Sujit Bose Arrested : बंगाल नगर पालिका भर्ती घोटाला, पूर्व मंत्री सुजीत बोस गिरफ्तार, करोड़ों की उगाही का आरोप

पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री सुजीत बोस को ईडी ने नगर पालिका भर्ती घोटाले में लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। करोड़ों की अवैध उगाही और 150 उम्मीदवारों की गलत सिफारिश के आरोपों के बीच, एजेंसी को उनके गुप्त बैंक खातों और संपत्तियों के चौंकाने वाले सबूत मिले हैं।

Sujit Bose Arrested

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 12, 2026

Sujit Bose Arrested :  पश्चिम बंगाल में बहुचर्चित नगर पालिका भर्ती घोटाले (Municipality Recruitment Scam) मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री सुजीत बोस को घंटों की सघन पूछताछ के बाद सोमवार देर शाम गिरफ्तार कर लिया गया। साल्ट लेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में ईडी के अधिकारियों ने उनसे लंबी पूछताछ की, जिसके बाद उनके जवाबों से संतुष्ट न होने पर यह कदम उठाया गया। जांच एजेंसी अब इस घोटाले में हुए पैसों के बड़े लेन-देन, बेनामी संपत्तियों और अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों की संलिप्तता की गहराई से जांच कर रही है। गिरफ्तार किए गए पूर्व मंत्री को कल सुबह विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।

भ्रष्टाचार की संपत्ति: फ्लैट्स और बैंक खातों में नकद जमा का खेल

जांच एजेंसी ने सुजीत बोस के खिलाफ गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के दावे किए हैं। ईडी का आरोप है कि नगर पालिकाओं में अवैध नियुक्तियों के बदले जो पैसा मिला, उससे सुजीत बोस ने कई फ्लैट खरीदे। इन संपत्तियों को ईडी ने सीधे तौर पर ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ यानी अपराध की कमाई माना है। इसके अलावा, जांचकर्ताओं को सुजीत बोस के बैंक खातों में भारी मात्रा में नकद जमा होने के ठोस सबूत मिले हैं, जिनका स्रोत स्पष्ट नहीं हो पाया है। ईडी अब उन सभी कड़ियों को जोड़ रही है जो इस भर्ती घोटाले को सीधे तौर पर आर्थिक लाभ से जोड़ती हैं।

बेटे के साथ ईडी दफ्तर पहुंचे थे सुजीत बोस

सोमवार (11 मई 2026) को सुजीत बोस अपने बेटे समुद्र बोस के साथ सुबह करीब 10:30 बजे सीजीओ कॉम्प्लेक्स पहुंचे थे। यह पहली बार नहीं है जब दक्षिण दमदम नगरपालिका में कथित भर्ती अनियमितताओं के सिलसिले में उन्हें तलब किया गया था। इससे पहले भी कई बार उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया गया था। जांच एजेंसी ने सुजीत बोस और उनके बेटे के मालिकाना हक वाले विभिन्न ठिकानों पर दो बार तलाशी ली थी। अधिकारियों का दावा है कि छापेमारी के दौरान कई ऐसे दस्तावेज बरामद हुए हैं, जो इस घोटाले में उनकी प्रत्यक्ष संलिप्तता को उजागर करते हैं। यह पूरा मामला बंगाल की विभिन्न नगर पालिकाओं में लगभग 1800 से अधिक लोगों की अवैध नियुक्ति से जुड़ा है, जिसमें 200 करोड़ रुपये की उगाही का अनुमान है।

चुनाव के दौरान नोटिस और अदालती दांव-पेंच

सुजीत बोस की मुश्किलें पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान ही शुरू हो गई थीं। उन्हें ईडी द्वारा कई नोटिस भेजे गए थे, जिनमें से एक अहम नोटिस नामांकन पत्र दाखिल करने वाले दिन यानी 6 अप्रैल को मिला था। उस समय उन्होंने चुनाव प्रचार का हवाला देते हुए पेशी से छूट के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। चुनाव संपन्न होने के बाद, 1 मई को वे पहली बार ईडी के समक्ष पेश हुए थे। जांच एजेंसी का मानना है कि चुनाव के दौरान मिली मोहलत का उपयोग सबूतों के साथ छेड़छाड़ के लिए किया जा सकता था, इसलिए अब सख्ती बरती जा रही है।

राजनीतिक प्रतिशोध बनाम भ्रष्टाचार की जांच

सुजीत बोस और उनके परिवार पर केंद्रीय जांच एजेंसियों का शिकंजा लंबे समय से कस रहा था। विधानसभा चुनाव से पहले सुजीत बोस की पत्नी, बेटे और बेटी को भी कई बार पूछताछ के लिए बुलाया गया था। उनके आवास, कार्यालय और उनके बेटे के रेस्टोरेंट पर भी छापेमारी की गई थी। हालांकि, सुजीत बोस इन कार्रवाइयों को हमेशा राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते रहे हैं। उन्होंने पहले भी कहा था कि उनकी आर्थिक स्थिति इतनी खराब नहीं है कि उन्हें नौकरियां बेचकर पैसा कमाना पड़े। उन्होंने इसे ‘चुनाव आयोग और ईडी की साजिश’ करार दिया था। अब गिरफ्तारी के बाद यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया तूफान लेकर आ गया है।