अब AI बताएगा खेत में यूरिया-DAP की कितनी जरूरत, हरियाणा में डिजिटल खेती की नई पहल

 करनाल  खेती में अब अनुमान की बजाय विज्ञान और आंकड़ों की भूमिका बढ़ेगी। प्रदेश के छह जिलों में मिट्टी की डिजिटल ग्रिड मैपिंग के जरिए खेतों की उर्वरता और पोषक तत्वों का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इस जानकारी को एआई आधारित तकनीक से जोड़कर किसानों को बताया जा सकेगा कि किस खेत में किस पोषक तत्व की कितनी जरूरत है "डिस्कवरी टू डिलीवरी" मॉडल के तहत प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीक को खेत तक पहुंचाने की यह पहल खेती की लागत घटाने व मिट्टी की सेहत सुधारने की दिशा में अहम कदम बन सकती है। छह जिलों की मिट्टी का डिजिटल

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Published On :

नवम्बर 8, 2026

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 करनाल
 खेती में अब अनुमान की बजाय विज्ञान और आंकड़ों की भूमिका बढ़ेगी। प्रदेश के छह जिलों में मिट्टी की डिजिटल ग्रिड मैपिंग के जरिए खेतों की उर्वरता और पोषक तत्वों का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इस जानकारी को एआई आधारित तकनीक से जोड़कर किसानों को बताया जा सकेगा कि किस खेत में किस पोषक तत्व की कितनी जरूरत है

"डिस्कवरी टू डिलीवरी" मॉडल के तहत प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीक को खेत तक पहुंचाने की यह पहल खेती की लागत घटाने व मिट्टी की सेहत सुधारने की दिशा में अहम कदम बन सकती है।

छह जिलों की मिट्टी का डिजिटल ग्रिड
करनाल के साथ कुरुक्षेत्र, अंबाला, कैथल, यमुनानगर और हिसार को इस पहल में शामिल किया गया है। डिजिटल साइल ग्रिड मैपिंग से खेतों की मिट्टी से जुड़ी जानकारियों को व्यवस्थित डिजिटल डेटा बेस में दर्ज करने का लक्ष्य है।

इसमें उपग्रह से प्राप्त आंकड़ों और खेतों से लिए गए मिट्टी के नमूनों के विश्लेषण का समन्वय महत्वपूर्ण होगा। इससे अलग-अलग क्षेत्रों में मिट्टी की गुणवत्ता, पोषक तत्वों की उपलब्धता और अन्य कृषि संबंधी विशेषताओं को समझने में मदद मिल सकती है। इस तकनीक का उद्देश्य केवल मिट्टी की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके आधार पर समझने में मदद देना है कि जमीन में किस पोषक तत्व की कमी है।

एआई बताएगा खेत की जरूरत
डिजिटल कृषि व्यवस्था में एआइ आधारित टूल किसानों को फसल और खेत से जुड़ी जरूरत पर सलाह देने में मदद कर सकते हैं।

मृदा परीक्षण के परिणामों के साथ फसल की किस्म, बुआई का समय और विकास की अवस्था को जोड़कर उर्वरकों की जरूरत का आकलन किया जा सकता है। इससे बिना जरूरत यूरिया और डीएपी डालने की प्रवृत्ति कम करने में मदद मिलेगी। इसी तरह मौसम संबंधी आंकड़ों के आधार पर बिजाई, सिंचाई और कटाई की योजना में सहायता मिल सकती है।

मिट्टी और भूजल बचाने की उम्मीद
खाद, कीटनाशक और पानी का जरूरत के अनुसार इस्तेमाल होने पर किसानों की लागत कम करने की संभावना है। संतुलित पोषण और सिंचाई से मिट्टी की सेहत बनाए रखने और भूजल पर दबाव घटाने में भी मदद मिल सकती है।

डिजिटल कृषि से लागत में 15 से 25 प्रतिशत तक कमी और उपज में 10 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि के दावे विभिन्न अध्ययनों के संदर्भ में सामने आते हैं, लेकिन इन्हें हर फसल और हर किसान के लिए सुनिश्चित परिणाम नहीं माना जा सकता।

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