Sudhanshu Trivedi TMC : नतीजों से पहले भाजपा का बड़ा धमाका, सुधांशु त्रिवेदी ने खोली टीएमसी की पोल

पश्चिम बंगाल में 4 मई को होने वाली मतगणना से पहले दिल्ली में सियासी पारा चढ़ गया है। भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने टीएमसी को "लोकतंत्र की हत्यारी" बताते हुए आरोप लगाया कि वे केंद्रीय कर्मचारियों से डरते क्यों हैं? आखिर आईपीएसी (I-PAC) रेड और पुराने चुनावी दंगों का सच क्या है? जानें पूरी कहानी।

Sudhanshu Trivedi TMC

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 2, 2026

Sudhanshu Trivedi TMC : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के समापन के बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर पहुंच गया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की कार्यशैली और उनकी हताशा को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने हाल ही में एक प्रेस वार्ता के दौरान ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने दावा किया कि जैसे-जैसे मतदान के चरण आगे बढ़े, वैसे-वैसे टीएमसी के पैरों के नीचे से जमीन खिसकती गई और उनका आत्मविश्वास पूरी तरह डगमगा गया है।

शांतिपूर्ण मतदान से टीएमसी में बेचैनी: सुधांशु त्रिवेदी

सुधांशु त्रिवेदी के अनुसार, बंगाल चुनाव के दौरान जब-जब हिंसा की घटनाएं कम हुईं और मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ, तब-तब तृणमूल कांग्रेस के खेमे में बेचैनी बढ़ती देखी गई। उन्होंने तर्क दिया कि टीएमसी की राजनीति हमेशा से डर और दबाव पर आधारित रही है, ऐसे में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव उनके अस्तित्व के लिए खतरा बन गए हैं। त्रिवेदी ने यह भी कहा कि एग्जिट पोल के जो रुझान सामने आ रहे हैं, उनसे पार्टी का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है। यही कारण है कि अब वे पूरी चुनाव प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर ही सवाल खड़े करने लगे हैं, जो उनकी हार की स्वीकारोक्ति जैसा है।

न्यायालय और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति टीएमसी का रवैया

बीजेपी सांसद ने ममता बनर्जी की पार्टी पर संवैधानिक संस्थाओं के अपमान का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस अपनी राजनीतिक विफलताओं को छिपाने के लिए बार-बार अदालत का दरवाजा खटखटाती है, लेकिन वहां से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिल रही है। हालिया याचिका के खारिज होने का जिक्र करते हुए उन्होंने तंज कसा कि टीएमसी को केवल उन्हीं संस्थाओं पर भरोसा है जो उनके नियंत्रण में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी को राज्य के कर्मचारियों पर तो विश्वास है, लेकिन वे केंद्र सरकार के कर्मचारियों और सुरक्षाबलों की ईमानदारी पर संदेह करती हैं, जो देश के संघीय ढांचे के खिलाफ है।

आईपैक छापेमारी और मुख्यमंत्री की सक्रियता पर सवाल

प्रशांत किशोर की संस्था ‘आईपैक’ (I-PAC) से जुड़े ठिकानों पर हुई छापेमारी का मुद्दा उठाते हुए त्रिवेदी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब जांच एजेंसियां अपना काम कर रही थीं, तो खुद मुख्यमंत्री का वहां पहुंच जाना यह दर्शाता है कि दाल में कुछ काला है। त्रिवेदी के अनुसार, एक मुख्यमंत्री का जांच प्रक्रिया में इस तरह हस्तक्षेप करना न केवल प्रशासनिक मर्यादा का उल्लंघन है, बल्कि यह भी साबित करता है कि उन्हें अपने ही सिस्टम और कानून पर भरोसा नहीं रह गया है।

ममता बनर्जी के घटते जनाधार और नैतिक पतन का दावा

सुधांशु त्रिवेदी ने अपने वक्तव्य के अंत में दावा किया कि पश्चिम बंगाल की जनता का ममता बनर्जी पर से भरोसा पूरी तरह उठ चुका है। उन्होंने कहा कि “मां, माटी, मानुष” का नारा अब केवल कागजों तक सीमित रह गया है और धरातल पर जनता परिवर्तन चाह रही है। त्रिवेदी के मुताबिक, हिंसा और आतंक के सहारे सत्ता में बने रहने की कोशिशें अब नाकाम हो रही हैं। बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को हुए मतदान के बाद अब सबकी नजरें 4 मई सोमवार को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं, जो राज्य की अगली राजनीतिक दिशा तय करेंगे।

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