UP Election 2027: यूपी विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान भले ही ना हुआ हो, लेकिन आगामी 2027 चुनाव के लिए सियासी गतिविधियां अभी से तेज हो गई है. सभी राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी-अपनी कमर कस ली है. राजनीति में एक बहुत ही पुरानी कहावत है – दिल्ली फतह के लिए यूपी में जीतना जरुरी है और यूपी में सत्ता हासिल करने की राह 403 विधानसभा सीटों से होकर गुजरती है. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर अब सियासी बिसात सजने लगी है. इसी कड़ी में लखीमपुर जिले की पलिया विधानसभा सीट भी अहम मानी जा रही है, जहां जातीय समीकरण के साथ बाढ़, गन्ना भुगतान, खेती और वन्यजीवों से जुड़े स्थानीय मुद्दे चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकते हैं.
पलिया में बड़ी दलित और ओबीसी आबादी

बताते चले कि, लखीमपुर जिले की 8 विधानसभा सीटों में पलिया विधानसभा में बड़ी संख्या में दलित मतदाता होने के बावजूद सामान्य सीट है। पलिया में करीब 1.30 लाख दलित और एक लाख ओबीसी मतदाता बताये जाते है। मुस्लिम मतदाता भी यहां अच्छी संख्या में है लेकिन किसी दूसरे समुदाय से जुडे बिना जीत नहीं दिला सकते है।
आपकी जानकारी के लिए बता दे कि, 2026 की नई मतदाता सूची के अनुसार यहां कुल 3 लाख 22 हजार 322 मतदाता है। पलिया भारत-नेपाल सीमा और दुधवा के तराई क्षेत्र से जुड़ी विधानसभा सीट हैं। थारू और सिख किसान मतदाता भी यहां की राजनीति को प्रभावित करते है। पलिया में मौजूदा विधायक हरविंदर कुमार साहनी उर्फ रोमी साहनी है। रोमी इस सीट से लगातार तीसरी बार विधायक है। इससे पहले 2012 में रोमी बसपा प्रत्याशी के तौर पर जीते थे। वर्ष 2017 में वह भाजपा से चुनाव लडे़ और जीते तथा 2022 में रोमी ने जीत की हैट्रिक लगाई।
पलिया विधानसभा में जातीय समीकरण

पलिया विधानसभा सीट पर सबसे बड़ा फैक्टर दलित और ओबीसी मतदाता की बड़ी मौजूदगी हैं। मुस्लिम मतदाता यहां करीब 20 फीसदी बताया जाता है। इसके साथ ही नेपाल सीमा वाली तराई पट्टी में थारू आबादी राजनीतिक दृष्टि से अहम है। सिख किसान भी यहां की राजनीति को प्रभावित करते है।
- एससी – 1.30 लाख
- ओबीसी – एक लाख
- एसटी – 27 हजार
- मुस्लिम – 60 हजार
- सिख – 15 हजार
- सवर्ण – 50 हजार
- अन्य – 20 हजार
पलिया विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास
पलिया विधानसभा सीट 1974 में आस्तित्व में आयी।
| वर्ष | विजेता | पार्टी |
|---|---|---|
| 1974 | छेड़ा लाल चौधरी | कांग्रेस |
| 1977 | नंगा राम | जनता पार्टी |
| 1980 | छेड़ा लाल चौधरी | कांग्रेस |
| 1985 | नंगा राम | लोकदल |
| 1989 | छेड़ा लाल चौधरी | कांग्रेस |
| 1991 | राम सरन | जनता दल |
| 1993 | शशिबाला भारती | भाजपा |
| 1996 | मोतीलाल | सपा |
| 2002 | राजेश कुमार | बसपा |
| 2007 | राजेश कुमार | बसपा |
| 2012 | हरविंदर कुमार साहनी | बसपा |
| 2017 | हरविंदर कुमार साहनी | भाजपा |
| 2022 | हरविंदर कुमार साहनी | भाजपा |
बाढ़ और शारदा नदी सबसे बड़ा स्थानीय मुद्दा

पलिया की राजनीति को जातीय समीकरण से अलग करने वाला सबसे बड़ा मुद्दा बाढ़ है। शारदा नदी की बाढ़ से गांवों और कृषि भूमि को नुकसान होता रहा है। पिछले साल पलिया में निजी चीनी मिल के बकाया भुगतान को लेकर कानूनी कार्रवाई तक की नौबत आ गई थी। इसलिए गन्ना भुगतान, फसल मूल्य, खाद-बिजली, सिंचाई और कृषि लागत आगामी विधानसभा चुनाव में मुख्य मुद्दे हो सकते है। इसके अलावा दुधवा टाइगर रिजर्व होने के कारण यहां वन्यजीवों के हमले भी एक बड़ी समस्यां हैं
पलिया विधानसभा चुनाव 2027 में किन फैक्टरों पर नजर?

पलिया विधानसभा चुनाव 2027 को केवल दलित बनाम ओबीसी या भाजपा बनाम सपा की लड़ाई के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। असली फैसला दलित वोट के बंटवारे, गैर-यादव ओबीस मतदाताओं की दिशा, थारू समुदाय की पसंद, सिख किसान वोट, मुस्लिम मतों की एकजुटता, बसपा की ताकत, उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ और 2026 की नई मतदाता सूची के बूथवार बदलाव मिलकर करेंगे।










