Sheikh Hasina Extradition : शेख हसीना प्रत्यर्पण पर भारत सरकार का जवाब, विदेश मंत्रालय ने साफ की स्थिति

शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग के बीच भारत सरकार ने अपना रुख स्पष्ट किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि मामले को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच बातचीत जारी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पूर्व प्रधानमंत्री हसीना के भविष्य को लेकर अगला बड़ा कदम क्या होगा।

Sheikh Hasina Extradition

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 18, 2026

Sheikh Hasina Extradition : भारत सरकार ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण से जुड़े बांग्लादेशी सरकार के अनुरोध पर अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि भारत को ढाका से प्रत्यर्पण का औपचारिक अनुरोध प्राप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि इस मामले के सभी कानूनी और तकनीकी पहलुओं का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है और इस पर अभी विचार-विमर्श जारी है। भारत ने यह संकेत दिया है कि इस तरह के संवेदनशील मामलों में अंतरराष्ट्रीय कानूनों और द्विपक्षीय संधियों का पालन करना आवश्यक होता है, जिसके चलते प्रक्रिया में समय लगना स्वाभाविक है।

अवामी लीग को पुनर्जीवित करने की चर्चा

यह बयान ऐसे समय में आया है जब शेख हसीना की बांग्लादेश में संभावित वापसी को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। मीडिया रिपोर्ट्स और हसीना के करीबी सूत्रों का कहना है कि पूर्व प्रधानमंत्री अपनी पार्टी ‘अवामी लीग’ को फिर से संगठित करने और उसमें नई जान फूंकने के उद्देश्य से स्वदेश लौटने की योजना बना रही हैं। 78 वर्षीय शेख हसीना, जो बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान की बेटी हैं, 5 अगस्त 2024 को छात्रों के नेतृत्व में हुए व्यापक हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के बाद प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देकर भारत चली आई थीं। तभी से वह सुरक्षित स्थान पर भारत में रह रही हैं।

‘मानवता के खिलाफ अपराध’ और अदालती फैसला

शेख हसीना की मुश्किलें तब और बढ़ गईं जब पिछले साल नवंबर में ढाका के एक विशेष न्यायाधिकरण ने उन्हें ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ का दोषी पाया। अदालत ने 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान उनकी सरकार द्वारा की गई कथित दमनकारी कार्रवाई के लिए उन्हें उनकी गैरमौजूदगी में मौत की सजा सुनाई। इस फैसले के बाद से बांग्लादेश की अंतरिम सरकार लगातार भारत पर दबाव बना रही है कि हसीना को ढाका प्रत्यर्पित किया जाए ताकि उन्हें कानून के दायरे में लाया जा सके। वहीं, शेख हसीना ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों, आपराधिक दोषसिद्धि और सुनाई गई सजा को पूरी तरह से ‘राजनीतिक रूप से प्रेरित’ बताते हुए खारिज कर दिया है।

भारत के लिए राजनयिक चुनौतियां

शेख हसीना का भारत में रहना और बांग्लादेश से उनकी वापसी की बढ़ती मांग भारत के लिए एक बड़ी राजनयिक चुनौती पेश कर रही है। एक ओर भारत और बांग्लादेश के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध हैं, तो दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया भी जटिल होती है। भारत ने हमेशा यह दोहराया है कि वह बांग्लादेश की स्थिरता और वहां के विकास के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन किसी भी व्यक्ति का प्रत्यर्पण केवल कानूनी प्रक्रिया और पुख्ता सबूतों के आधार पर ही संभव है।

भविष्य की राह और कानूनी प्रक्रिया

शेख हसीना का मामला अब पूरी तरह से कानूनी पेचीदगियों के दायरे में है। भारत सरकार किसी भी जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल का पालन करना उचित समझ रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों देशों के बीच यह राजनयिक संवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है। शेख हसीना की राजनीतिक सक्रियता की खबरों ने इस मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है, जिससे भारत और बांग्लादेश के बीच भविष्य के संबंधों की दिशा तय करने में यह मुद्दा निर्णायक साबित हो सकता है।

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