के लंबे संबोधन में 58 बार कांग्रेस का नाम लिया, जो यह दर्शाता है कि सरकार असल मुद्दों पर बात करने के बजाय केवल विपक्ष को कोसने में रुचि रखती है। श्रीनेत के अनुसार, देश आज महिला अधिकारों और सामाजिक न्याय पर ठोस रोडमैप चाहता है, न कि राजनीतिक भाषणबाजी।

सरकार की मंशा पर उठाए गंभीर सवाल

सुप्रिया श्रीनेत ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि यदि सरकार वास्तव में गंभीर है, तो उसे लोकसभा की 543 सीटों में से 33 प्रतिशत यानी 181 सीटें तुरंत महिलाओं के लिए आरक्षित करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री इस दिशा में त्वरित कदम उठाने से हिचकिचा रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि इससे पुरुष सांसदों की सीटों में भारी कटौती हो जाएगी। श्रीनेत ने इसे महिला सशक्तिकरण और राजनीतिक भागीदारी के नाम पर महिलाओं के साथ किया गया एक बड़ा छलावा बताया।

सरकार के दावों की खोली पोल

कांग्रेस प्रवक्ता ने भारतीय जनता पार्टी के आंतरिक आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार के दावों की पोल खोली। उन्होंने बताया कि लोकसभा में भाजपा के महिला सांसदों का प्रतिनिधित्व केवल 12.9 प्रतिशत है, जबकि राज्यों की विधानसभाओं में यह आंकड़ा गिरकर 10 प्रतिशत से भी नीचे चला जाता है। श्रीनेत ने तर्क दिया कि जो पार्टी अपने संगठन और संसदीय दल में महिलाओं को पर्याप्त स्थान नहीं दे पा रही, वह पूरे देश की महिलाओं के उद्धार की बात कैसे कर सकती है? यह लैंगिक समानता और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के दावों के बिल्कुल विपरीत है।

महिला सुरक्षा और सम्मान पर प्रधानमंत्री की चुप्पी

सुप्रिया श्रीनेत ने देश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों और उन पर सरकार की निष्क्रियता को मुख्य मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा कि हाथरस, मणिपुर और अन्य गंभीर मामलों पर प्रधानमंत्री की चुप्पी विचलित करने वाली है। इन घटनाओं में सरकार की ढुलमुल प्रतिक्रिया ने यह साबित कर दिया है कि महिलाओं की सुरक्षा और आत्मसम्मान भाजपा की प्राथमिकता सूची में नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि राष्ट्र के संबोधन में इन ज्वलंत मुद्दों पर कोई माफीनामा या ठोस आश्वासन क्यों नहीं दिया गया?

जाति जनगणना से बचने की सरकारी रणनीति

रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस नेता ने एक बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि महिला आरक्षण के पीछे सरकार का असली मकसद परिसीमन (Delimitation) को हथियार बनाना और जाति जनगणना की मांग से ध्यान भटकाना है। श्रीनेत ने दावा किया कि सरकार पिछड़े और शोषित वर्गों की गिनती नहीं करना चाहती, इसलिए वह नए-नए कानूनी दांव-पेच ला रही है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों के नाम पर सरकार की यह रणनीति अब जनता के सामने बेनकाब हो चुकी है, जिससे सत्ता पक्ष की साख पर गहरा असर पड़ रहा है।