Strait of Hormuz : पश्चिम एशिया में युद्ध के बादलों और गहराते कूटनीतिक गतिरोध के बीच ईरान ने एक बार फिर शांति की पहल की है। ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से संयुक्त राज्य अमेरिका को एक नया कूटनीतिक प्रस्ताव भेजा है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, यह महत्वपूर्ण दस्तावेज गुरुवार शाम को पाकिस्तानी अधिकारियों को सौंपा गया। वर्तमान में पाकिस्तान इन दोनों कट्टर प्रतिद्वंद्वी देशों के बीच एक सेतु या मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। हालांकि, इस प्रस्ताव के भविष्य पर अनिश्चितता के काले बादल मंडरा रहे हैं, क्योंकि वाशिंगटन से आने वाले शुरुआती संकेत बहुत उत्साहजनक नहीं हैं।
ईरान का नया दांव: होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की पेशकश
तेहरान द्वारा सौंपे गए इस नए प्रस्ताव के केंद्र में ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। ईरान ने इस व्यस्त जलमार्ग में समुद्री यातायात और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को सामान्य करने की इच्छा जताई है। ईरान का मानना है कि इस कदम से वैश्विक ऊर्जा संकट में कमी आएगी। हालांकि, इस प्रस्ताव में एक बड़ा पेंच है—ईरान ने अपने विवादास्पद परमाणु कार्यक्रम से जुड़े सबसे संवेदनशील और अहम मुद्दों को मौजूदा चर्चा से बाहर रखते हुए उन्हें भविष्य की बातचीत के लिए टाल दिया है। ईरान की यह रणनीति कूटनीतिक गलियारों में ‘समय हासिल करने’ की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।
ट्रंप की आपत्ति: परमाणु मुद्दे पर समझौता नहीं करने का संकेत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव पर कड़ा रुख अपनाया है। CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की, जिसमें उन्होंने ईरानी प्रस्ताव को ‘अस्वीकार्य’ बताया। ट्रंप का मानना है कि अगर परमाणु कार्यक्रम पर कोई ठोस और स्थायी समाधान निकाले बिना होर्मुज जलमार्ग को खोल दिया गया, तो इससे ईरान पर बना कूटनीतिक और आर्थिक दबाव काफी कम हो जाएगा। अमेरिका विशेष रूप से ईरान के उस यूरेनियम भंडार को लेकर चिंतित है, जो अब परमाणु हथियार बनाने के स्तर के बेहद करीब पहुंच चुका है।
वैश्विक ऊर्जा संकट और कूटनीतिक दुविधा
अमेरिका के सामने इस समय एक बड़ी दुविधा है। यदि वह ईरान के प्रस्ताव को ठुकराता है और होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूती रहेंगी। इसका सीधा असर अमेरिका के भीतर ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की कीमतों पर पड़ रहा है, जो ट्रंप प्रशासन के लिए घरेलू राजनीति के मोर्चे पर एक बड़ी चुनौती है। दूसरी ओर, यदि वह प्रस्ताव मान लेता है, तो उसे सुरक्षा चिंताओं के साथ समझौता करना पड़ सकता है। यानी, जलमार्ग खोलने और बंद रखने, दोनों ही स्थितियों में वाशिंगटन के लिए जोखिम और वित्तीय नुकसान मौजूद है।
इस्लामाबाद वार्ता की विफलता और पाकिस्तान को लगा झटका
इस पूरे घटनाक्रम ने पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों को भी गहरे संकट में डाल दिया है। पिछले हफ्ते इस्लामाबाद में होने वाली बहुप्रतीक्षित अमेरिका-ईरान शांति वार्ता ऐन मौके पर रद्द हो गई थी। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरगची के नेतृत्व में आया प्रतिनिधिमंडल बिना किसी नतीजे के तेहरान लौट गया था। इसके जवाब में राष्ट्रपति ट्रंप ने भी अपने विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर का पाकिस्तान दौरा रद्द कर दिया। इससे पहले हुई पहले दौर की बातचीत भी नाकाम रही थी, जिससे यह स्पष्ट होता जा रहा है कि दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई बहुत गहरी है।
भविष्य की राह: क्या युद्ध टल पाएगा?
ईरान द्वारा सौंपी गई आधिकारिक मांगों की सूची में अमेरिका और इजरायल के लिए बेहद सख्त शर्तें रखी गई हैं। अब गेंद पूरी तरह से व्हाइट हाउस के पाले में है। क्या डोनाल्ड ट्रंप अपनी ‘मैक्सिमम प्रेशर’ (अधिकतम दबाव) की नीति को जारी रखेंगे या वैश्विक तेल बाजार को स्थिर करने के लिए ईरान के साथ किसी अस्थायी समझौते पर राजी होंगे? फिलहाल, तेहरान और वाशिंगटन के बीच का यह कूटनीतिक घमासान न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को प्रभावित कर रहा है। आने वाले कुछ दिन वैश्विक शांति के लिए अत्यंत निर्णायक साबित होने वाले हैं।
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