Share Market Today: हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन, शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार ‘लाल निशान’ के साथ खुला। निवेशकों के बीच युद्ध की बढ़ती आशंकाओं ने डर का माहौल पैदा कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
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सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट

आज कारोबार की शुरुआत होते ही सेंसेक्स 365 अंक लुढ़ककर 79,658 के स्तर पर आ गया। जैसे-जैसे सत्र आगे बढ़ा, यह गिरावट और गहरी होती गई और सेंसेक्स 404 अंक तक नीचे चला गया। वहीं, निफ्टी भी 102 अंकों की कमजोरी के साथ 24,663 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया।
बाजार में मची इस उथल-पुथल के बावजूद कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। टेक महिंद्रा, इंफोसिस, रिलायंस, टीसीएस और सन फार्मा जैसे दिग्गज शेयर गिरावट के बावजूद हरे निशान में टिके रहने की कोशिश कर रहे हैं।
वॉल स्ट्रीट से एशियाई बाजारों तक मंदी
भारतीय बाजार पर सबसे बड़ा दबाव अमेरिकी और एशियाई बाजारों से आया है:—
अमेरिकी बाजार: गुरुवार को अमेरिकी बाजार भारी गिरावट के साथ बंद हुए। डॉव जोन्स 784 अंक (1.61%) टूट गया, जबकि S&P 500 और नैस्डैक में भी कमजोरी देखी गई। क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों का भरोसा डगमगा दिया है।
एशियाई बाजार: शुक्रवार सुबह जापान का निक्केई, दक्षिण कोरिया का कोस्पी और हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स भी गिरावट के साथ खुले।
विदेशी निवेशकों की बड़ी बिकवाली
बाजार के आंकड़े बताते हैं कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FII) मौजूदा अनिश्चितता के बीच भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। 5 मार्च को विदेशी निवेशकों ने 3,752.52 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने बाजार को संभालने का प्रयास किया और 5,153.37 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की।
भारत के लिए अमेरिका का ‘स्पेशल ऑयल लाइसेंस’
ईरान-इजरायल युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते संकट के बीच भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत की खबर आई है। अमेरिका ने भारत को 30 दिनों का एक अस्थायी लाइसेंस जारी किया है।
जानिए इसके फायदे
भारतीय रिफाइनरियां बिना किसी जुर्माने या टैरिफ के रूस से कच्चा तेल (Crude Oil) खरीदना जारी रख सकेंगी। यह लाइसेंस 5 मार्च, 2026 से प्रभावी है, जिससे भारत को पुराना सस्ता तेल मिलेगा। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर बढ़ती तेल कीमतों का बोझ कम होगा, जो शेयर बाजार के लिए लंबी अवधि में एक सकारात्मक संकेत हो सकता है।
वर्तमान में बाजार पूरी तरह से भू-राजनीतिक (Geopolitical) परिस्थितियों पर निर्भर है। कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों का रुख आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेगा। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे इस अस्थिरता के दौर में संभलकर निवेश करें और ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपनाएं।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. प्राइम टीवी इंडिया इस पर दावा नहीं करता है ना ही किसी बात पर सत्यता का प्रमाण देता है।









