Starlink Controversy: भारत में स्टारलिंक की सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं को लेकर छिड़े विवाद के बीच राजनीति गरमा गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को इस मुद्दे पर एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि देश में ऐसा व्यावसायिक माहौल होना चाहिए, जहां हर कारोबार को निष्पक्ष रूप से प्रतिस्पर्धा करने का उचित अवसर मिले।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस पार्टी और वे खुद राजनीतिक संरक्षण वाले पूंजीवाद (क्रोनी कैपिटलिज्म) की व्यवस्था को पूरी तरह खत्म करने के पक्ष में हैं। वे ऐसी अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं जो भाई-भ भतीजावाद या राजनीतिक कृपा के बजाय केवल नवाचार (Innovation) और कड़ी मेहनत के दम पर आगे बढ़े।
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एलन मस्क और राहुल गांधी के बीच सोशल मीडिया पर चर्चा

यह पूरा घटनाक्रम अमेरिकी अरबपति और कारोबारी एलन मस्क के साथ सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर हुई राहुल गांधी की बातचीत के ठीक एक दिन बाद सामने आया है। स्टारलिंक के लाइसेंस को लेकर चल रहे गतिरोध के बीच एलन मस्क ने भारत सरकार की नीतियों और घरेलू प्रतिस्पर्धा पर बड़ा सवाल उठाया था। मस्क ने सोशल मीडिया पर तीखा सवाल करते हुए लिखा था कि स्टारलिंक को दुनिया के 165 से अधिक देशों में लाइसेंस मिल चुका है और कंपनी ने भारत के सभी नियमों का पालन करने में पांच साल बिताए हैं, फिर भी अब तक लाइसेंस क्यों नहीं दिया गया? मस्क ने यह तक पूछ लिया था कि क्या रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ही भारत के असली बॉस हैं?
इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने मस्क का स्वागत किया था और कहा था कि दूसरे शख्स के बारे में जानने के बाद थोड़ा इंतजार कीजिए। इसके अगले दिन राहुल गांधी ने अपने व्हाट्सएप चैनल पर एक वीडियो और संदेश साझा करते हुए अपने रुख को और स्पष्ट किया। इस वीडियो में मस्क के साथ हुई उनकी बातचीत के अंश भी शामिल थे, जिसमें राहुल गांधी यह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि, “मैं कारोबार के खिलाफ नहीं हूं, मैं एकाधिकार (Monopoly) के खिलाफ हूं।”
भारत सरकार का कड़ा रुख और सुरक्षा मानकों की अनिवार्यता

दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने एलन मस्क द्वारा लगाए गए उन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें यह कहा गया था कि घरेलू कारोबारी हितों के कारण स्टारलिंक की सेवाओं को रोका जा रहा है। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि देश में सैटेलाइट संचार सेवाओं का संचालन करने के लिए सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य है और इसमें किसी भी तरह की ढील नहीं दी जा सकती।
सरकार के अनुसार, देश में अब तक तीन प्रमुख कंपनियों को सैटेलाइट कम्युनिकेशंस के लिए लाइसेंस दिए जा चुके हैं। इनमें एलन मस्क की स्टारलिंक, रिलायंस जियो का उपक्रम जियो सैटकॉम और भारती समूह समर्थित यूटेलसैट वनवेब शामिल हैं। हालांकि, सरकार ने यह भी साफ किया है कि इनमें से कोई भी कंपनी तब तक अपनी व्यावसायिक सेवाएं शुरू नहीं कर सकती, जब तक कि सभी आवश्यक सुरक्षा आकलन, स्पेक्ट्रम आवंटन और कानूनी मंजूरियां पूरी नहीं हो जातीं।
स्वतंत्र प्रतिस्पर्धा बनाम एकाधिकार की बहस

राहुल गांधी के इस बयान और एलन मस्क के तीखे सवालों ने देश के टेलीकॉम और टेक सेक्टर में एक बार फिर कॉरपोरेट एकाधिकार और ओपन मार्केट कॉम्पिटिशन की बहस को तेज कर दिया है। एक तरफ जहां सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा और तकनीकी अनुपालन को प्राथमिकता दे रही है, वहीं विपक्ष का यह आरोप है कि कुछ चुनिंदा औद्योगिक घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए विदेशी और नई कंपनियों के रास्ते रोके जा रहे हैं। इस पूरे विवाद ने भारत के डिजिटल और सैटेलाइट ब्रॉडबैंड बाजार में आने वाले दिनों की बड़ी प्रतिस्पर्धा की नींव रख दी है।
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