Sonam Wangchuk Case: पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में रखे जाने और उन्हें निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की मांग के बीच, उनकी पत्नी डॉ. गीतांजलि आंग्मो ने सरकार और अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे चिकित्सकीय देखभाल के बजाय ‘गैर-कानूनी हिरासत’ करार दिया है। डॉ. आंग्मो ने आरोप लगाया कि सोनम वांगचुक की सेहत खराब होने का दावा पूरी तरह से बनावटी है और इसके पीछे मुख्य उद्देश्य उनके प्रस्तावित मार्च को रोकना था।
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‘स्वास्थ्य बिगड़ने का दावा कोरा झूठ’
डॉ. गीतांजलि ने स्पष्ट किया कि सोनम वांगचुक की सेहत अस्पताल लाने से पहले बिल्कुल सामान्य थी। उन्होंने बताया, “अस्पताल लाने के एक दिन पहले शाम की मेडिकल रिपोर्ट में उनके सभी पैरामीटर्स, विशेषकर पोटैशियम स्तर (4.3), पूरी तरह सामान्य थे।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने उनकी सेहत की चिंता का दिखावा मात्र किया है। उन्होंने सवाल किया कि यदि प्रशासन वास्तव में चिंतित था, तो उन्हें सिविल ड्रेस में पुलिस बल भेजकर इतनी बेरहमी से स्ट्रेचर पर उठाने की क्या आवश्यकता थी? यह सब केवल एक ‘नौटंकी’ है जिसका मकसद उन्हें डराना है।
मार्च रोकने के लिए किया गया ‘मिसयूज’
डॉ. आंग्मो का मानना है कि सोनम वांगचुक के नेतृत्व में होने वाले शांति मार्च से सरकार को डर था। उन्होंने कहा, “सरकार को डर था कि यदि सोनम मार्च में निकले, तो लाखों लोग उनके साथ जुड़ जाएंगे। वे उन्हें रोकना चाहते थे, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि सोनम की अनुपस्थिति में जनता का उत्साह दोगुना हो जाएगा।” उन्होंने प्रशासनिक और न्यायिक तंत्र के ‘दुरुपयोग’ का आरोप लगाते हुए कहा कि शिक्षा प्रणाली, मीडिया और पुलिस बल का इस्तेमाल इस तरह से करना स्पष्ट करता है कि यह मामला स्वास्थ्य संबंधी न होकर राजनीतिक है।
रिपोर्टों में विसंगति और ‘जेल जैसा माहौल’
डॉ. गीतांजलि ने अस्पताल की मेडिकल रिपोर्टों की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने बताया कि जब सुबह उन्हें अस्पताल लाया गया, तो पोटैशियम का स्तर 2.9 बताया गया, जबकि शाम को वही स्तर 3.6 पाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके द्वारा मांगे गए ब्लड सैंपल को देने में अस्पताल प्रशासन ने 10 घंटे की देरी की, ताकि वे किसी स्वतंत्र लैब से जांच न करवा सकें।
इसके अलावा, अस्पताल के माहौल को उन्होंने ‘जोधपुर जेल’ जैसा बताया। उन्होंने कहा कि उनके कमरे के बाहर और अंदर पुलिसकर्मियों की मौजूदगी, ग्लास के दरवाजों से लगातार निगरानी और निजी डॉक्टरों को मिलने न देना, एक मरीज के लिए मानसिक तनाव बढ़ाने वाला है। उनके अनुसार, तनाव के कारण ही सोनम का ब्लड प्रेशर 110/70 से बढ़कर 125/85 हो गया है।
‘यह गैर-कानूनी डिटेंशन है’
डॉ. आंग्मो ने अंत में यह स्पष्ट किया कि उनके पास किसी भी प्रकार का लिखित सरकारी आदेश नहीं है जिसके तहत उन्हें वहां जबरन रखा गया है। उन्होंने इसे ‘अनसेड इल्लीगल डिटेंशन’ (अघोषित गैर-कानूनी हिरासत) बताते हुए कहा कि यह देश के लिए एक चिंताजनक स्थिति है कि एक स्वतंत्र नागरिक अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज नहीं करा सकता। सरकार यह तय कर रही है कि उनका इलाज कहां होगा, जो कि पूरी तरह से गलत और लोकतंत्र की मूल भावना के विरुद्ध है।
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