स्टील-सीमेंट उद्योगों को मिलेगी स्वच्छ बिजली, भारत विकसित करेगा स्वदेशी स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर

जमशेदपुर देश के भारी उद्योगों को प्रदूषणमुक्त बनाने और वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा के लक्ष्य को भेदने के लिए भारत अब छोटी आणविक इकाइयों की राह पर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआइएल) और भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) ने संयुक्त रूप से स्वदेशी भारत स्माल माड्यूलर रिएक्टर (बीएसएमआर) विकसित करने का बीड़ा उठाया है। एनपीसीआइएल के कॉरपोरेट संचार प्रमुख उमेद यादव ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह नवाचार देश के इस्पात, एल्युमिनियम और सीमेंट जैसे बुनियादी उद्योगों के लिए गेम चेंजर साबित होगा। कारखानों के मुहाने पर

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Published On :

अक्टूबर 27, 2026

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जमशेदपुर
देश के भारी उद्योगों को प्रदूषणमुक्त बनाने और वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा के लक्ष्य को भेदने के लिए भारत अब छोटी आणविक इकाइयों की राह पर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।

न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआइएल) और भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) ने संयुक्त रूप से स्वदेशी भारत स्माल माड्यूलर रिएक्टर (बीएसएमआर) विकसित करने का बीड़ा उठाया है।

एनपीसीआइएल के कॉरपोरेट संचार प्रमुख उमेद यादव ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह नवाचार देश के इस्पात, एल्युमिनियम और सीमेंट जैसे बुनियादी उद्योगों के लिए गेम चेंजर साबित होगा।

कारखानों के मुहाने पर पैदा होगी स्वच्छ बिजली
यादव ने रेखांकित किया कि पारंपरिक 700 मेगावाट क्षमता वाले विशाल प्रेशराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टरों (पीएचडब्ल्यूआर) को लगाने में व्यापक भूखंड, भारी पूंजी और लंबा समय लगता है।

इसके विपरीत, फैक्ट्री-निर्मित बीएसएमआर और भारत स्मॉल रिएक्टर्स (बीएसआर) को बहुत कम जगह तथा न्यूनतम लागत पर खड़ा किया जा सकता है। इन्हें सीधे औद्योगिक परिसरों या कैप्टिव पावर क्लस्टरों के निकट स्थापित किया जा सकेगा।

इससे ट्रांसमिशन लाइन बिछाने का झंझट खत्म होगा और ग्रिड पर निर्भरता के बिना संयंत्रों को 24 घंटे विश्वसनीय, सुरक्षित और शून्य-कार्बन ऊर्जा हासिल होगी।

निजी क्षेत्र की पूंजी से कार्बन मुक्ति को गति
प्रस्तुति के आंकड़ों के मुताबिक, केंद्र सरकार ने सघन जीवाश्म ईंधन खपत वाले उद्योगों के डी-कार्बोनाइजेशन के लिए इस क्षेत्र में निजी निवेश के रास्ते खोल दिए हैं।

वर्ष 2047 तक नियोजित कुल 100 गीगावाट क्षमता में से लगभग 39 से 42 गीगावाट बिजली निजी कंपनियों और अन्य सार्वजनिक उपक्रमों की साझेदारी से तैयार की जानी है। टाटा, रिलायंस और अडाणी समूह जैसे प्रमुख उद्योग घराने इस तकनीक में अपनी व्यावसायिक दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

2047 तक एनपीसीआईएल देगा 54 गीगावाट ऊर्जा
उमेद यादव ने स्पष्ट किया कि एनपीसीआईएल अकेले 53,508 मेगावाट (करीब 54 गीगावाट) परमाणु ऊर्जा का योगदान देगा। वर्तमान में 8,780 मेगावाट क्षमता वाले 24 रिएक्टर क्रियाशील हैं, जबकि 7,500 मेगावाट के नौ रिएक्टर निर्माणाधीन हैं।

इसके अलावा 9,800 मेगावाट के 14 रिएक्टर पूर्व-परियोजना चरण में हैं। वर्ष 2031-32 तक देश की परमाणु क्षमता 22 गीगावाट पार कर जाएगी। उन्होंने कहा कि फ्लीट मोड के बड़े रिएक्टरों के समानांतर छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर मिलकर 2070 के नेट-जीरो कार्बन संकल्प को सिद्धि तक पहुंचाएंगे।

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