Shiva Sharma Death Case : 10 दिन तक पुलिस को चकमा देती रही श्रद्धा दुबे, नागपुर में कैसे खुला राज?

शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत के बाद श्रद्धा दुबे 10 दिनों तक पुलिस की पकड़ से दूर रही। उसने सिम कार्ड फेंके, दूसरों के मोबाइल से इंटरनेट चलाया और लगातार ठिकाने बदले। नेपाल बॉर्डर से नागपुर तक पहुंची इस फरारी का अंत एक कैब चालक के मोबाइल से मिले सुराग के बाद हुआ।

Shiva Sharma Death Case

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अक्टूबर 22, 2026

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Shiva Sharma Death Case :  लखनऊ के कैफे संचालक शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में आरोपी यूट्यूबर श्रद्धा दुबे की गिरफ्तारी की कहानी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, घटना के बाद श्रद्धा करीब 10 दिनों तक फरार रही। इस दौरान उसने कथित तौर पर लगभग 2200 किलोमीटर की दूरी तय की और लगातार अपने ठिकाने बदलती रही। आखिरकार यूपी एसटीएफ और लखनऊ पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में उसे महाराष्ट्र के नागपुर से गिरफ्तार कर लिया गया।

सिम कार्ड फेंककर पुलिस की निगरानी से बचने की कोशिश

जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, मोबाइल फोन की लोकेशन ट्रेस होने से बचने के लिए श्रद्धा ने अपने सिम कार्ड निकालकर फेंक दिए थे। बातचीत के लिए फेसटाइम और व्हाट्सएप जैसे माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। इंटरनेट चलाने के लिए वह अपने फोन के बजाय दूसरे लोगों के मोबाइल कनेक्शन पर निर्भर रही। बताया जा रहा है कि राह चलते लोगों, रिक्शा चालकों और कैब ड्राइवरों के मोबाइल से इंटरनेट इस्तेमाल किया गया, जिससे जांचकर्ताओं के सामने आरोपियों तक पहुंचने की चुनौती बढ़ गई।

लोकल हॉटस्पॉट से इंटरनेट इस्तेमाल करने का तरीका

सूत्रों के मुताबिक, श्रद्धा और उसके साथ मौजूद लोग जिस वाहन में सफर करते थे, उसके चालक के मोबाइल से इंटरनेट कनेक्शन लेते थे। पुलिस इंटरनेट कनेक्शन और आईपी एड्रेस से जुड़े संकेतों की पड़ताल कर रही थी। हालांकि, शुरुआती जांच में कई बार कनेक्शन ऐसे लोगों के मोबाइल से जुड़ा मिला, जिनका आरोपियों से सीधे संबंध नहीं था। इससे वास्तविक लोकेशन का पता लगाने में परेशानी हुई। जांच टीम ने इन डिजिटल संकेतों को अन्य सुरागों के साथ जोड़कर आरोपियों की गतिविधियों का पता लगाने की कोशिश की।

कैब चालक के मोबाइल से मिला अहम सुराग

जांच में नागपुर जाने वाली कैब के चालक का मोबाइल अहम कड़ी बना। सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने इस मोबाइल के इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल किया था। कनेक्शन के सक्रिय होने और बीच-बीच में बंद होने के संकेतों के आधार पर पुलिस ने संबंधित रास्तों पर निगरानी बढ़ाई। फतेहपुर में लोकेशन मिलने के बाद प्रयागराज से एसटीएफ की टीम भी जांच में सक्रिय हुई। अलग-अलग स्थानों से मिले सुरागों को जोड़ते हुए जांच टीम नागपुर तक पहुंच गई।

नागपुर में फ्लैट तक पहुंची पुलिस

बताया जा रहा है कि कैब चालक आरोपियों को नागपुर छोड़कर वापस लौट रहा था। इसी दौरान लखनऊ पुलिस से मिले इनपुट के आधार पर नागपुर पुलिस ने चालक को पकड़ लिया। चालक से मिली जानकारी के सहारे पुलिस आरोपियों के ठिकाने तक पहुंची। इसके बाद 20 अक्टूबर 2026 को श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि दुबे और चालक दानिश को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के मुताबिक, फरारी के दौरान आरोपी नेपाल बॉर्डर तक गए थे और फिर आगरा के रास्ते नागपुर पहुंचे। हालांकि, इन गतिविधियों से जुड़े सभी तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि जांच के रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगी।

गिरफ्तारी से पहले लखनऊ पहुंची थी श्रद्धा

इस मामले में एक और अहम घटनाक्रम यह बताया गया कि गिरफ्तारी से ठीक पहले श्रद्धा लखनऊ आई थी और मीडिया के सामने भी पहुंची थी। इसके बावजूद वह दोबारा पुलिस की पकड़ से बाहर निकल गई। पुलिस लगातार उसके संभावित ठिकानों और संपर्कों की जांच कर रही थी। लगातार लोकेशन बदलने, सिम कार्ड का इस्तेमाल न करने और दूसरे लोगों के इंटरनेट कनेक्शन पर निर्भर रहने के बावजूद आखिरकार जांच टीम नागपुर में उसका पता लगाने में सफल रही।

9 अक्टूबर को हुई थी शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत

मामले की शुरुआत 9 अक्टूबर 2026 को हुई थी, जब लखनऊ के हजरतगंज इलाके में स्थित अवध ग्रीन अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से गिरने के बाद कैफे संचालक शिवा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। मृतक के परिवार ने श्रद्धा दुबे पर हत्या, मारपीट और ब्लैकमेल करने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत के बाद पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज किया। अब श्रद्धा, रश्मि और दानिश की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां घटना से जुड़े तथ्यों, कथित फरारी और आरोपों की कड़ियों की पड़ताल कर रही हैं। आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में होने वाली कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगी।

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