Stock Market Crash: दबाव में भारतीय शेयर बाजार, सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट के पीछे पांच अहम वजहें

दलाल स्ट्रीट पर 'ब्लैक फ्राइडे': ट्रंप की एक जिद ने कैसे डूबा दिए निवेशकों के 13 लाख करोड़? भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को उस वक्त मातम छा गया जब सेंसेक्स और निफ्टी ने गोता लगा दिया। 500% अमेरिकी टैरिफ की लटकती तलवार, विदेशी निवेशकों (FII) का पलायन और तीसरी तिमाही के नतीजों के डर ने बाजार की कमर तोड़ दी है। आखिर क्या सोमवार को भी जारी रहेगी यह तबाही या लौटेगी हरियाली? जानें गिरावट की 5 बड़ी इनसाइड स्टोरी।

Stock Market Crash

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 9, 2026

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Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में पिछले पांच कारोबारी सत्रों से लगातार कमजोरी देखने को मिल रही है। वैश्विक व्यापार को लेकर बढ़ती अनिश्चितता, वाशिंगटन में तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रम और बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों ने निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया है। जोखिम लेने की क्षमता घटने के कारण निवेशक सतर्क हो गए हैं, जिसका सीधा असर बाजार की चाल पर पड़ा है।

सेंसेक्स और निफ्टी पर दबाव साफ नजर आया

लगातार बिकवाली के चलते बीएसई सेंसेक्स बीते पांच दिनों में 2,100 अंकों से ज्यादा टूट चुका है। 2 जनवरी को सेंसेक्स जहां 85,762.01 के स्तर पर बंद हुआ था, वहीं शुक्रवार को इंट्रा-डे कारोबार में यह फिसलकर 83,506.79 तक पहुंच गया। इसी तरह निफ्टी भी कमजोरी के दबाव में आकर 25,700 के अहम स्तर से नीचे चला गया, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई।

विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली बनी सबसे बड़ी वजह

इस गिरावट की सबसे प्रमुख वजह विदेशी निवेशकों की जबरदस्त बिकवाली मानी जा रही है। वैश्विक अनिश्चितता और उभरते बाजारों से पूंजी निकालने के रुझान के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 8 जनवरी को अकेले 3,367.12 करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले। लगातार हो रही इस निकासी ने घरेलू निवेशकों की धारणा को भी कमजोर किया और बाजार पर दबाव बढ़ता चला गया।

ट्रंप की ट्रेड और टैरिफ नीति से बढ़ी चिंता

दूसरा बड़ा कारण अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ट्रेड और टैरिफ से जुड़ी अनिश्चित बयानबाजी है। रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत समेत कई देशों पर सख्त रुख अपनाने की चेतावनी ने निवेशकों को डरा दिया है। अमेरिका में एक नए प्रस्तावित बिल की चर्चा है, जिसके तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। इस तरह की आशंकाओं ने वैश्विक बाजारों के साथ भारतीय शेयर बाजार में भी डर का माहौल बना दिया है।

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता से नहीं निकला समाधान

भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ता में ठोस नतीजे न निकल पाना भी बाजार की कमजोरी की एक अहम वजह है। मार्च से अब तक करीब छह दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन किसी व्यापक समझौते पर सहमति नहीं बन सकी है। पहले ही ट्रंप प्रशासन भारत पर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगा चुका है, जिसमें 25 प्रतिशत बेस टैरिफ और 25 प्रतिशत जुर्माने के रूप में शामिल है। इस मुद्दे पर जारी अनिश्चितता निवेशकों को परेशान कर रही है।

कच्चे तेल की कीमतों से बढ़ा दबाव

तेल की कीमतों में बढ़ता तनाव भी शेयर बाजार के लिए नकारात्मक संकेत दे रहा है। रूस से सस्ते कच्चे तेल की आपूर्ति पर अनिश्चितता और आयात पर भारत की भारी निर्भरता के चलते निवेशक वैश्विक घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई बढ़ने और चालू खाता घाटे पर दबाव आने की आशंका रहती है, जो बाजार के लिए जोखिम पैदा करती है।

कमजोर रुपया बना निवेशकों की चिंता

इन सभी कारणों के बीच भारतीय रुपये की कमजोरी ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले साल करीब 4 प्रतिशत गिरने के बाद रुपया अब डॉलर के मुकाबले 91 के स्तर को पार कर चुका है। भारतीय रिजर्व बैंक के सीमित हस्तक्षेप के बावजूद रुपये में जारी गिरावट ने विदेशी पूंजी के प्रवाह और बाजार की स्थिरता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सतर्क रुख अपनाए हुए हैं निवेशक

कुल मिलाकर विदेशी बिकवाली, वैश्विक अनिश्चितता, ट्रेड वार्ता की नाकामी, तेल कीमतों का दबाव और कमजोर रुपया—इन सभी कारकों ने मिलकर भारतीय शेयर बाजार को दबाव में डाल दिया है। मौजूदा हालात में निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और आगे के वैश्विक व घरेलू संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।

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