Share Market Today: वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी के कारण आज भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) में हाहाकार मच गया है। गुरुवार को बाजार खुलते ही चौतरफा बिकवाली देखने को मिली, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक औंधे मुंह गिर गए।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण निवेशकों में भारी घबराहट (Panic Selling) का माहौल है। इस बिकवाली के दबाव में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) अपने पिछले बंद स्तर 73,983.18 के मुकाबले सीधे 73,615.99 पर खुला। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 23,214.95 के स्तर से भारी गिरावट के साथ 23,104.40 पर खुला और देखते ही देखते 23,100 के मनोवैज्ञानिक स्तर के भी नीचे चला गया।
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बाजार में भारी गिरावट के मुख्य कारण
दलाल स्ट्रीट में आज छाई इस मायूसी के पीछे मुख्य रूप से वैश्विक परिस्थितियां और आर्थिक चिंताएं जिम्मेदार हैं, अमेरिका और ईरान के बीच टकराव बढ़ने से पश्चिम एशिया (Middle East) में अस्थिरता पैदा हो गई है। निवेशकों को सबसे बड़ा डर यह है कि यदि यह तनाव लंबे समय तक चला, तो दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।
कच्चे तेल में उबाल और भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव
तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। चूंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से देश का वित्तीय घाटा बढ़ता है। महंगा तेल देश में चौतरफा महंगाई (Inflation) बढ़ाने का काम करता है, जिससे कंपनियों के मार्जिन पर सीधा असर पड़ता है। इसी जोखिम को देखते हुए फंड मैनेजर्स ने बाजार से पैसा निकालना शुरू कर दिया है।
इन सेक्टर्स पर दिखा सबसे ज्यादा दबाव
आज की इस गिरावट में बाजार के लगभग सभी प्रमुख सेक्टर्स मंदी की चपेट में नजर आए। विशेष रूप से बैंकिंग, एफएमसीजी (FMCG) और आईटी (IT) सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखी गई:
निफ्टी आईटी इंडेक्स (Nifty IT Index): वैश्विक मंदी की आशंका के बीच आईटी इंडेक्स अपने पिछले बंद स्तर 28,279.90 के मुकाबले 27,888.00 पर खुला।
चौतरफा मंदी: आईटी के अलावा बैंकिंग, ऑटोमोबाइल और मेटल सेक्टर के दिग्गज शेयर भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे। स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में भी रिटेल निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे उनका मार्केट कैप तेजी से घट गया।
अपवाद: इस चौतरफा गिरावट के बीच केवल ‘ऑयल एंड गैस’ (Oil & Gas) सेक्टर की कुछ चुनिंदा कंपनियों में मामूली खरीदारी देखने को मिली, जिन्हें कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से सीधा फायदा होने की उम्मीद है।
क्या आगे भी जारी रहेगा यह क्रैश?
बाजार के जानकारों और मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा पूरी तरह से मिडिल ईस्ट के हालातों और कच्चे तेल के रुख पर निर्भर करेगी। यदि भू-राजनीतिक मोर्चे पर तनाव कम होता है, तो बाजार में निचले स्तरों से एक शार्प रिकवरी (V-Shape Recovery) देखने को मिल सकती है। इसके विपरीत, यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो बाजार में उतार-चढ़ाव (Volatility) तथा गिरावट का यह दौर और गहरा सकता है।
निवेशकों के लिए रणनीति
मार्केट एक्सपर्ट्स ने मौजूदा संवेदनशील माहौल में खुदरा निवेशकों को घबराकर (Panic Selling) कोई भी फैसला न लेने की सख्त सलाह दी है। जानकारों का कहना है कि लंबी अवधि (Long-Term) का नजरिया रखने वाले निवेशकों के लिए यह गिरावट घबराने की नहीं, बल्कि मजबूत फंडामेंटल वाली क्वालिटी कंपनियों के शेयरों को निचले स्तरों पर धीरे-धीरे पोर्टफोलियो में जोड़ने (Buy on Dips) का एक बेहतरीन अवसर है।
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