UP Election 2027 : मुहम्मदाबाद-गोहना में 2027 की जंग, दलित वोटों के साथ सपा-भाजपा की रणनीति पर नजर

मुहम्मदाबाद-गोहना में 2027 की चुनावी लड़ाई दिलचस्प होने के संकेत हैं। 2017 में भाजपा केवल 538 वोटों से जीती, जबकि 2022 में सपा ने 26,649 वोटों से बाजी मारी। दलित, यादव, मुस्लिम और पिछड़े वर्गों के बीच समर्थन का समीकरण क्या इस बार नतीजा बदल देगा? बसपा की भूमिका भी अहम होगी।

UP Election 2027

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अक्टूबर 22, 2026

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UP Election 2027 : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। मऊ जिले की मुहम्मदाबाद-गोहना विधानसभा सीट पर भी सभी प्रमुख दलों की नजर रहेगी। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित यह सीट दलित, यादव, मुस्लिम, चौहान, राजभर और अन्य पिछड़े वर्गों के राजनीतिक रुझानों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है। पिछले तीन विधानसभा चुनावों में यहां समाजवादी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली है। वर्ष 2022 में सपा के राजेंद्र कुमार ने भाजपा की पूनम सरोज को 26,649 वोटों से हराया था। इससे पहले 2017 में भाजपा के श्रीराम सोनकर ने बसपा के राजेंद्र कुमार को महज 538 वोटों से मात दी थी। इन नतीजों से साफ है कि इस सीट पर उम्मीदवार, सामाजिक गठबंधन और मतदाताओं का रुझान चुनावी परिणाम में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

उत्तर प्रदेश विधानसभा
उत्तर प्रदेश विधानसभा

2029 के लोकसभा चुनाव से पहले यूपी की अहम परीक्षा

उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों के चुनाव को राज्य की राजनीति के साथ राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रदेश लोकसभा में 80 सांसद भेजता है, इसलिए 2027 के विधानसभा परिणामों को 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की ताकत के संकेत के तौर पर देखा जा सकता है। भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस सहित विभिन्न दलों के सामने संगठन मजबूत करने, बूथ स्तर पर संपर्क बढ़ाने और अलग-अलग सामाजिक वर्गों को अपने पक्ष में लाने की चुनौती होगी। मुहम्मदाबाद-गोहना जैसी आरक्षित सीटों पर दलित मतदाताओं के साथ अन्य समुदायों का समर्थन हासिल करना भी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा रहेगा। हालांकि, विधानसभा चुनाव के परिणामों से 2029 के नतीजों का निश्चित अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

मुहम्मदाबाद-गोहना
मुहम्मदाबाद-गोहना

मुहम्मदाबाद-गोहना विधानसभा सीट एक नजर में

मुहम्मदाबाद-गोहना विधानसभा सीट का क्रमांक 355 है। यह मऊ जिले में आती है और घोसी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यहां समाजवादी पार्टी के राजेंद्र कुमार वर्तमान विधायक हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने 94,688 वोट हासिल किए थे, जबकि भाजपा की पूनम सरोज को 68,039 वोट मिले। बसपा के धर्म सिंह गौतम 56,350 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। सपा ने भाजपा को 26,649 मतों से हराया था। इससे पहले 2017 में भाजपा ने बेहद करीबी मुकाबले में सीट जीती थी, जबकि 2012 में समाजवादी पार्टी के बैजनाथ विजयी हुए थे।

मतदाता सूची
मतदाता सूची

2026 की मतदाता सूची में कितने मतदाता?

उपलब्ध अंतिम मतदाता आंकड़ों के अनुसार, मुहम्मदाबाद-गोहना विधानसभा क्षेत्र में 2026 में कुल 3,46,531 मतदाता दर्ज हैं। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या लगभग 3,81,374 बताई गई थी। इस तुलना में करीब 34,843 मतदाताओं की कमी दिखाई देती है, जो लगभग 9.14 प्रतिशत बैठती है। वर्ष 2012 में इस सीट पर 3,32,269 मतदाता दर्ज थे। हालांकि, अलग-अलग चुनावी संकलनों में मतदाता संख्या में मामूली अंतर हो सकता है। इसलिए इन आंकड़ों को उपलब्ध स्रोत के आधार पर समझना चाहिए। मतदाता सूची में कमी से अपने आप यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि किसी खास जाति या समुदाय के मतदाता घटे हैं। 2027 से पहले दलों के लिए अद्यतन मतदाता सूची और बूथवार आंकड़ों की समीक्षा अहम होगी।

मऊ जिले की चार सीटों में सबसे छोटा मतदाता आधार

उपलब्ध 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, मऊ जिले की चार विधानसभा सीटों में मधुबन में 3,52,368, घोसी में 4,04,217, मुहम्मदाबाद-गोहना में 3,46,531 और मऊ सदर में 4,12,694 मतदाता हैं। जिले में कुल मतदाताओं की संख्या 15,15,810 बताई गई है। इस आधार पर मुहम्मदाबाद-गोहना की हिस्सेदारी लगभग 22.86 प्रतिशत है। मतदाता संख्या के लिहाज से यह मऊ जिले की चारों सीटों में सबसे छोटी विधानसभा सीट है। चुनाव से पहले नए मतदाताओं, मतदाता सूची में संशोधन और मतदान केंद्रों की स्थिति पर नजर रखना सभी राजनीतिक दलों की तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।

दलित मतदाताओं की भूमिका सबसे अहम

मुहम्मदाबाद-गोहना अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है, इसलिए यहां दलित समुदायों की राजनीतिक भूमिका विशेष महत्व रखती है। पुराने स्थानीय अनुमानों में अनुसूचित जाति के मतदाताओं की संख्या लगभग 1.20 लाख बताई गई थी। हालांकि, यह आंकड़ा 2026 की आधिकारिक जातिवार मतदाता सूची से प्रमाणित नहीं है। जाटव, सोनकर, सरोज, गौतम, पासी और अन्य अनुसूचित जाति समुदायों की स्थानीय राजनीतिक मौजूदगी चुनावी चर्चा का हिस्सा हो सकती है। आरक्षित सीट होने का अर्थ यह है कि चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी को संबंधित आरक्षित वर्ग के लिए निर्धारित पात्रता पूरी करनी होती है, लेकिन मतदान का अधिकार सभी पात्र मतदाताओं को होता है। पिछले चुनावों से यह भी संकेत मिलता है कि दलित मतदाताओं का समर्थन किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं रहा है।

यादव मतदाता और सपा का परंपरागत आधार

पुराने स्थानीय अनुमानों में मुहम्मदाबाद-गोहना में यादव मतदाताओं की संख्या करीब 60 हजार बताई गई थी। इस संख्या की आधिकारिक जातिवार पुष्टि उपलब्ध नहीं है, लेकिन यादव समुदाय को समाजवादी पार्टी का एक महत्वपूर्ण परंपरागत समर्थन आधार माना जाता है। वर्ष 2012 में सपा के बैजनाथ ने 52,691 वोट पाकर जीत दर्ज की थी। 2017 में वह 59,871 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। 2022 में सपा ने राजेंद्र कुमार को उम्मीदवार बनाया और उन्होंने 94,688 वोट हासिल कर पार्टी को बड़ी जीत दिलाई। 2027 में सपा के लिए अपने पारंपरिक समर्थकों के साथ दलित, मुस्लिम और अन्य पिछड़े वर्गों के मतदाताओं का समर्थन बनाए रखना अहम हो सकता है। हालांकि, जाति के आधार पर किसी मतदाता का चुनावी रुझान तय मानना सही नहीं होगा।

मुस्लिम मतदाताओं का रुझान भी हो सकता है महत्वपूर्ण

पुराने स्थानीय अनुमानों में इस विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या लगभग 55 हजार बताई गई थी। यह भी आधिकारिक जाति या धर्म आधारित मतदाता आंकड़ा नहीं है। मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन समाजवादी पार्टी सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के लिए चुनावी समीकरण का एक हिस्सा हो सकता है। हालांकि, किसी समुदाय के सभी मतदाताओं को एक ही पार्टी का समर्थक मानना उचित नहीं होगा। उम्मीदवार की स्थानीय पहचान, क्षेत्रीय मुद्दे, दलों की रणनीति और चुनावी गठबंधन भी मतदाताओं के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं। 2012, 2017 और 2022 के नतीजे बताते हैं कि इस सीट पर जीत के लिए विभिन्न सामाजिक समूहों का समर्थन जुटाना महत्वपूर्ण रहा है।

चौहान और राजभर समुदायों की भूमिका

मुहम्मदाबाद-गोहना के पुराने स्थानीय अनुमानों में चौहान समुदाय के करीब 30 हजार और राजभर समुदाय के लगभग 25 हजार मतदाता बताए गए थे। इन आंकड़ों की वर्तमान आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। फिर भी, गैर-यादव पिछड़े वर्गों के समर्थन को लेकर राजनीतिक दलों के बीच प्रतिस्पर्धा हो सकती है। भाजपा, समाजवादी पार्टी और क्षेत्रीय दल इन समुदायों के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के महेंद्र सोनकर को 7,078 वोट मिले थे। लेकिन किसी उम्मीदवार को मिले वोटों को सीधे किसी एक जाति या समुदाय का समर्थन मानना सही नहीं है। 2027 में गठबंधन, प्रत्याशी चयन और स्थानीय नेतृत्व की भूमिका इन समुदायों के राजनीतिक रुझान को प्रभावित कर सकती है।

ब्राह्मण, क्षत्रिय और अन्य पिछड़े वर्ग भी अहम

दलित, यादव और मुस्लिम मतदाताओं के अलावा इस सीट पर ब्राह्मण, क्षत्रिय, भूमिहार, वैश्य, मौर्य, कुशवाहा, कुर्मी और निषाद समुदायों की भी मौजूदगी है। उपलब्ध स्रोत में इन समुदायों की सटीक विधानसभा-वार मतदाता संख्या प्रमाणित रूप में उपलब्ध नहीं है। अलग-अलग गांवों और बूथों पर स्थानीय समर्थन का स्वरूप अलग हो सकता है। भाजपा के लिए सवर्ण मतदाताओं के साथ गैर-यादव पिछड़े वर्गों और अनुसूचित जाति के विभिन्न समुदायों में समर्थन बढ़ाना महत्वपूर्ण हो सकता है। वहीं सपा और बसपा भी अपने पारंपरिक सामाजिक आधार से आगे अन्य मतदाताओं को जोड़ने की कोशिश कर सकती हैं। चुनावी नतीजे किसी एक जाति के आंकड़े से नहीं, बल्कि कई सामाजिक और स्थानीय कारकों के संयुक्त प्रभाव से तय होते हैं।

राजेंद्र कुमार
राजेंद्र कुमार

2022 का चुनाव: सपा ने 26,649 वोटों से दर्ज की जीत

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के राजेंद्र कुमार को 94,688 वोट मिले थे। भाजपा की पूनम सरोज को 68,039 वोट प्राप्त हुए, जबकि बसपा के धर्म सिंह गौतम ने 56,350 वोट हासिल किए। जन अधिकार पार्टी के महेंद्र सोनकर को 3,186 वोट मिले और कांग्रेस के बनवारी राम को 2,452 वोट प्राप्त हुए। आम आदमी पार्टी के अंकित कुमार राव को 735 वोट मिले। निर्दलीय उम्मीदवारों को भी वोट मिले, जबकि नोटा के पक्ष में 1,540 मत दर्ज हुए। सपा की जीत का अंतर 26,649 वोट था। तीन प्रमुख दलों—सपा, भाजपा और बसपा—को मिले मतों का कुल आंकड़ा 2,19,077 था। बसपा का लगभग 24.68 प्रतिशत वोट हासिल करना बताता है कि पार्टी इस सीट पर चुनावी प्रतिस्पर्धा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

श्रीराम सोनकर
श्रीराम सोनकर

2017 में भाजपा ने महज 538 वोटों से जीती थी सीट

2017 का विधानसभा चुनाव मुहम्मदाबाद-गोहना में बेहद करीबी मुकाबले के लिए याद किया जाता है। भाजपा के श्रीराम सोनकर को 73,493 वोट मिले, जबकि बसपा के राजेंद्र कुमार को 72,955 मत प्राप्त हुए। दोनों के बीच जीत का अंतर केवल 538 वोट था। समाजवादी पार्टी के बैजनाथ 59,871 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। इस चुनाव में भाजपा और बसपा को लगभग बराबर मत मिले थे, जबकि सपा को भी 28 प्रतिशत से अधिक वोट प्राप्त हुए। नतीजे बताते हैं कि इस सीट पर मामूली अंतर भी जीत-हार का फैसला कर सकता है। 2027 में भी उम्मीदवारों की लोकप्रियता, मतदान प्रतिशत और अलग-अलग दलों के बीच मतों का बंटवारा निर्णायक साबित हो सकता है।

2012 में सपा ने बसपा को हराया था

वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के बैजनाथ ने 52,691 वोट हासिल करके जीत दर्ज की थी। बसपा के राजेंद्र कुमार को 49,552 वोट मिले और वह दूसरे स्थान पर रहे। दोनों के बीच जीत का अंतर 3,139 वोट था। भाजपा के श्रीराम को 28,635 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के बनवारी को 24,607 मत प्राप्त हुए। पीस पार्टी के प्रदीप को 7,599 और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के महेंद्र सोनकर को 7,078 वोट मिले थे। इस चुनाव में कई दलों के बीच मतों का बंटवारा भी महत्वपूर्ण रहा। इससे संकेत मिलता है कि मुहम्मदाबाद-गोहना में चुनावी मुकाबला केवल दो पार्टियों तक सीमित नहीं रहा है।

2007 से 2022 तक बदलता रहा राजनीतिक समीकरण

उपलब्ध चुनावी इतिहास के अनुसार, वर्ष 2007 में बसपा के राजेंद्र कुमार ने जीत दर्ज की थी। 2012 में समाजवादी पार्टी के बैजनाथ विजयी हुए, जबकि 2017 में भाजपा के श्रीराम सोनकर ने सीट अपने नाम की। 2022 में राजेंद्र कुमार ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीत हासिल की। यह राजनीतिक बदलाव इस सीट पर पार्टी के साथ-साथ उम्मीदवार की पहचान और सामाजिक गठबंधन के महत्व को भी दिखाता है। राजेंद्र कुमार ने 2007 में बसपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी, 2017 में बसपा उम्मीदवार के रूप में बेहद कम अंतर से चुनाव हारे और 2022 में सपा के टिकट पर विजयी हुए। हालांकि, किसी उम्मीदवार के पुराने प्रदर्शन के आधार पर भविष्य की जीत सुनिश्चित नहीं मानी जा सकती।

2027 में सपा के सामने अपनी जीत दोहराने की चुनौती

2022 की जीत के बाद समाजवादी पार्टी के सामने अपना समर्थन आधार बनाए रखने की चुनौती होगी। पार्टी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक यानी पीडीए समीकरण के जरिए विभिन्न सामाजिक समूहों को साथ लाने की रणनीति अपना सकती है। यादव और मुस्लिम मतदाताओं के अलावा दलित, चौहान, राजभर और अन्य पिछड़े वर्गों में समर्थन बनाए रखना भी महत्वपूर्ण हो सकता है। फिर भी, 2027 में उम्मीदवार का चयन, स्थानीय नेतृत्व, चुनावी गठबंधन और जनता के मुद्दे पार्टी की संभावनाओं को प्रभावित करेंगे। 2022 का परिणाम सपा के पक्ष में मजबूत बढ़त दिखाता है, लेकिन अगले चुनाव में मतदाताओं की प्राथमिकताएं बदल भी सकती हैं।

भाजपा के लिए पुराना आधार मजबूत करना जरूरी

भाजपा ने 2017 में इस सीट पर जीत हासिल की थी, लेकिन उसका अंतर केवल 538 वोट रहा था। 2022 में पार्टी की उम्मीदवार पूनम सरोज 68,039 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहीं और सपा से 26,649 वोटों से पीछे रह गईं। 2027 में भाजपा के सामने अपने पुराने समर्थकों को एकजुट रखने और अतिरिक्त मतदाताओं का समर्थन जुटाने की चुनौती होगी। अनुसूचित जाति के विभिन्न समुदायों, चौहान, राजभर, मौर्य, कुशवाहा और सवर्ण मतदाताओं के बीच पार्टी की रणनीति महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, किसी समुदाय की मौजूदगी को सीधे भाजपा के समर्थन से जोड़ना सही नहीं होगा। चुनावी गठबंधन और स्थानीय उम्मीदवार भी परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।

बसपा का वोट बैंक मुकाबले को बना सकता है दिलचस्प

मुहम्मदाबाद-गोहना में बसपा का पुराना चुनावी आधार रहा है। पार्टी ने 2007 में सीट जीती थी और 2017 में उसके उम्मीदवार राजेंद्र कुमार भाजपा से केवल 538 वोटों से पीछे रहे थे। 2022 में बसपा के धर्म सिंह गौतम को 56,350 वोट यानी 24.68 प्रतिशत मत प्राप्त हुए। इससे पहले 2012 में पार्टी को 49,552 वोट और 2017 में 72,955 वोट मिले थे। 2017 की तुलना में 2022 में बसपा के वोट घटे, लेकिन उसका समर्थन आधार चुनावी मुकाबले में महत्वपूर्ण बना रहा। यदि 2027 में बसपा अपने समर्थकों को सक्रिय रखती है और दूसरे सामाजिक समूहों में भी समर्थन बढ़ाती है, तो मुकाबले का स्वरूप बदल सकता है। फिर भी, यह भविष्य की संभावना है, कोई निश्चित चुनावी परिणाम नहीं।

जातिगत समीकरण के साथ स्थानीय मुद्दे भी निर्णायक

मुहम्मदाबाद-गोहना में चुनावी रणनीति केवल जातिगत गणित तक सीमित नहीं रहेगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में खेती और स्थानीय व्यापार की भूमिका होने के कारण सिंचाई, बिजली, खाद, कृषि उपज के दाम और बाजार तक पहुंच जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हो सकते हैं। ग्रामीण संपर्क मार्गों की स्थिति, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, शिक्षा, सरकारी योजनाओं का लाभ और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी मतदाताओं की प्राथमिकताओं को प्रभावित कर सकते हैं। चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों के लिए यह बताना महत्वपूर्ण होगा कि उन्होंने स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए क्या काम किया है और आगे उनकी क्या योजनाएं हैं। स्थानीय मुद्दों पर जनता की संतुष्टि या नाराजगी चुनावी रुझान को प्रभावित कर सकती है।

मुहम्मदाबाद-गोहना
मुहम्मदाबाद-गोहना

2027 में किसका पलड़ा भारी रहेगा?

मुहम्मदाबाद-गोहना के पिछले चुनाव परिणाम बताते हैं कि यहां सपा, भाजपा और बसपा के बीच प्रतिस्पर्धा लगातार बनी हुई है। 2012 में सपा ने 3,139 वोटों से जीत हासिल की, 2017 में भाजपा केवल 538 वोटों से विजयी हुई और 2022 में सपा ने 26,649 वोटों की बढ़त से सीट जीती। पुराने स्थानीय अनुमानों में दलित समुदाय को सबसे बड़ा सामाजिक समूह बताया गया है, जबकि यादव, मुस्लिम, चौहान और राजभर मतदाताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। लेकिन ये जातिवार अनुमान आधिकारिक वर्तमान आंकड़े नहीं हैं और इन्हें निश्चित मतदाता गणित नहीं माना जाना चाहिए। 2027 में उम्मीदवारों की स्वीकार्यता, राजनीतिक गठबंधन, बूथ स्तर की तैयारी, स्थानीय विकास के मुद्दे और वास्तविक मतदान रुझान ही अंतिम नतीजे को प्रभावित करेंगे।

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