Operation Ashdar : धनाशाह सितार से डेरा की गली अटैक तक बदला पूरा, मारा गया पाकिस्तानी आतंकी यासिर

धनाशाह सितार से डेरा की गली हमले तक आतंक की कड़ियां अब जांच के केंद्र में हैं। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक आतंकी यासिर के मारे जाने से बड़ा झटका लगा है। आखिर यासिर कौन था, किन हमलों से उसका कथित कनेक्शन था और उसके खात्मे से आतंकी नेटवर्क पर कितना असर पड़ेगा?

Operation Ashdar

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

सितम्बर 5, 2026

Operation Ashdar : जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ लगातार चल रहे सुरक्षा अभियानों के बीच सुरक्षाबलों को एक बहुत बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। ‘ऑपरेशन अशदर’ के दौरान हुई एक भीषण मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान से ताल्लुक रखने वाले एक कुख्यात आतंकी को मार गिराया है। मारे गए इस आतंकवादी की पहचान यासिर के रूप में की गई है। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, यासिर पड़ोसी देश पाकिस्तान का रहने वाला था और प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ था। उसकी मौत को घाटी में सक्रिय आतंकी नेटवर्क के खिलाफ एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।

कई बड़े आतंकी वारदातों में संलिप्तता

सुरक्षा एजेंसियों के पास मौजूद पुख्ता जानकारी के अनुसार, यासिर काफी लंबे समय से जम्मू-कश्मीर के विभिन्न इलाकों में सक्रिय आतंकी नेटवर्क का एक मुख्य हिस्सा बना हुआ था। शुरुआती खुफिया रिपोर्ट्स में उसका नाम कम से कम पांच बड़े और गंभीर आतंकी हमलों से जोड़ा जा रहा है। इन वारदातों में भारतीय सेना और वायुसेना के बहादुर जवानों के अलावा निर्दोष नागरिक पोर्टरों को भी निशाना बनाया गया था। सुरक्षा एजेंसियों के लिए इस खतरनाक आतंकी का मारा जाना इसलिए भी बेहद अहम है क्योंकि वह क्षेत्र में लगातार आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था।

तीन दिनों तक चला ‘ऑपरेशन अशदर’

सुरक्षाबलों को बारामुला के घने जंगलों में आतंकवादियों के एक बड़े समूह के छिपे होने की गुप्त सूचना मिली थी। पुख्ता खुफिया इनपुट मिलने के तुरंत बाद, करीब तीन दिन पहले इस इलाके में व्यापक अभियान शुरू किया गया था। कठिन भौगोलिक स्थिति, घने जंगलों और चुनौतीपूर्ण इलाके का पूरा फायदा उठाकर ये आतंकवादी वहां छिपने में कामयाब रहे थे। सुरक्षाबलों ने बिना समय गंवाए पूरे इलाके की कड़ी घेराबंदी की और सर्च ऑपरेशन चलाया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई।

मुठभेड़ में ढेर हुआ पाकिस्तानी यासिर

लगभग तीन दिनों तक लगातार चले इस बेहद चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच कई बार आमना-सामना हुआ। इस लंबी कार्रवाई के दौरान पाकिस्तानी आतंकी यासिर सुरक्षाबलों की गोली का शिकार होकर ढेर हो गया। हालांकि, अंधेरे और घने जंगलों का फायदा उठाकर उसके अन्य साथी वहां से भागने में सफल रहे। इस घटना के तुरंत बाद सुरक्षाबलों ने फरार आतंकवादियों की धरपकड़ के लिए तलाशी अभियान का दायरा काफी बढ़ा दिया है और पूरे क्षेत्र में अत्यधिक सतर्कता बरती जा रही है।

4 मई 2024 के पुंछ हमले से कनेक्शन

सुरक्षा सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, मारे गए आतंकी यासिर का नाम 4 मई 2024 को पुंछ के धनाशाह सितार इलाके में हुए कायराना आतंकी हमले से भी गहराई से जुड़ा था। इस घातक हमले में भारतीय वायुसेना के काफिले को निशाना बनाकर अंधाधुंध फायरिंग की गई थी, जिसमें देश का एक वायुसेना जवान शहीद हो गया था। इस सनसनीखेज घटना के बाद से ही सुरक्षा एजेंसियां क्षेत्र में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए बड़े पैमाने पर जुटी हुई थीं।

भट्टा दुर्रियां और अन्य बड़े हमले

यासिर पर 11 अक्टूबर 2021 को पुंछ के भट्टा दुर्रियां क्षेत्र में हुए एक अन्य भीषण हमले में शामिल होने का भी गंभीर आरोप था, जिसमें सेना के नौ वीर जवान शहीद हो गए थे। इसके अलावा, 20 अप्रैल 2023 को इसी इलाके में हुए एक अन्य बड़े आतंकी हमले में पांच सैन्यकर्मियों की शहादत हुई थी। इन दोनों घटनाओं को जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के इतिहास की सबसे गंभीर वारदातों में गिना जाता है, जिनकी जांच एजेंसियां लगातार कर रही थीं।

बारामुला और डेरा की गली के हमले

बीती 25 अक्टूबर 2024 को बारामुला के बूटा पथरी इलाके में सेना के जवानों और नागरिक पोर्टरों पर हमला किया गया था, जिसमें दो सैन्यकर्मियों और दो नागरिक पोर्टरों की जान चली गई थी। इसके अतिरिक्त, 21 दिसंबर 2023 को पुंछ के डेरा की गली में हुए आतंकी हमले में सेना के चार जवान शहीद हुए थे। सुरक्षा एजेंसियां यासिर को इन सभी प्रमुख वारदातों का मुख्य साजिशकर्ता मानकर अपनी जांच को आगे बढ़ा रही थीं।

फरार आतंकवादियों की तलाश हुई तेज

कुख्यात आतंकी यासिर के मारे जाने के बाद अब सुरक्षाबलों का पूरा फोकस उसके बचे हुए साथियों को जल्द से जल्द दबोचने पर है। ऐसी प्रबल आशंका जताई जा रही है कि जंगलों के भीतर कुछ और आतंकी अभी भी छिपे हो सकते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए इलाके में तलाशी अभियान को और अधिक व्यापक कर दिया गया है। सुरक्षाबल जंगल के चप्पे-चप्पे और संदिग्ध ठिकानों की बारीकी से छानबीन कर रहे हैं।

आतंकी नेटवर्क को कमजोर करने की कोशिश

सुरक्षा एजेंसियों के लिए यासिर का खात्मा एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि वह घाटी में आतंक का एक बड़ा चेहरा बन चुका था। उसके खिलाफ मिले तमाम इनपुट और हमलों से जुड़े संबंधों की जांच अभी भी जारी है। अब सुरक्षा बलों का मुख्य उद्देश्य उसके सभी फरार साथियों को ढूंढ निकालना और पूरे आतंकी नेटवर्क को जड़ से समाप्त करना है। इस सफल ऑपरेशन के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है।