Smartphone New Rules 2026: भारत में स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले करोड़ों लोगों के लिए नवंबर 2026 से कुछ अहम बदलाव शुरू हो गए हैं। केंद्र सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) और अन्य नियामक संस्थाओं ने मोबाइल सुरक्षा और गैजेट्स की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए नए नियमों की व्यवस्था की है। इनका असर मोबाइल पर आने वाली अनजान कॉल से लेकर फोन की स्क्रीन पर लगाए जाने वाले टेम्पर्ड ग्लास तक दिखाई देगा। नए बदलावों में कॉलर नेम प्रेजेंटेशन यानी CNAP सेवा और स्क्रीन प्रोटेक्टर के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) का गुणवत्ता प्रमाणन शामिल है। CNAP सेवा 1 नवंबर 2026 से शुरू हो चुकी है, जबकि स्क्रीन प्रोटेक्टर के लिए नए मानक अप्रैल 2027 से अनिवार्य होंगे। ऐसे में मोबाइल यूजर्स के लिए इन नियमों को समझना जरूरी है।
IIT Madras Technology: जमीन के 2.3 किमी नीचे छिपे तेल का चलेगा पता,
अनजान नंबर से कॉल आने पर स्क्रीन पर दिखेगा नाम
स्मार्टफोन यूजर्स के लिए सबसे अहम बदलाव कॉलर नेम प्रेजेंटेशन यानी CNAP सेवा है। 1 नवंबर 2026 से भारत में इस सुविधा को लागू करने की शुरुआत हो गई है। इसके तहत जब किसी मोबाइल नंबर से कॉल आएगी और वह नंबर फोन में सेव नहीं होगा, तो कॉलिंग स्क्रीन पर केवल नंबर ही नहीं, बल्कि सिम कार्ड धारक का नाम भी दिखाई दे सकेगा। यह नाम वही होगा, जो संबंधित व्यक्ति ने सिम कार्ड लेते समय केवाईसी प्रक्रिया के दौरान दर्ज कराया था। इससे अनजान नंबर से आने वाली कॉल की पहचान करना पहले के मुकाबले आसान हो सकता है।
ट्रूकॉलर जैसे थर्ड पार्टी ऐप की नहीं होगी जरूरत

अब तक अनजान नंबर से कॉल आने पर कॉलर की पहचान जानने के लिए बड़ी संख्या में लोग ट्रूकॉलर जैसे ऐप का इस्तेमाल करते रहे हैं। ये ऐप अपने डेटाबेस और उपलब्ध जानकारी के आधार पर कॉल करने वाले का नाम दिखाते हैं। लेकिन CNAP सेवा के जरिए टेलीकॉम नेटवर्क पर उपलब्ध केवाईसी जानकारी के आधार पर कॉलर का नाम दिखाने की व्यवस्था की जा रही है। इसका मतलब है कि उपयोगकर्ताओं को केवल कॉल करने वाले का नाम जानने के लिए अलग से कोई थर्ड पार्टी ऐप डाउनलोड करने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, स्क्रीन पर दिखाई देने वाला नाम सिम के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी पर निर्भर करेगा।
4G और 5G नेटवर्क पर शुरू हो रही CNAP सेवा
कॉलर नेम प्रेजेंटेशन सुविधा को फिलहाल 4G और 5G नेटवर्क पर चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जा रहा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य मोबाइल यूजर्स को अनजान कॉल की पहचान करने में मदद देना है। इससे स्पैम और संदिग्ध कॉल को पहचानने में भी सहायता मिल सकती है। हालांकि, कॉलिंग स्क्रीन पर नाम दिखाई देने के बावजूद किसी अनजान व्यक्ति पर आंख मूंदकर भरोसा करना सही नहीं होगा। बैंकिंग जानकारी, ओटीपी और अन्य निजी विवरण किसी अनजान कॉलर के साथ साझा नहीं करने चाहिए।
टेम्पर्ड ग्लास के लिए भी लागू होंगे BIS के नियम
स्मार्टफोन से जुड़ा दूसरा बड़ा बदलाव स्क्रीन प्रोटेक्टर यानी टेम्पर्ड ग्लास की गुणवत्ता को लेकर है। केंद्र सरकार के भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने मोबाइल स्क्रीन प्रोटेक्टर को गुणवत्ता मानकों के दायरे में शामिल किया है। इसके लिए IS 19348:2025 मानक निर्धारित किया गया है। इसका उद्देश्य बाजार में बिकने वाले स्क्रीन गार्ड की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और तय मानकों के अनुरूप उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा देना है।
1 अप्रैल 2027 से BIS प्रमाणन होगा अनिवार्य
स्क्रीन प्रोटेक्टर से संबंधित नए नियम 1 अप्रैल 2027 से अनिवार्य रूप से लागू होंगे। इसके बाद बाजार में केवल BIS प्रमाणित स्क्रीन गार्ड ही बेचे जा सकेंगे। यानी कंपनियों और विक्रेताओं को अपने उत्पादों के लिए निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन करना होगा। जो स्क्रीन प्रोटेक्टर इन मानकों पर खरे नहीं उतरेंगे, उनकी बिक्री प्रभावित हो सकती है। ग्राहकों को भी टेम्पर्ड ग्लास खरीदते समय BIS प्रमाणन की जानकारी देखनी होगी।
मोबाइल यूजर्स और कंपनियों पर क्या होगा असर?
इन दोनों बदलावों का उद्देश्य मोबाइल उपयोगकर्ताओं को बेहतर सुविधा और गुणवत्ता उपलब्ध कराना है। CNAP से अनजान कॉल की पहचान आसान हो सकती है, जबकि BIS नियमों से स्क्रीन प्रोटेक्टर की गुणवत्ता पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी। एक नियम नवंबर 2026 से शुरू हो चुका है और दूसरा अप्रैल 2027 से अनिवार्य होगा। ऐसे में मोबाइल यूजर्स के साथ-साथ मोबाइल एक्सेसरीज बनाने वाली कंपनियों और दुकानदारों को भी इन नए नियमों के अनुसार तैयारी करनी होगी।
Diwali Sale Gadgets: iPhone से पावर बैंक तक, दिवाली सेल में कौन सा गैजेट कितने में मिलेगा?











