Sonam Wangchuk: देश में लचर शिक्षा व्यवस्था और बार-बार हो रहे पेपर लीक के खिलाफ आमरण अनशन पर बैठे विख्यात सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त करने के संकेत दिए हैं। वांगचुक ने केंद्र सरकार को एक आधिकारिक पत्र लिखकर आश्वासन दिया है कि वे अपना अनशन खत्म करने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए उन्होंने सरकार के सामने एक बेहद महत्वपूर्ण और कड़ी शर्त रख दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार युवाओं की सुरक्षा का भरोसा देती है, तभी वह अपना अनशन तोड़ेंगे।
CJP Protest: आंदोलन पर अड़ा CJP, सरकार के सामने रखीं चार अहम शर्तें
केंद्रीय मंत्रियों को लिखी चिट्ठी
सोनम वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह को संबोधित करते हुए यह पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने अस्पताल में आकर उनसे मिलने और अनशन खत्म करने की अपील करने के लिए दोनों मंत्रियों का आभार जताया। इसके साथ ही उन्होंने अपनी मुख्य शर्त सामने रखी:
युवाओं को न बनाया जाए निशाना: वांगचुक ने पत्र में लिखा, ‘मैं सरकार से सम्मानपूर्वक यह स्पष्ट आश्वासन चाहता हूं कि इस आंदोलन में भाग लेने वाले किसी भी युवा प्रदर्शनकारी को किसी भी प्रकार की दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कानूनी कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा। इन नौजवानों का एकमात्र अपराध एक निष्पक्ष और जवाबदेह शिक्षा प्रणाली के लिए अपनी आवाज उठाना रहा है।’
लाखों भारतीयों की आकांक्षा का सम्मान: उन्होंने आगे लिखा कि अगर सरकार की तरफ से ऐसा सुरक्षात्मक आश्वासन दिया जाता है, तो वे इस भरोसे के साथ अपना अनशन खत्म कर देंगे कि सरकार ने न केवल उनकी अपील सुनी है, बल्कि देश के लाखों युवा भारतीयों की आकांक्षाओं और दर्द को भी समझा है।
मंत्रियों से बातचीत और मुआवजे व जवाबदेही पर मिला भरोसा
सोनम वांगचुक ने मंत्रियों के साथ हुई अपनी उच्च स्तरीय वार्ता का जिक्र करते हुए पत्र में कुछ प्रमुख बिंदुओं को रेखांकित किया, जिन पर सकारात्मक विचार करने का भरोसा सरकार की ओर से दिया गया है:
पीड़ित परिवारों को मुआवजा: परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद गहरे मानसिक तनाव और अवसाद के कारण आत्महत्या करने वाले बेकसूर छात्रों के परिवारों को सरकार उचित वित्तीय मुआवजा प्रदान करे।
संसद में सार्थक चर्चा और इस्तीफा: देश की शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने के लिए संसद में इस विषय पर एक गंभीर व सार्थक चर्चा आयोजित की जाए, जिसमें माननीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर विचार करना भी शामिल हो।
शांतिपूर्ण रहा ‘संसद चलो मार्च’: वांगचुक ने 20 जुलाई 2026 को हुए ‘संसद चलो मार्च’ का उल्लेख करते हुए कहा कि पुलिस की भारी ज्यादती और जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग के बावजूद छात्रों का यह प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। पूरे देश और दुनिया ने लोकतांत्रिक विरोध के प्रति भारतीय युवाओं के धैर्य और अटूट प्रतिबद्धता को देखा है।
65 सांसदों ने की अपील
सोनम वांगचुक ने देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं में भरोसा जताते हुए अपने भविष्य के कदम के बारे में भी स्थिति साफ की है:
सांसदों का मिला समर्थन: मंत्रियों की यात्रा के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने वांगचुक को पत्र लिखकर और व्यक्तिगत रूप से मिलकर अपना अनशन खत्म करने का आग्रह किया है। सांसदों ने उन्हें याद दिलाया कि देश की सेवा के लिए उनका जीवन बेहद कीमती है।
जीना चाहता हूं, लेकिन युवाओं की कीमत पर नहीं: वांगचुक ने लिखा, ‘मैं सांसदों की बात से सहमत हूं। मैं जीना चाहता हूं। मैं अपने छात्रों, शिक्षा और उस रचनात्मक काम में वापस लौटना चाहता हूं जिसने मेरे जीवन को पहचान दी है। लेकिन मैं यह सब उन युवाओं के भविष्य की कीमत पर नहीं कर सकता, जिनके हक के लिए यह आंदोलन शुरू हुआ था।’
आर-पार की चेतावनी: उन्होंने साफ लफ्जों में चेतावनी दी कि यदि सरकार युवाओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई न करने का स्पष्ट आश्वासन नहीं देती है, तो वे अनिश्चित काल तक अपना अनशन जारी रखने के लिए मजबूर हो जाएंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस द्वारा दोबारा बल प्रयोग नहीं किया जाएगा। वांगचुक ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि हमारे लोकतंत्र का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि वह अपने उन युवा नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार करता है जो साहस और दृढ़ विश्वास के साथ सच बोलने की हिम्मत दिखाते हैं।
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