Sindh Assembly: सिंध के बंटवारे पर विधानसभा का बड़ा फैसला, पाकिस्तान में बढ़ा सियासी तनाव

पाकिस्तान में सिंध के विभाजन को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। सिंध विधानसभा ने प्रांत को बांटने या उसकी सीमाएं बदलने के किसी भी प्रस्ताव को खारिज कर दिया। विपक्ष के वॉकआउट के बीच हुए इस फैसले ने नए प्रांतों और प्रशासनिक इकाइयों की बहस को और गरमा दिया है।

Sindh Assembly

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 7, 2026

Sindh Assembly : पाकिस्तान में सिंध प्रांत के संभावित विभाजन को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। सिंध असेंबली ने प्रांत को विभाजित करने अथवा नई प्रशासनिक इकाइयां बनाने से जुड़े प्रस्तावों को सर्वसम्मति से खारिज कर दिया। कराची को सिंध से अलग कर नया दक्षिणी प्रांत बनाने की चर्चाओं के बीच प्रांतीय नेताओं ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। सदन में इस मुद्दे को लेकर केंद्र की नीतियों पर भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।

कराची को अलग करने की चर्चाओं पर बढ़ा विरोध

सिंध के राजनीतिक दलों में कराची और प्रांत के अन्य हिस्सों को अलग प्रशासनिक इकाई में बांटने की संभावनाओं को लेकर नाराजगी है। विधानसभा में नेताओं ने स्पष्ट किया कि सिंध की भौगोलिक और राजनीतिक एकता से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस दौरान सेना प्रमुख असीम मुनीर और गृह मंत्री मोहसिन नकवी को लेकर भी नेताओं ने तीखे सवाल उठाए। हालांकि, इन नेताओं की भूमिका को लेकर किए जा रहे दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

पीपीपी नेतृत्व ने भी विभाजनकारी कदम का किया विरोध

सिंध में पाकिस्तान पीपल्स पार्टी की सरकार है और पार्टी नेतृत्व भी प्रांत के विभाजन के विचार के खिलाफ नजर आ रहा है। आसिफ अली जरदारी और बिलावल भुट्टो समेत पार्टी के प्रमुख नेताओं ने सिंध की मौजूदा भौगोलिक संरचना को बनाए रखने पर जोर दिया है। विधानसभा में मुख्यमंत्री और मंत्रियों के रुख से भी संकेत मिला कि पीपीपी इस मुद्दे पर केंद्र के किसी संभावित फैसले का विरोध कर सकती है।

मुराद अली शाह ने अखंड सिंध को लेकर दिया संदेश

सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने विधानसभा में कहा कि उनकी सरकार प्रांत की क्षेत्रीय अखंडता से समझौता नहीं करेगी। उन्होंने दावा किया कि विधानसभा में इस विषय पर पहले कोई व्यापक चर्चा नहीं हुई और इसके बावजूद विभाजन की चर्चा सामने आई। शाह ने साफ किया कि सिंध के बंटवारे का विचार स्वीकार्य नहीं है। उनके बयान के बाद सदन में राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया।

नए प्रांतों की योजना ने बढ़ाई पाकिस्तान में सियासी हलचल

पाकिस्तान में प्रशासनिक ढांचे के पुनर्गठन को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। इनमें मौजूदा चार बड़े प्रांतों को विभाजित कर अधिक प्रशासनिक इकाइयां बनाने का विचार भी शामिल बताया जा रहा है। प्रस्ताव के समर्थकों का तर्क है कि छोटे प्रांत प्रशासन और शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बना सकते हैं। वहीं, कई राजनीतिक दलों को आशंका है कि इससे क्षेत्रीय पहचान और राजनीतिक समीकरणों पर गहरा असर पड़ेगा।

मोहसिन नकवी के रुख से बढ़ा राजनीतिक टकराव

गृह मंत्री मोहसिन नकवी प्रशासनिक सुधार के लिए नए प्रांतों के गठन की जरूरत पर जोर देते रहे हैं। दूसरी ओर, सिंध में सत्तारूढ़ पीपीपी इस विचार को लेकर सहज नहीं दिखाई दे रही है। इसी मतभेद के कारण केंद्र और सिंध सरकार के बीच राजनीतिक दूरी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। मामला केवल प्रशासनिक पुनर्गठन तक सीमित न रहकर क्षेत्रीय पहचान का मुद्दा बनता जा रहा है।

जरदारी की नाराजगी और बलूचिस्तान की चुनौती

राष्ट्रपति और पीपीपी नेता आसिफ अली जरदारी के इस मुद्दे पर नाराज होने की खबरों के बीच गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने उनसे मुलाकात भी की है। जरदारी सिंध और बलूचिस्तान के संभावित विभाजन के पक्ष में नहीं बताए जा रहे हैं। बलूचिस्तान पहले से ही सुरक्षा चुनौतियों और उग्रवादी हिंसा से जूझ रहा है। ऐसे में नए प्रशासनिक विभाजन का मुद्दा पाकिस्तान के लिए राजनीतिक और सुरक्षा दोनों स्तरों पर चुनौती बढ़ा सकता है।

सिंध का मुद्दा बना पाकिस्तान की राजनीति का नया केंद्र

सिंध असेंबली के सर्वसम्मत रुख ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रांत के विभाजन का मुद्दा आसानी से स्वीकार नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में केंद्र सरकार, पीपीपी और अन्य राजनीतिक दलों के बीच इस विषय पर टकराव बढ़ सकता है। यदि नए प्रांतों के गठन की योजना आगे बढ़ती है, तो पाकिस्तान में क्षेत्रीय पहचान, प्रशासनिक अधिकार और राजनीतिक शक्ति के बंटवारे को लेकर व्यापक बहस छिड़ने की संभावना है।

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