Stock Market Crash: शेयर बाजार का ब्लैक फ्राइडे, सेंसेक्स और निफ्टी में भारी नुकसान

आज शेयर बाजार में सेंसेक्स 1,048 अंक और निफ्टी 336 अंक टूटकर बंद हुआ। IT और धातु स्टॉक्स की बिकवाली ने बाजार पूंजीकरण में 7 लाख करोड़ रुपये का नुकसान कराया। निवेशक सतर्क हैं और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ रही है।

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

फ़रवरी 13, 2026

Stock Market Crash: देश का शेयर बाजार शुक्रवार को वैश्विक अस्थिरता और सेक्टर-विशेष बिकवाली के दबाव में भारी गिरावट का सामना करता दिखा। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,048.16 अंक यानी 1.25 प्रतिशत टूटकर 82,626.76 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई का निफ्टी 336.10 अंक यानी 1.30 प्रतिशत गिरकर 25,471.10 पर आ गया। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1,140 अंक और निफ्टी 360 अंक तक लुढ़क गया।

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मिडकैप और आईटी स्टॉक्स में भारी नुकसान

बीएसई मिडकैप का कुल बाजार पूंजीकरण 472.48 लाख करोड़ रुपये से घटकर 465.31 लाख करोड़ रुपये रह गया। पिछले तीन दिनों में आईटी कंपनियों के शेयरों ने लगभग छह लाख करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया। इसके चलते निवेशकों में चिंता बढ़ी और बिकवाली तेज हुई।

क्यों गिरा शेयर बाजार?

विशेषज्ञों के अनुसार, सेंसेक्स की गिरावट के पीछे कई कारण हैं:

  1. धातु और जिंस शेयरों में मुनाफावसूली: Tata Steel और Adani Ports जैसे शेयरों में भारी बिकवाली हुई।
  2. आईटी स्टॉक्स पर एआई की चिंता: AI टेक्नोलॉजी के बढ़ते प्रभाव को लेकर निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।
  3. वैश्विक बाजारों की कमजोरी: अमेरिकी और एशियाई बाजारों में गिरावट ने घरेलू शेयर बाजार को भी प्रभावित किया।

सेंसेक्स की 30 में से 28 कंपनियों के शेयर लाल निशान में बंद हुए। Hindustan Unilever, Titan, TCS, Reliance, HDFC Bank, HCL Technologies जैसी दिग्गज कंपनियों में प्रमुख गिरावट रही। केवल Bajaj Finance और State Bank of India ही लाभ में बंद हुए।

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वैश्विक संकेत और निवेशकों की सतर्कता

वैश्विक संकेत और निवेशकों की सतर्कता
वैश्विक संकेत और निवेशकों की सतर्कता

जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के विनोद नायर के अनुसार, अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़ों से पहले कमजोर वैश्विक संकेत और AI से जुड़े जोखिमों ने निवेशकों की सतर्कता बढ़ा दी। एशियाई बाजारों में भी Hang Seng, Shanghai Composite, Nikkei 225 और KOSPI नुकसान में रहे। अमेरिकी बाजार ने भी करीब 2 प्रतिशत गिरावट दर्ज की।

एफआईआई और डीआईआई का रुख

हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 108.42 करोड़ रुपये की और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 276.85 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। यह निवेशकों की हिस्सेदारी में संतुलन बनाता दिखा, लेकिन कुल मिलाकर बाजार पर दबाव ज्यादा रहा।

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तेल की कीमतें और बाजार पर असर

वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड में 0.32 प्रतिशत की बढ़त हुई और कीमत 67.81 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता ने भी बाजार के मंदी के मूड को और तेज किया।