Sonam Wangchuk: वादा तोड़कर सरकार ने तोड़ा भरोसा, सोनम वांगचुक का बड़ा आरोप

26 दिन का अनशन खत्म करने के बाद सोनम वांगचुक ने ऐसा दावा किया जिसने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने तय समझौते का पालन नहीं किया और कुछ ही मिनटों में भरोसा टूट गया। आखिर बैठक में क्या हुआ और तस्वीरें कैसे बाहर पहुंचीं, जानिए पूरी कहानी।

सोनम वांगचुक का बड़ा आरोप

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अगस्त 6, 2026

Sonam Wangchuk: सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारों के समर्थक सोनम वांगचुक ने अपने 26 दिन लंबे अनशन को समाप्त करने के बाद पहली बार विस्तार से बताया कि आखिर किन परिस्थितियों में उन्होंने यह फैसला लिया। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार के कुछ वरिष्ठ मंत्रियों ने उनके साथ हुई बातचीत के दौरान किए गए वादे का पालन नहीं किया, जिससे उनका भरोसा टूट गया। वांगचुक का कहना है कि वह इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक रंग देने के बजाय सभी पक्षों की भागीदारी के साथ एक साझा पहल के रूप में पेश करना चाहते थे।

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संयुक्त घोषणा की थी इच्छा

एक समाचार चैनल को दिए साक्षात्कार में सोनम वांगचुक ने बताया कि उनकी केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ देर रात बैठक हुई थी। इस मुलाकात के दौरान यह सहमति बनी थी कि बैठक की तस्वीरें और अनशन समाप्त करने की जानकारी तब तक सार्वजनिक नहीं की जाएगी, जब तक विपक्षी दलों और छात्र प्रतिनिधियों को भी इस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनाया जाता। उनका कहना था कि उद्देश्य केवल सरकार की उपलब्धि दिखाना नहीं, बल्कि यह संदेश देना था कि छात्रों और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर सभी पक्ष एक साथ खड़े हैं।

तस्वीरें समय से पहले हुईं सार्वजनिक

वांगचुक के अनुसार, बैठक के दौरान मंत्रियों की ओर से फोटोग्राफर भी बुलाए गए थे। उन्होंने स्पष्ट रूप से अनुरोध किया था कि किसी भी तस्वीर को मीडिया में जारी नहीं किया जाएगा, जब तक सभी संबंधित पक्षों की मौजूदगी में संयुक्त घोषणा न हो जाए। हालांकि, उनका आरोप है कि कुछ ही मिनटों में यह समझौता टूट गया और तस्वीरें विभिन्न टीवी चैनलों पर प्रसारित होने लगीं। उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम से उन्हें गहरा धक्का लगा, क्योंकि जिस भरोसे के आधार पर उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया था, वही भरोसा टूट गया।

लद्दाख की परंपरा का भी किया जिक्र

सोनम वांगचुक ने बताया कि लद्दाख में लंबे समय से यह परंपरा रही है कि जब किसी आंदोलनकारी की मांगों पर सकारात्मक पहल होती है, तो सरकारी प्रतिनिधि स्वयं जूस या सूप पिलाकर उसका उपवास समाप्त करवाते हैं। लेकिन उनका मानना था कि इस परंपरा को किसी एक राजनीतिक दल के कार्यक्रम की तरह प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि विपक्षी नेताओं, छात्र संगठनों और अन्य प्रतिनिधियों को भी साथ रखा जाता, तो यह लोकतांत्रिक सहमति और सहयोग का बेहतर उदाहरण बनता।

अनशन समाप्त करने से पहले रखी थी स्पष्ट शर्त

वांगचुक के मुताबिक, उन्होंने मंत्रियों से साफ कहा था कि वे अनशन खत्म करने को तैयार हैं, लेकिन इसकी घोषणा उनकी तय शर्तों के अनुसार ही होनी चाहिए। उन्होंने आग्रह किया था कि खबर तभी जारी की जाए, जब विपक्ष और छात्र प्रतिनिधियों की मौजूदगी में साझा तस्वीरें भी ली जाएं, ताकि यह किसी एक पक्ष की सफलता नहीं बल्कि सामूहिक प्रयास दिखाई दे।

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आईबी अधिकारियों को बनाया गया था गवाह

सोनम वांगचुक ने यह भी बताया कि बैठक में मौजूद इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के वरिष्ठ अधिकारियों को इस सहमति का गवाह बनाया गया था। उन्होंने अधिकारियों से कहा था कि जब तक सभी पक्षों के साथ संयुक्त रूप से जानकारी साझा नहीं की जाती, तब तक किसी भी मीडिया संस्थान को तस्वीरें उपलब्ध नहीं कराई जाएं। हालांकि, उनके अनुसार कुछ ही मिनटों बाद एक वरिष्ठ आईबी अधिकारी उनके पास पहुंचे और बताया कि किसी तरह तस्वीरें पहले ही टेलीविजन चैनलों तक पहुंच चुकी हैं। वांगचुक का कहना है कि इस घटना ने उनके विश्वास को गहरी ठेस पहुंचाई और पूरे घटनाक्रम पर कई सवाल खड़े कर दिए।