Sukma Naxal Surrender: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में सुरक्षाबलों को एक बड़ी और निर्णायक सफलता हाथ लगी है। मंगलवार को कुल 26 माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए पुलिस और सुरक्षाबलों के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। खास बात यह रही कि आत्मसमर्पण करने वालों में 7 महिलाएं भी शामिल हैं। यह घटनाक्रम जिले में नक्सल गतिविधियों पर लगाम लगाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
इनामी नक्सलियों का भी सरेंडर
अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में से 13 पर कुल 65 लाख रुपये का इनाम घोषित था। लंबे समय से पुलिस को जिन नक्सलियों की तलाश थी, उनके आत्मसमर्पण से सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी राहत मिली है। यह आत्मसमर्पण न केवल संगठन के लिए झटका है, बल्कि इलाके में शांति बहाली की दिशा में सकारात्मक संकेत भी देता है।
‘पूना मार्गेम’ अभियान का असर
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह सफलता छत्तीसगढ़ सरकार की ‘नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति–2025’ और सुकमा पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ‘पूना मार्गेम’ अभियान का प्रत्यक्ष परिणाम है। इस अभियान के तहत अंदरूनी और अति संवेदनशील इलाकों में लगातार सुरक्षा शिविर स्थापित किए गए हैं, जिससे पुलिस का प्रभाव बढ़ा है और माओवादी संगठन कमजोर हुआ है।
वरिष्ठ अधिकारियों के सामने किया आत्मसमर्पण
लगातार दबाव और बदलते हालात से प्रभावित होकर माओवादी संगठन में सक्रिय 26 सदस्यों ने सुकमा जिले के पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण और सुरक्षाबलों के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष हथियार डाल दिए। अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में विकास कार्यों और सुरक्षा बलों की मजबूत मौजूदगी ने माओवादियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया है।
डिप्टी कमांडर लाली भी शामिल
आत्मसमर्पण करने वालों में सीआरसी कंपनी नंबर की प्लाटून नंबर दो का डिप्टी कमांडर लाली उर्फ मुचाकी आयते (35 वर्ष) भी शामिल है। उस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित था। लाली पर वर्ष 2017 में सोनाबेड़ा गांव से कोरापुट मार्ग पर सुरक्षाबलों के वाहन को बारूदी सुरंग से उड़ाने का गंभीर आरोप है, जिसमें 14 जवान शहीद हो गए थे।
अन्य बड़े इनामी माओवादी
इसके अलावा आत्मसमर्पण करने वालों में डिवीजनल कमेटी सदस्य हेमला लखमा (41), कंपनी नंबर सात की पार्टी सदस्य आसमिता उर्फ कमलू सन्नी (20), रामबत्ती उर्फ संध्या (21) और बटालियन नंबर एक का सदस्य सुंडाम पाले (20) भी शामिल हैं। इन सभी पर आठ-आठ लाख रुपये का इनाम घोषित था।
अलग-अलग इनाम राशि वाले नक्सली
अधिकारियों ने बताया कि तीन नक्सलियों पर पांच-पांच लाख रुपये, एक नक्सली पर तीन लाख रुपये, एक पर दो लाख रुपये और तीन नक्सलियों पर एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। इन सभी ने हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है।
पुनर्वास नीति के तहत मिलेगी सहायता
आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों को राज्य सरकार की ‘छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत पुनर्वास नीति–2025’ के तहत लाभ दिया जाएगा। इसके अंतर्गत प्रत्येक नक्सली को 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि, घोषित इनाम की रकम और पुनर्वास से जुड़ी अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। प्रशासन का मानना है कि इससे अन्य नक्सलियों को भी आत्मसमर्पण के लिए प्रेरणा मिलेगी।










