Swami Avimukteshwarananda और Yogi सरकार में ठनी, Keshav Maurya बनेंगे संकटमोचक?

प्रयागराज माघ मेले में 'पालकी स्नान' को लेकर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच विवाद गहरा गया है। शंकराचार्य ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को समझदार बताते हुए उनका समर्थन किया है, वहीं सीएम योगी आदित्यनाथ ने 'कालनेमि' वाले बयान से तीखा पलटवार किया है। जानें क्या है इस धार्मिक और राजनीतिक संग्राम की पूरी कहानी।

Swami Avimukteshwarananda

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जनवरी 24, 2026

Swami Avimukteshwarananda: प्रयागराज के पावन संगम तट पर माघ मेले के दौरान शुरू हुआ विवाद अब धार्मिक गलियारों से निकलकर उत्तर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गया है। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला प्रशासन के बीच ‘पालकी स्नान’ की परंपरा को लेकर गतिरोध कम होने का नाम नहीं ले रहा है।

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शंकराचार्य का बड़ा राजनीतिक बयान

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने हाल ही में एक निजी न्यूज़ चैनल को दिए साक्षात्कार में उत्तर प्रदेश की सत्ता संरचना पर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का खुला समर्थन करते हुए कहा कि राज्य की जिम्मेदारी किसी ‘अकड़’ वाले व्यक्ति के बजाय केशव मौर्य जैसे सुलझे हुए और समझदार व्यक्तित्व के पास होनी चाहिए। शंकराचार्य के अनुसार, मौर्य ने स्वीकार किया है कि प्रशासन से चूक हुई है, जो उनकी परिपक्वता को दर्शाता है।

परंपरा बनाम प्रशासन

शंकराचार्य ने बसंत पंचमी जैसे प्रमुख पर्व पर भी संगम में डुबकी नहीं लगाई। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक उन्हें ससम्मान ‘पालकी’ के साथ स्नान की अनुमति नहीं मिलती, उनका धरना जारी रहेगा। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि मुगल काल में भी पेशवाओं ने पालकी परंपरा का सम्मान किया था, ऐसे में वर्तमान प्रशासन द्वारा इसे ‘नई परंपरा’ बताना पूरी तरह से निराधार और गलत है।

विपक्ष की सक्रियता और भाजपा की चुप्पी पर तीखे सवाल

विपक्षी नेताओं के आगमन पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए शंकराचार्य ने भाजपा की घेराबंदी की। उन्होंने पूछा कि यदि खुद को ‘हिंदूवादी’ कहने वाली पार्टी के शासन में संन्यासियों और बटुकों का अपमान हो रहा है, तो भाजपा नेता उनसे मिलने क्यों नहीं आ रहे? उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि सत्ताधारी दल को अपनी हर बात सही लगती है, तो आने वाले समय में जनता ही उनकी किस्मत का फैसला करेगी।

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का नरम रुख

इस पूरे प्रकरण में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का रुख प्रशासन से भिन्न नजर आ रहा है। आजमगढ़ में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने शंकराचार्य के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की और उनसे अपना अनशन समाप्त कर स्नान करने का विनम्र अनुरोध किया। मौर्य के इस बयान को विवाद सुलझाने की एक कूटनीतिक कोशिश और शंकराचार्य के प्रति नरम रुख के तौर पर देखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कड़ा प्रहार

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मुद्दे पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। बिना किसी का नाम लिए उन्होंने ‘कालनेमि’ शब्द का प्रयोग करते हुए बड़ा प्रहार किया। सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि किसी को भी धर्म की आड़ में स्थापित परंपराओं को बाधित करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि एक संन्यासी का प्रथम धर्म राष्ट्र और सनातन की सेवा होना चाहिए, न कि जिद। योगी के इस बयान ने धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।

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