UP Election 2027: भाजपा की हैट्रिक या सपा की वापसी? बुलंदशहर की शिकारपुर विधानसभा सीट की ग्राउंड रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर बुलंदशहर की शिकारपुर सीट पर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। भाजपा के अनिल कुमार ने 2017 और 2022 में जीत दर्ज की थी, जबकि सपा और बसपा भी अपनी रणनीति बनाने में जुट सकती हैं। जानिए शिकारपुर का जातीय समीकरण, पिछले चुनावों के नतीजे, मतदाता आंकड़े और स्थानीय समस्याएं।

UP Election 2027

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अक्टूबर 20, 2026

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UP Election 2027: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां तेज हो रही हैं। एक तरफ भारतीय जनता पार्टी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विकास कार्यों, कानून-व्यवस्था और अपनी सरकार की उपलब्धियों को लेकर जनता के बीच जाने की तैयारी में है, वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी अखिलेश यादव के नेतृत्व में पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक), बेरोजगारी, महंगाई और स्थानीय समस्याओं को प्रमुख मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है।

शिकारपुर में दिलचस्प होगा 2027 का मुकाबला

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले की शिकारपुर विधानसभा सीट भी आगामी चुनाव के लिहाज से काफी अहम है। यहां भाजपा के अनिल कुमार ने 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में लगातार जीत दर्ज की। 2022 में राष्ट्रीय लोकदल के किरणपाल सिंह दूसरे स्थान पर रहे, जबकि बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहे। इससे शिकारपुर में भाजपा, सपा-रालोद गठबंधन और बसपा के बीच सामाजिक समीकरणों तथा स्थानीय मुद्दों की अहमियत सामने आती है।

शिकारपुर में दिलचस्प होगा 2027 का मुकाबला

लेकिन आगामी विधानसभा चुनाव में तस्वीर कैसी होगी? क्या भाजपा अपनी पिछली जीत का प्रदर्शन दोहरा पाएगी या विपक्ष स्थानीय मुद्दों और सामाजिक समीकरणों के जरिए मुकाबले को बदलने की कोशिश करेगा? आइए जानते हैं शिकारपुर विधानसभा सीट का भौगोलिक, सामाजिक और राजनीतिक लेखा-जोखा।

शिकारपुर विधानसभा सीट की भौगोलिक पहचान

शिकारपुर उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में स्थित विधानसभा क्षेत्र है। यह विधानसभा क्षेत्र संख्या 69 है और बुलंदशहर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। यहां शिकारपुर कस्बे के साथ ग्रामीण इलाके भी चुनावी समीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में खेती, ग्रामीण कारोबार, स्थानीय बाजार और छोटे व्यापार की अहम भूमिका है। शहरी और ग्रामीण मतदाताओं की प्राथमिकताएं कई मामलों में अलग हो सकती हैं। कस्बे में सड़क, सफाई, जल निकासी, बाजार और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सवाल उठते हैं, जबकि गांवों में सिंचाई, बिजली, खेती की लागत, फसल की सुरक्षा और संपर्क मार्ग जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हैं।

शिकारपुर की चुनावी राजनीति को समझने के लिए केवल पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक को देखना पर्याप्त नहीं होगा। स्थानीय विकास कार्य, उम्मीदवार की छवि, संगठन की सक्रियता और मतदाताओं की रोजमर्रा की समस्याएं भी चुनावी चर्चा को प्रभावित कर सकती हैं।

शिकारपुर में मतदाताओं की संख्या कितनी है?

शिकारपुर विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या को लेकर अलग-अलग वर्षों के आंकड़े उपलब्ध हैं। 2022 के चुनावी रिकॉर्ड और 2026 की मतदाता सूची से संबंधित प्रकाशित रिपोर्ट के आंकड़ों में अंतर दिखाई देता है, इसलिए इनकी तुलना करते समय पुनरीक्षण और निर्वाचन सूची के बदलावों को ध्यान में रखना जरूरी है।

शिकारपुर में मतदाताओं की संख्या कितनी है?
वर्षमतदाताओं की स्थिति
2012लगभग 2.95 लाख
2017लगभग 3.11 लाख
20223,34,480 पंजीकृत मतदाता
2026एक प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार 3,05,172 मतदाता

2022 के चुनावी आंकड़ों में कुल 3,34,480 मतदाता दर्ज हैं, जबकि अप्रैल 2026 में प्रकाशित एक अन्य रिपोर्ट में मतदाता सूची का आंकड़ा 3,05,172 बताया गया है। इन आंकड़ों के बीच अंतर होने के कारण 2027 के लिए मतदाताओं की संख्या का अनुमान लगाने से पहले निर्वाचन आयोग की नवीनतम आधिकारिक सूची से पुष्टि करना जरूरी है।

आगामी चुनाव में युवा मतदाता, पहली बार वोट डालने वाले नागरिक और महिला मतदाता भी महत्वपूर्ण होंगे। हालांकि, किसी वर्ग के मतदाताओं की संख्या अधिक होने का अर्थ यह नहीं है कि उनका मतदान किसी एक पार्टी के पक्ष में ही जाएगा।

शिकारपुर का जातीय समीकरण

शिकारपुर में सामाजिक समीकरणों का चुनावी महत्व है। यहां अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, सवर्ण समुदायों और मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका पर राजनीतिक दलों की नजर रहती है। ग्रामीण बहुलता के कारण खेती-किसानी से जुड़े समुदायों के मुद्दे भी चुनावी विमर्श का हिस्सा बन सकते हैं।

एक प्रकाशित सामाजिक-आंकड़ा आधारित रिपोर्ट में शिकारपुर क्षेत्र की ग्रामीण आबादी लगभग 84.3 प्रतिशत और शहरी आबादी लगभग 15.7 प्रतिशत बताई गई है। उसी रिपोर्ट में अनुसूचित जाति की आबादी 26.46 प्रतिशत दर्ज है। ये आंकड़े संबंधित रिपोर्ट के आधार पर हैं; इन्हें 2027 की वर्तमान मतदाता सूची या किसी जाति के पार्टी-वार वोट प्रतिशत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

पिछले विधानसभा चुनावों का सफर: 2012 से 2022 तक

शिकारपुर के पिछले तीन विधानसभा चुनावों के नतीजे बताते हैं कि इस सीट पर अलग-अलग चुनावों में राजनीतिक समीकरण बदले हैं। 2012 में सपा ने जीत दर्ज की, जबकि 2017 और 2022 में भाजपा ने लगातार दो चुनाव जीते।

विधानसभा चुनाव 2012: सपा ने दर्ज की जीत

विजेता — समाजवादी पार्टी

विजेता — समाजवादी पार्टी
  • विजेता: मुकेश शर्मा (सपा) — 64,498 वोट
  • उपविजेता: अनिल कुमार (बसपा) — 56,095 वोट
  • जीत का अंतर: 8,403 वोट

2012 में सपा ने बसपा को हराकर शिकारपुर सीट पर जीत दर्ज की थी। राष्ट्रीय लोकदल के किरणपाल सिंह 45,312 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

विधानसभा चुनाव 2017: भाजपा की वापसी

विजेता — भारतीय जनता पार्टी

विजेता — भारतीय जनता पार्टी
  • विजेता: अनिल कुमार (भाजपा) — 1,01,912 वोट
  • उपविजेता: मुकुल उपाध्याय (बसपा) — 51,667 वोट
  • जीत का अंतर: 50,245 वोट

2017 में भाजपा ने शिकारपुर में बड़ी जीत दर्ज की। कांग्रेस के उदय करण सिंह दलाल 32,914 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

विधानसभा चुनाव 2022: भाजपा ने जीत दोहराई

विजेता — भारतीय जनता पार्टी

  • विजेता: अनिल कुमार (भाजपा) — 1,13,855 वोट
  • उपविजेता: किरणपाल सिंह (रालोद) — 58,172 वोट
  • तीसरे स्थान पर: मोहम्मद रफीक (बसपा) — 37,358 वोट
  • जीत का अंतर: 55,683 वोट

2022 में भाजपा ने अपनी जीत का अंतर बढ़ाया। सपा-रालोद गठबंधन के तहत चुनाव लड़ रहे रालोद प्रत्याशी किरणपाल सिंह दूसरे स्थान पर रहे।

2027 का चुनावी संग्राम: कौन-कौन ठोकेगा ताल?

शिकारपुर में 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अभी किसी भी पार्टी के संभावित प्रत्याशी को आधिकारिक उम्मीदवार मानना उचित नहीं होगा। पिछले चुनावों के परिणाम और मौजूदा राजनीतिक स्थिति के आधार पर प्रमुख दलों की संभावित रणनीति को इस तरह समझा जा सकता है।

भारतीय जनता पार्टी: जीत की हैट्रिक पर नजर

भाजपा के अनिल कुमार ने 2017 और 2022 में शिकारपुर सीट से जीत दर्ज की थी। जुलाई 2026 की एक रिपोर्ट में विधायक ने क्षेत्र में 500 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का दावा किया था। इसी रिपोर्ट में शिकारपुर-अनूपशहर मार्ग समेत कुछ सड़कों की खराब हालत और अन्य स्थानीय समस्याओं का भी जिक्र किया गया।

भारतीय जनता पार्टी: जीत की हैट्रिक पर नजर

2027 में भाजपा के सामने अपने विकास कार्यों को जनता के सामने रखने के साथ-साथ सड़क, बिजली और जल निकासी जैसी समस्याओं पर उठ रहे सवालों का जवाब देने की चुनौती रह सकती है। अनिल कुमार को दो बार जीत मिलने के बावजूद 2027 के टिकट को लेकर पार्टी का आधिकारिक फैसला ही निर्णायक होगा।

समाजवादी पार्टी: PDA के सहारे वापसी की कोशिश

सपा 2012 में शिकारपुर सीट जीत चुकी है। पार्टी 2027 में पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े मुद्दों, बेरोजगारी, महंगाई और ग्रामीण समस्याओं को उठाकर अपना जनाधार बढ़ाने की कोशिश कर सकती है।

समाजवादी पार्टी: PDA के सहारे वापसी की कोशिश

हालांकि, अभी शिकारपुर से सपा के आधिकारिक प्रत्याशी की घोषणा नहीं हुई है। पार्टी किस चेहरे पर भरोसा जताती है और संभावित गठबंधन में सीट का बंटवारा कैसे होता है, यह आगे की राजनीति में महत्वपूर्ण होगा।

बहुजन समाज पार्टी: दलित आधार की भूमिका

बसपा ने 2012 में शिकारपुर में दूसरा स्थान हासिल किया था और 2017 में भी पार्टी मुख्य मुकाबले में रही। 2022 में बसपा के मोहम्मद रफीक 37,358 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

बहुजन समाज पार्टी: दलित आधार की भूमिका

2027 में बसपा अपने संगठन, उम्मीदवार और सामाजिक समीकरणों के आधार पर चुनावी जमीन मजबूत करने की कोशिश कर सकती है। उसका प्रदर्शन अन्य दलों के चुनावी समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।

कांग्रेस और अन्य दल

कांग्रेस तथा अन्य दलों की भूमिका उनके संगठन, प्रत्याशी और गठबंधन की स्थिति पर निर्भर करेगी। 2022 में कांग्रेस के प्रत्याशी को 1,542 वोट मिले थे। आगामी चुनाव में पार्टी की रणनीति और संभावित गठबंधन का असर देखने लायक होगा।

शिकारपुर विधानसभा सीट की प्रमुख स्थानीय समस्याएं

किसी विधानसभा क्षेत्र की चुनावी राजनीति में बड़े राजनीतिक मुद्दों के साथ स्थानीय समस्याओं की भी अहम भूमिका होती है। शिकारपुर में सड़क, बिजली, जल निकासी और ग्रामीण सुविधाओं से संबंधित सवाल पहले भी सामने आए हैं।

1. जर्जर सड़कें और आवागमन

जर्जर सड़कें और आवागमन

शिकारपुर-अनूपशहर मार्ग सहित कुछ सड़कों की खराब स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों की परेशानी की रिपोर्ट सामने आई है। ग्रामीण संपर्क मार्गों की मरम्मत और सुरक्षित आवागमन 2027 में महत्वपूर्ण स्थानीय सवाल हो सकते हैं।

2. जल निकासी और जलभराव

जल निकासी और जलभराव

कस्बाई इलाकों में नालियों की सफाई, जल निकासी और बारिश के दौरान पानी जमा होने की समस्या पर ध्यान देना जरूरी है। इस मुद्दे की गंभीरता का आकलन मोहल्लेवार जमीनी पड़ताल से किया जाना चाहिए।

3. बिजली आपूर्ति और किसानों की परेशानी

बिजली आपूर्ति और किसानों की परेशानी

ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की नियमित आपूर्ति, नलकूपों का संचालन और खेती के लिए पर्याप्त बिजली अहम सवाल हैं। किसान सिंचाई की लागत और फसल की सुरक्षा को लेकर भी राजनीतिक दलों से जवाब मांग सकते हैं।

4. खेती और आवारा पशुओं की समस्या

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में खेती की अहम भूमिका है। आवारा पशुओं से फसलों को नुकसान, सिंचाई, खाद-बीज की लागत और कृषि उपज का उचित मूल्य किसानों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे हो सकते हैं।

5. स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाएं

स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाएं

स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, डॉक्टरों की उपलब्धता, कॉलेजों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर जैसे मुद्दों की स्थिति का आकलन जरूरी है। इन क्षेत्रों में उपलब्ध सुविधाओं और कमियों की पुष्टि स्थानीय आंकड़ों से की जानी चाहिए।

6. रोजगार और स्थानीय कारोबार

छोटे कारोबारियों, दुकानदारों और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, बाजार की सुविधाएं तथा स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना चुनावी चर्चा में महत्वपूर्ण हो सकता है।

शिकारपुर में 2027 की राह किसके लिए आसान होगी?

शिकारपुर में भाजपा के पक्ष में 2017 और 2022 की लगातार जीत का रिकॉर्ड है। वहीं 2012 में सपा की जीत यह दिखाती है कि इस सीट पर राजनीतिक समर्थन समय के साथ बदल सकता है। बसपा का पिछला चुनावी प्रदर्शन भी बताता है कि पार्टी के वोटों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

2027 में भाजपा अपने कार्यकाल, संगठन और विकास संबंधी दावों को लेकर जनता के बीच जा सकती है। सपा पीडीए और स्थानीय समस्याओं के जरिए समर्थन बढ़ाने की कोशिश कर सकती है, जबकि बसपा अपने सामाजिक आधार को मजबूत करने पर ध्यान दे सकती है