इंदौर में चौंकाने वाला मामला: मोबाइल पर शादी कार्ड और लिंक, क्लिक करने से खाली हो सकता है अकाउंट

 इंदौर इंदौर में साइबर ठगों ने ठगी का ऐसा तरीका अपनाया कि लोग पहले चौंके, फिर सतर्क हो गए. मामला कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष सदाशिव यादव के नाम से जुड़े एक फर्जी शादी के निमंत्रण कार्ड का है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. यह डिजिटल कार्ड लोगों को शादी का न्योता दे रहा था, साथ में एक लिंक भी, जिस पर क्लिक करने की अपील की गई थी. शहर के कई लोगों के मोबाइल पर जब यह इनविटेशन कार्ड पहुंचा तो पहले तो उन्होंने इसे सामान्य समझा. तारीख लिखी

Wrriten By :

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Published On :

फ़रवरी 7, 2026

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 इंदौर

इंदौर में साइबर ठगों ने ठगी का ऐसा तरीका अपनाया कि लोग पहले चौंके, फिर सतर्क हो गए. मामला कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष सदाशिव यादव के नाम से जुड़े एक फर्जी शादी के निमंत्रण कार्ड का है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. यह डिजिटल कार्ड लोगों को शादी का न्योता दे रहा था, साथ में एक लिंक भी, जिस पर क्लिक करने की अपील की गई थी.

शहर के कई लोगों के मोबाइल पर जब यह इनविटेशन कार्ड पहुंचा तो पहले तो उन्होंने इसे सामान्य समझा. तारीख लिखी थी… 24 फरवरी 2026… और भाषा भी बिल्कुल औपचारिक. लेकिन कुछ लोगों को लिंक देखकर शक हुआ. उधर, जब यह कार्ड खुद सदाशिव यादव तक पहुंचा, तो वे भी हैरान रह गए. उन्होंने तुरंत स्पष्ट किया कि यह इनविटेशन कार्ड पूरी तरह फर्जी है और उनके नाम का गलत इस्तेमाल किया गया है.

सदाशिव यादव ने तुरंत सोशल मीडिया पर वीडियो और पोस्ट जारी कर लोगों को आगाह किया. उन्होंने कहा कि उनका मोबाइल या सोशल मीडिया अकाउंट हैक कर ये फैलाया जा रहा है. उन्होंने सभी परिचितों, कार्यकर्ताओं और रिश्तेदारों से अपील की कि इस कार्ड में दिए गए किसी भी लिंक को न खोलें और न ही इसे आगे फॉरवर्ड करें.

इस मामले की जांच में सामने आया कि यह पूरा मामला साइबर ठगी से जुड़ा हो सकता है. ऐसे मामलों में ठग फर्जी निमंत्रण, कूरियर या इवेंट लिंक भेजकर लोगों से क्लिक करवाते हैं, जिससे उनके मोबाइल या बैंकिंग डिटेल्स तक पहुंच बनाई जा सके. कई बार लिंक पर क्लिक करते ही मैलवेयर इंस्टॉल हो जाता है या फर्जी वेबसाइट पर ले जाकर निजी जानकारी मांगी जाती है.

इस मामले की शिकायत मिलते ही पुलिस और साइबर सेल सक्रिय हो गई. एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने बताया कि प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है और यह पता लगाया जा रहा है कि फर्जी कार्ड किस प्लेटफॉर्म से बनाया गया और सबसे पहले किस अकाउंट से शेयर हुआ. डिजिटल ट्रेल के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है. पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अनजान लिंक, डिजिटल कार्ड या संदिग्ध मैसेज से सावधान रहें, भले ही वह किसी परिचित या बड़े नाम से क्यों न आया हो. किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांच लें.

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