Women Reservation Bill: जाति जनगणना और परिसीमन पर छिड़ी जंग! सोनिया गांधी ने मोदी सरकार की मंशा पर उठाए सवाल!

कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर महिला आरक्षण की आड़ में खतरनाक 'परिसीमन' की राजनीति करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि 2021 की जनगणना टालना और बिना सर्वदलीय बैठक के विशेष सत्र बुलाना विपक्ष पर दबाव बनाने की रणनीति है। गांधी ने मांग की कि सीटों का बंटवारा केवल गणित नहीं, बल्कि निष्पक्ष होना चाहिए।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अप्रैल 13, 2026

Women Reservation Bill: कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र में लिखे अपने लेख के जरिए उन्होंने संसद के विशेष सत्र और महिला आरक्षण कानून के कार्यान्वयन में हो रही देरी को लेकर सरकार की रणनीतियों को ‘संविधान विरोधी’ करार दिया है।

परिसीमन का डर और संवैधानिक खतरा

सोनिया गांधी ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि आगामी विशेष सत्र के पीछे सरकार का वास्तविक उद्देश्य महिला सशक्तिकरण नहीं, बल्कि सीमा पुनर्निर्धारण (परिसीमन) की नींव रखना है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए किया जाने वाला परिसीमन केवल जनसंख्या के गणितीय आधार पर हुआ, तो यह देश की एकता के लिए खतरनाक साबित होगा। उनके अनुसार, सीटों का बंटवारा राजनीतिक रूप से निष्पक्ष और राज्यों के हितों को ध्यान में रखकर होना चाहिए, न कि केवल संख्या बल के आधार पर।

विपक्षी एकजुटता पर प्रहार

लेख में जाति आधारित जनगणना को लगातार टालने की सरकारी नीति पर भी सवाल उठाए गए हैं। गांधी का मानना है कि केंद्र सरकार जानबूझकर जनगणना में देरी कर रही है ताकि ओबीसी और अन्य पिछड़ों के वास्तविक आंकड़ों को छिपाया जा सके। साथ ही, उन्होंने विशेष सत्र बुलाने के समय पर आपत्ति जताते हुए कहा कि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में चुनावी सरगर्मियों के बीच सत्र बुलाना विपक्ष की चुनाव प्रचार क्षमता को प्रभावित करने की एक सोची-समझी चाल है।

आरक्षण पर गतिरोध

सोनिया गांधी ने महिला आरक्षण कानून (2023) का जिक्र करते हुए कहा कि अनुच्छेद 334-A जोड़कर सरकार ने इसे जनगणना और परिसीमन की शर्त से बांध दिया है। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस और मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस आरक्षण को 2024 के चुनावों से ही प्रभावी बनाने की पुरजोर मांग की थी। उन्होंने सवाल किया कि यदि सरकार अब 2029 से इसे लागू करने के लिए संशोधन पर विचार कर रही है, तो पिछले 30 महीनों तक इस दिशा में कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया?

प्रधानमंत्री से सीधे प्रश्न

सोनिया गांधी ने संसदीय कार्यप्रणाली और सर्वदलीय बैठकों की कमी को लेकर सीधे प्रधानमंत्री से जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा बार-बार पत्र लिखे जाने के बावजूद सरकार ने 29 अप्रैल के बाद बैठक बुलाने की मांग को अनसुना कर दिया। गांधी के अनुसार, 16 अप्रैल से शुरू हो रहे सत्र के एजेंडे को गुप्त रखना सरकार की अलोकतांत्रिक कार्यशैली और पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है।

अंत में, उन्होंने 2021 की जनगणना न होने के दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला। गांधी ने कहा कि डिजिटल जनगणना के नाम पर आंकड़ों को 2027 तक खींचना करोड़ों भारतीयों को सरकारी योजनाओं के लाभ से दूर रखने जैसा है। पहले जाति जनगणना का विरोध करना और फिर उसे स्वीकार करना सरकार के विरोधाभासी रवैये को उजागर करता है। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि सरकार की यह जल्दबाजी केवल राजनीतिक लाभ के लिए है, न कि जनता की भलाई के लिए।