Subhash Chandra CBI FIR : सुभाष चंद्र पर CBI FIR, 1322 करोड़ के कथित लोन फ्रॉड से बढ़ी मुश्किलें

सुभाष चंद्र के खिलाफ CBI की FIR ने कारोबारी जगत में हलचल बढ़ा दी है। ₹1,322 करोड़ के कथित LIC Housing Finance लोन फ्रॉड मामले में कई गंभीर आरोप सामने आए हैं। FIR में आखिर क्या दावा किया गया है, सुभाष चंद्र पर कौन-कौन से आरोप हैं और जांच आगे किस दिशा में जाएगी?

Subhash Chandra CBI FIR

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

सितम्बर 5, 2026

Subhash Chandra CBI FIR  : एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कथित बैंक लोन धोखाधड़ी के मामले में सुभाष चंद्रा समेत कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह मामला कुल करीब 1,322 करोड़ रुपये की देनदारी से जुड़ा बताया जा रहा है। एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (LICHFL) की शिकायत के आधार पर सीबीआई ने यह कार्रवाई शुरू की है।

आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोप

शिकायत के आधार पर सीबीआई ने आपराधिक साजिश, विश्वासघात और आपराधिक कदाचार समेत विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। आरोप है कि संबंधित लोन हासिल करते समय सुभाष चंद्रा की संपत्ति और नेटवर्थ से जुड़ी कुछ ऐसी जानकारियां और दस्तावेज प्रस्तुत किए गए, जिन पर बाद की परिस्थितियों में सवाल उठे। अब एजेंसी इन आरोपों की विस्तृत जांच करेगी।

1322 करोड़ रुपये की देनदारी कैसे बनी

LICHFL की शिकायत के अनुसार, दो अलग-अलग लोन सुविधाओं के तहत कुल 980 करोड़ रुपये का मूल कर्ज दिया गया था। समय के साथ ब्याज और अन्य शुल्क जुड़ने के बाद कथित बकाया राशि बढ़कर लगभग 1,322 करोड़ रुपये हो गई। पहला लोन 500 करोड़ रुपये का था, जिसे वसंत सागर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड को कारोबार के विस्तार के उद्देश्य से दिया गया था।

दूसरे लोन में भी करोड़ों की राशि

500 करोड़ रुपये की लोन सुविधा में पैन इंडिया इंफ्रा प्रोजेक्ट्स को-बॉरोवर थी। इसके बाद 480 करोड़ रुपये का दूसरा लोन डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट कंसल्टेंसी सर्विसेज को किराये से होने वाली आय के आधार पर दिया गया था। इस लोन में स्पिरिट इंफ्रा पावर मल्टी वेंचर्स को-बॉरोवर बताया गया है। शिकायत के अनुसार, दोनों सुविधाओं में सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत गारंटी भी शामिल थी।

व्यक्तिगत गारंटी और नेटवर्थ पर सवाल

500 करोड़ रुपये के लोन के लिए सुभाष चंद्रा ने 28 मार्च 2018 को व्यक्तिगत गारंटी दी थी। LICHFL का आरोप है कि लोन मंजूर करने की प्रक्रिया में उनकी बताई गई नेटवर्थ से जुड़े प्रमाणपत्र महत्वपूर्ण आधार बने। एजेंसी अब यह जांच करेगी कि इन दस्तावेजों में दी गई जानकारी वास्तविक वित्तीय स्थिति के अनुरूप थी या नहीं।

अलग-अलग प्रमाणपत्रों में बताई गई नेटवर्थ

शिकायत के मुताबिक, 500 करोड़ रुपये के लोन के लिए DIM & Co. ने 28 मार्च 2018 को एक नेटवर्थ प्रमाणपत्र जारी किया था। इसमें सुभाष चंद्रा की नेटवर्थ करीब 59,113 करोड़ रुपये बताई गई थी। वहीं, 480 करोड़ रुपये के दूसरे लोन के समय MPJ & Co. Chartered Accountants द्वारा 6 जुलाई 2018 को जारी प्रमाणपत्र में उनकी नेटवर्थ लगभग 40,562 करोड़ रुपये दर्शाई गई थी।

डिफॉल्ट के बाद शुरू हुई दिवाला प्रक्रिया

दोनों लोन खातों में डिफॉल्ट होने के बाद मामला इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत दिवाला समाधान प्रक्रिया में पहुंचा। इसी प्रक्रिया के दौरान सुभाष चंद्रा की कथित नेटवर्थ को लेकर गंभीर सवाल सामने आए। शिकायत में कहा गया है कि बाद की कानूनी कार्यवाही के दौरान उन्होंने उस नेटवर्थ को स्वीकार नहीं किया, जो लोन लेते समय LICHFL के समक्ष प्रस्तुत की गई थी।

59 हजार करोड़ से 31.79 करोड़ तक का अंतर

मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल नेटवर्थ के आंकड़ों में कथित बड़े अंतर को लेकर है। शिकायत के अनुसार, वर्ष 2024 में सुभाष चंद्रा ने अपनी कुल नेटवर्थ 31.79 करोड़ रुपये बताई थी। साथ ही कथित तौर पर उन्होंने कहा कि वर्ष 2017-18 के दौरान भी उनकी नेटवर्थ कभी 40,000 करोड़ रुपये से अधिक नहीं रही थी। इस अंतर की वास्तविक वजह अब जांच का प्रमुख हिस्सा होगी।

दस्तावेजों की जांच करेगी सीबीआई

सीबीआई अब लोन से जुड़े दस्तावेजों, गारंटी, कंपनियों की वित्तीय स्थिति और नेटवर्थ प्रमाणपत्रों की जांच कर सकती है। एजेंसी यह भी पता लगाएगी कि लोन हासिल करने के दौरान कोई गलत, भ्रामक या तथ्यात्मक रूप से विरोधाभासी जानकारी दी गई थी या नहीं। साथ ही अन्य आरोपियों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका भी जांच के दायरे में रहेगी। आने वाले समय में पूछताछ और अन्य कानूनी कार्रवाई की संभावना है।

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