Supreme Court on West Bengal: बंगाल में SIR जजों पर हमला, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य प्रशासन को लगाई फटकार

"आपके राज्य में हर अधिकारी राजनीतिक भाषा बोलता है!" बंगाल में जजों पर हुए हमले पर भड़के चीफ जस्टिस। जानिए सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार और अफसरों को लेकर क्या कड़े तेवर दिखाए हैं।

Supreme Court on West Bengal

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अप्रैल 2, 2026

Supreme Court on West Bengal: पश्चिम बंगाल के मालदा में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के काम में लगे न्यायिक अधिकारियों पर हुए हमले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर संज्ञान लिया है। बुधवार, 1 अप्रैल 2026 की रात स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन करते हुए अधिकारियों को बंधक बना लिया और उनके वाहनों पर पत्थर व लाठियों से हमला किया। इस घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई और इसे न्यायिक अधिकारियों के मनोबल पर असर डालने वाला बताया।

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केंद्रीय बलों की तैनाती का आदेश

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचौली की बेंच ने चुनाव आयोग को आदेश दिया कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती की जाए। कोर्ट ने कहा कि जहां भी ये अधिकारी ठहरे हैं, वहां सुरक्षा दी जाए और जरूरत पड़ने पर उनके परिवार को भी सुरक्षा प्रदान की जाए। साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया कि दावों के निपटारे के दौरान एक बार में पांच से अधिक लोगों को जमा न होने दिया जाए।

राज्य सरकार और अधिकारियों को फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को फटकार लगाते हुए मुख्य सचिव, डीजीपी, डीएम और एसपी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने कहा कि वे बताएं कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। साथ ही इन अधिकारियों को 6 अप्रैल को ऑनलाइन सुनवाई में उपस्थित रहने का आदेश दिया गया है।

जांच एजेंसी की नियुक्ति

कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि घटना की जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी से कराई जाए। यह एजेंसी CBI या NIA हो सकती है। जांच रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने पश्चिम बंगाल के एडवोकेट जनरल को फटकार लगाते हुए कहा कि राज्य के अधिकारी राजनीतिक भाषा बोलते हैं। उन्होंने कहा कि मालदा के डीएम और एसपी मौके पर नहीं पहुंचे और हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को डीजीपी से संपर्क करना पड़ा। देर रात न्यायिक अधिकारी बाहर निकले, लेकिन उन पर फिर पथराव हुआ। सीजेआई ने कहा कि यह केवल न्यायिक अधिकारियों को परेशान करने का मामला नहीं है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के अधिकार को चुनौती देने जैसा है।

कपिल सिब्बल की दलील

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल भी कोर्ट में मौजूद थे। उन्होंने सीजेआई से अनुरोध किया कि यह टिप्पणी हटा दी जाए कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि यह टिप्पणी आपके लिए चुनौती है, इसे गलत साबित करके दिखाइए।

मालदा की घटना ने न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा और स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख यह दर्शाता है कि न्यायपालिका इस मामले को हल्के में नहीं ले रही। केंद्रीय बलों की तैनाती और निष्पक्ष जांच के आदेश से स्पष्ट है कि अदालत न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करना चाहती है।

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